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रंगभेद के आरोप में घिर गया इंग्लैंड का क्रिकेट बोर्ड: हाथ से जा सकते हैं तमाम अधिकार
Sat, 15 Jan 2022 07:47 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 15 Jan 2022 07:47 PM IST
सार
अजीम रफीक ने कहा था कि जब वे यॉर्कशर क्लब के लिए खेलते थे, तब वहां उनके एशियाई मूल के कारण उन पर कई तरह की फब्तियां कसी जाती थीं। उन्हें शौचालय के पास जाकर बैठने को कहा जाता था और ‘हाथी धोने वाले’ और ‘पाकी’ जैसे अपमान जनक शब्दों से संबोधित किया जाता था...
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इंग्लैंड क्रिकेट टीम
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
इंग्लैंड के क्रिकेट में नस्ल-भेद जारी रहने के लगे आरोप ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच के लिए बनी सांसदों की समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि अगर रंग-भेद खत्म करने के कदम कारगर होते नहीं दिखे, तो उसे क्रिकेट के लिए फंडिंग रोक देनी चाहिए। पूर्व क्रिकेट अजीम रफीक ने इंग्लिश क्रिकेट में रंगभेद जारी होने का इल्जाम लगाया था। तब से ये विवाद सुर्खियों में रहा है।
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रफीक के आरोप लगाने के बाद ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स की डिजिटल, संस्कृति, मीडिया, और खेल से जुड़ी प्रवर समिति ने इस मामले की जांच शुरू की थी। अब समिति ने अपनी सिफारिश में कहा है कि अगर क्रिकेट क्लब और दर्शकों के व्यवहार में उचित प्रगति नहीं दिखती, तो सरकार को कदम उठाने चाहिए। समिति ने अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को सौंपी। समिति ने ब्रिटेन में क्रिकेट की संचालक संस्था- इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) से कहा है कि वह संकेतकों (इंडिकेटर्स) की एक सूची तैयार करे। इन संकेतकों के जरिए रंगभेद दूर करने में होने वाली प्रगति को मापा जाए।
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समिति का ये निष्कर्ष ब्रिटिश अखबारों की सुर्खी बना है कि क्लबों में मौजूद रंगभेद की जानकारी ईसीबी को भी रही हो सकती है। अजीम रफीक यॉर्कशर काउंटी क्रिकेट क्लब के खिलाड़ी थे। उन्होंने वहां अपने साथ हुए व्यवहार की शिकायत पिछले नवंबर में सार्वजनिक रूप से जताई थी। संसदीय समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि रफीक के आरोप में दम है। अखबार फाइनेशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि संसदीय समिति के इस निष्कर्ष के ईसीबी पर दबाव बहुत बढ़ गया है। ईसीबी छोटे क्लबों से लेकर राष्ट्रीय टीम तक को धन उपलब्ध कराता है।
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अजीम रफीक ने कहा था कि जब वे यॉर्कशर क्लब के लिए खेलते थे, तब वहां उनके एशियाई मूल के कारण उन पर कई तरह की फब्तियां कसी जाती थीं। उन्हें शौचालय के पास जाकर बैठने को कहा जाता था और ‘हाथी धोने वाले’ और ‘पाकी’ जैसे अपमान जनक शब्दों से संबोधित किया जाता था।
इस मामले में बढ़े विवाद के बीच ब्रिटेन के खेल मंत्री नाइजेल हडलस्टन ने चेतावनी दी है कि ईसीबी को क्रिकेट संचालन संबंधी उसके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि अगर ईसीबी ने जरूरी कदम नहीं उठाए, तो क्रिकेट के संचालन के लिए एक स्वतंत्र संस्था की नियुक्ति की जा सकती है। उधर अजीम रफीक ने संसदीय समिति की रिपोर्ट की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि कमेटी ने समझदारी भरा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि हर तीन महीने पर ईसीबी के व्यवहार की जांच करने की सिफारिश भी स्वागत योग्य है।
जानकारों के मुताबिक ईसीबी को सरकार से धन से मिलता है, लेकिन वह खुद भी बड़े पैमाने पर राजस्व जुटाता है। इसके बावजूद 2020-21 में उसके कुछ कोष में गिरावट आई। इसकी वजह कोरोना महामारी के दौरान उसकी तरफ से क्लबों को दी गई ज्यादा सहायता थी। उस वर्ष ईसीबी को सरकार को 21 लाख पाउंड की सहायता मिली थी। विश्लेषकों का कहना है कि उसके धन का यही स्रोत अब खतरे में दिख रहा है।