रहाणे के लिए इंग्लैंड का दौरा अभी नहीं तो कभी नहीं जैसा
टेस्ट उप कप्तान रहाणे के लिए आगामी इंग्लैंड का दौरा अभी नहीं तो कभी नहीं जैसा है...पिछली विदेशी सीरीज में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत दिलाने के बावजूद रहाणे को बल्लेबाज के तौर पर इंग्लैंड का दौरा एक युवा खिलाड़ी के लिए नई शुरुआत जैसा ही है।
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अपने टेस्ट करियर के पहले 32 टेस्ट जो करीब तीन साल में खेले गए, अंजिक्य रहाणे ने आठ शतक बनाए। उसमें भी ज्यादा शतकीय पारियां विदेशी जमीं पर अलग-अलग किस्म के धारदार आक्रमण के खिलाफ, जिसके चलते चेतेश्वर पुजारा को नहीं बल्कि मुंबई के इस बल्लेबाज को राहुल द्रविड़ का उत्तराधिकारी माना गया। आलम ये रहा था जिस पर शायद अब फैंस को यकीन करना मुश्किल हो कि कुछ साल पहले तक विदेशी जमीं पर रहाणे का टेस्ट रिकॉर्ड विराट कोहली से भी बेहतर हुआ करता था। लेकिन, बस उसके बाद से रहाणे के खेल और उनके आत्मविश्वास में इस दकर गिरावट आयी कि वो पिछले कुछ सालों में वो बस अपनी छाया मात्र ही दिखतें हैं।
जब रहाणे लय में दिखतें हैं...
ऐसा भी नहीं कि रहाणे पूरी तरह से खत्म हो चुकें हैं क्योंकि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कप्तान के तौर पर उन्होंने मेलबर्न टेस्ट में जो शतक लगाया था उसकी नजीर क्रिकेट इतिहास में कम ही देखने को मिलती है। लेकिन, वही बात रहाणे के लिए परेशानी का सबब भी बनती है। जब रहाणे लय में दिखतें हैं और खेलते हैं तो टेस्ट क्रिकेट में वो रोहित शर्मा और पुजारा तो क्या कोहली से भी विराट दिखने लगते हैं लेकिन अफसोस की बात है कि ऐसे लम्हें बहुत कम देखने को मिलते हैं। और यही वजह है कि अगले महीने से इंग्लैंड दौरे से पहले अगर किसी एक सीनीयर बल्लेबाज के फॉर्म को लेकर टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता की लकीरें खींची हुई हैं तो वो रहाणे ही हैं।
इंग्लैंड का दौरा अभी नहीं तो कभी नहीं जैसा है
दरअसल, टेस्ट उप कप्तान रहाणे के लिए आगामी इंग्लैंड का दौरा अभी नहीं तो कभी नहीं जैसा है...पिछली विदेशी सीरीज में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत दिलाने के बावजूद रहाणे को बल्लेबाज के तौर पर इंग्लैंड का दौरा एक युवा खिलाड़ी के लिए नई शुरुआत जैसा ही है। रहाणे के लिए साल 2021 खास तौर पर मुश्किलें लेकर आया है। इस साल 10 पारियों में रहाणे से 200 रन भी नहीं बने हैं। 19.90 का औसत और सिर्फ एक अर्धशतक ना सिर्फ उनके संघर्ष को बयां करने के लिए काफी है बल्कि सबसे मायूस करने वाली बात भी है। बड़ी बात ये है कि रहाणे ने इन 10 में से 8 पारियों में वो 30 से भी कम रन बना पाए।
...सिर्फ दो अर्धशतक ने रहाणे की छवि को किया था धूमिल
चूंकि रहाणे की साख विदेशी पिचों पर बेहतर खेल दिखाने की रही है तो शायद इंग्लैंड दौरे से पहले उन पर कोई सवाल नहीं खड़ें करता। लेकिन, इंग्लैंड एक ऐसा मुल्क है जिसने रहाणे को अक्सर परेशान किया है। जहां दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रलिया की बाउंसी पिचों पर रहाणे का स्ट्रोक्प्ले जबरदस्त दिखता है वहीं इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों के सीम और स्विंग गेंदबाजों वाले आक्रमण के खिलाफ वो जूझते रहें हैं। अब न्यूजीलैंड के खिलाफ रहाणे को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलना है तो इंग्लैंड के खिलाफ बाद में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज।
पहला इंग्लैंड का दौरा खासा कामयाब रहा था
रहाणे ने इंग्लैंड में खेली 20 पारियों में 30 से भी कम की औसत से रन बनाए हैं। रहाणे के लिए जहां उनका पहला इंग्लैंड का दौरा 2014 में खासा कामयाब रहा था जहां उन्होंने लॉर्ड्स में एक मैच जिताने वाली अविश्वसनीय पारी खेली थी तो इसके बाद अगले दौरे में वो लगातार पस्त दिखे। 2018 के इंग्लैंड दौरे पर दस पारियों में सिर्फ दो अर्धशतक ने रहाणे की छवि को धूमिल किया था।
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