पोलियो पीड़ित गेंदबाज ने दिलाई थी भारत को इंग्लैंड में पहली जीत
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17 मई के दिन महान गेंदबाज बीएस चंद्रशेखर पैदा हुए थे, वह इंग्लैंड के खिलाफ भारत की पहली जीत के नायक रहे। कर्नाटक के रहने वाले चंद्रशेखर इस वक्त 71 वर्ष के हैं।
चंद्रशेखर का एक हाथ पोलियो से ग्रसित है। इसे उन्होंने अभिशाप के बजाय ताकत बनाया। जानते हैं, उस ऐतिहासिक मैच की कहानी जिसके बाद वह भारतीय क्रिकेट में हीरो बन गए।
भारतीय टीम 1971 में क्रिकेट के जन्मदाता इंग्लैंड दौरे पर थी। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में से दो ड्रॉ पर ख्त्म हो चुके थे। तीसरे पर आर-पार की लड़ाई थी। इंग्लैंड को हराना आसान नहीं था।
भारत उस वक्त अपनी स्पिनिंग के लिए मशहूर था। बिशन सिंह बेदी, चंद्रशेखर और श्रीनाथ वेंकटराघन की तिकड़ी भारत की गेंदबाजी की मजबूती थी। लंदन के ओवेल मैदान में टॉस जीतकर इंग्लैंड ने पहली पारी में 355 रनों का तगड़ा स्कोर खड़ा किया। जवाब में भारत महज 284 रन ही बना सकी। सिर्फ फारुख इंजीनियर ही अकेले फिफ्टी लगाने वाले वीर रहे।
लेकिन दूसरी पारी में चंद्रशेखर ने पलट दी थी बाजी
बीएस चंद्रशेखर को इस मैच के बाद हीरो बनना था, उनकी गेंदबाजी दूसरी पारी में चमकी। इंग्लैंड पहली पारी में 71 रनों की बढ़त बना चुका था। लेकिन दूसरी पारी में महज 101 रनों पर सिमट गया।
इंग्लैंड के बल्लेबाज चंद्रशेखर के आगे नहीं टिके। उन्होंने 38 रन देकर 6 विकेट झटके। इसके अलावा उनकी तिकड़ी के बाकी दो गेंदबाजों बेदी के खाते में 1 और वेंकटराघवन को 2 सफलताएं मिली। दूसरी पारी में भारत ने 4 विकेट रहते जीत हासिल कर ली। इंग्लैंड में भारत की यह पहली टेस्ट जीत थी। भारत ने टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती।
