अंग्रेजों ने भारत की इन कमियों का उठाया फायदा
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बदला सीरीज के नाम से प्रचारित की गई टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की हवा पहले टेस्ट के बाद ही निकल गई। टीम इंडिया एक जीत के बाद ही आत्मविश्वास से भर गई लेकिन इसके बाद इंग्लैंड ने जबरदस्त पलटवार करते हुए बदले के बजाय बैंड ही बजा दिया।
भारतीय थिंक टैंक की रणनीति कई बार समझ से परे रही। रणनीति में न तो जूझने का माद्दा था न कोई प्लानिंग। अब इसे होमवर्क की कमी कहें या इंग्लैंड की जबरदस्त तैयारी लेकिन आखिर में टीम इंडिया में 28 सालों के बाद शर्मनाक सीरीज हार की जिल्लत झेलनी पड़ी।
उल्टा पड़ा फिरकी दांव
टीम इंडिया ने स्पिनरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया। जबकि एक बार अपने स्पिनरों के मुकाबले उन्हें ग्रीम स्वान और मोंटी पनेसर के प्रोफाइल भर देखने की जरूरत थी। इन दोनों के अलावा इंग्लैंड टीम में कई ऐसे पार्टटाइम गेंदबाज हैं जो अश्विन और ओझा सरीखी गेंदबाजी करा सकते हैं। साथ ही उनके पास मुश्ताक अहमद सरीखा स्पिन गेंदबाजी कोच भी है जो उन्हें न सिर्फ गेंदबाजी बल्कि स्पिन के खिलाफ गेंदों को खेलने की कला भी सिखाता है।
बेवजह का बवाल
पिचों को लेकर भारतीय कप्तान धोनी का रवैया समझ से परे रहा। कोलकाता में पिच के मामले को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया। इससे कहीं न कहीं भारतीय टीम का ध्यान भटका। इसके अलावा यहां भारतीयों के अभ्यास की कमी भी आड़े आई।
पिच का पेच
टेस्ट सीरीज की शुरुआत से ही स्पिन पिचों को लेकर काफी बयानबाजी कर दी गई थी। लेकिन सही मायने में देखा जाए तो खुद भारतीय ही पिच का मिजाज सही ढंग से नहीं पढ़ पाए। कोलकाता के बाद नागपुर का विकेट भी मेजबान टीम को समझ में नहीं आया। नागपुर में पहले दो दिन पिच बल्लेबाजी के लिए बेहद मुश्किल थी लेकिन बाद में हैरानी भरे तरीके से इस पर खेलना आसान होता गया। पांचवें दिन जब पिच पर स्पिन खेली नहीं जाती तब यहां खूब आसानी से रन बने।
दिग्गज दे गए दगा
बल्लेबाजी में चेतेश्वर पुजारा को छोड़ दें तो कोई भी बल्लेबाज उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। सचिन, वीरेंद्र सहवाग के अलावा युवा गौतम गंभीर और युवराज बड़ी पारी नहीं खेल सके। यह बताने के लिए काफी है कि पुजारा के बाद बल्लेबाजी में दूसरा सबसे अच्छा औसत स्पिनर अश्विन का है।
गेंदबाजी में मिला गच्चा
गेंदबाजी का हाल और भी बुरा हाल रहा। मीडियम पेसरों ने पूरी तरह निराश किया। जिस विकेट पर एंडरसन और ब्रेसनन अपनी गेंदों से कहर बरपा रहे थे, भारतीय मीडियम पेसर उस पर रन लुटवा रहे थे। टीम कोच जरूर उन्हें बता रहे होंगे कि 130-135 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से रिवर्स स्ंिवग भी किसी काम का नहीं होता।