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घर के भीतर के प्रदूषण का खतरा
विवेक नागिया
Updated Wed, 16 Mar 2016 02:32 PM IST
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हम अक्सर बाहरी वातावरण के वायु प्रदूषण (आउटडोर पॉल्यूशन) की बातें करते हैं, लेकिन मानव स्वास्थ्य के लिए घरेलू प्रदूषण (इनडोर पॉल्यूशन) भी कम खतरनाक नहीं है, संभवतः ज्यादा ही। घर के अंदर के प्रदूषण की मुख्य वजह वेंटिलेशन की उचित सुविधा नहीं होना, उच्च तापमान और सीलन का स्तर है। अगर घर में रहने वाले लोगों की संख्या ज्यादा हो और रहने के लिए स्थान अपर्याप्त, तो स्थिति और भी खराब हो जाती है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, घरेलू वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण दुनिया भर में चालीस लाख से ज्यादा लोग असमय मृत्यु के शिकार होते हैं। न्यूमोनिया से पचास फीसदी ज्यादा बच्चे घरेलू वायु प्रदूषण के कारण असमय काल कवलित होते हैं। घर के भीतर वायु प्रदूषण के कारण हर साल 38 लाख लोग हृदयाघात, पुराने फेफड़े के रोग और फेफड़े के कैंसर के कारण मरते हैं। भूमि पर रेंगने वाले शिशु एक दिन में चार सिगरेट के बराबर प्रदूषित वायु अपनी सांस के जरिये ग्रहण करते हैं।
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घरेलू वायु में मुख्यतः कार्बन मोनोडायक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डायक्साइड जैसे प्रदूषक तत्व होते हैं, जो खाना पकाने और घरों के गर्म करने के लिए उपयोग किए जाने वाले जैविक ईंधन को जलाने से निकलते हैं। घरों के अंदर सिगरेट पीने से भी प्रदूषण फैलता है। घरेलू प्रदूषण के कारण चक्कर आने, उनींदापन, सिरदर्द, आंख, नाक और गले में जलन, फेफड़े के कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं। घरेलू वातावरण में प्रदूषण के मुख्य स्रोत घरेलू धूल, पालतू जानवर, एयरकंडीशन का ठीक से रख-रखाव नहीं होना, भारी कालीन, भारी सामान और बिस्तर होते हैं। घरेलू वायु प्रदूषण से दमा, एलर्जी, अक्सर श्वसन तंत्र में संक्रमण, सर्दी और फ्लू जैसी बीमारियां भी होती हैं।
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इसके अलवा एयरोसोल स्प्रे, हेयर स्प्रे, इत्र, गोंद, क्लीनिंग एजेंट, फैब्रिक सॉफ्टनर, कीटनाशक, डियोडरैंट्स, ड्रायक्लीन कपड़े, खुशबूदार मोमबत्ती और यहां तक कि मच्छरों के भगाने वाले कॉयल एवं मैट्स से भी घरों के अंदर की वायु प्रदूषण होती है। ये गुर्दे, जिगर, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को होता है। अन्य रोगों के अलावा वायु प्रदूषण से बच्चों के फेफड़े कमजोर हो सकते हैं।
घरों के अंदर प्रदूषण न हो, इसके लिए कमरों को हवादार बनाए रखने की जरूरत है। पालतू पशुओं को घरों से बाहर रखना चाहिए। कपड़ों के गलीचों के बजाय लकड़ी, टाइल या लिनोलियम के फर्श को तरजीह देनी चाहिए। तकिये, रजाई एवं गद्दे को हवाबंद डब्बे में रखना चाहिए, ताकि उनमें धूल प्रवेश न कर सके। अपने तकिये, कंबल एवं बिस्तर को नियमित रूप से 60 डिग्री सेल्सियस पर साफ करना चाहिए। घरों में भारी सामान एवं पर्दे लगाने से परहेज करना ही ठीक है। फर्श को साफ करने के लिए झाड़ू लगाने के बजाय वैकम क्लीनर का उपयोग उचित होगा। इसी तरह एलर्जी की शिकायत है, तो तेज असर वाली इत्र, ऑफ्टरशेव, डियोडरैंट्स एवं खुशबूदार फूलों से परहेज करना पड़ता है। रसोई घर और स्नानागार में चिमनी एवं एग्जस्ट का प्रयोग जरूरी है। फिल्टर के साथ एयर प्यूरीफायर का उपयोग भी अच्छा विकल्प है। घर के अंदर धूम्रपान की इजाजत तो किसी को देनी ही नहीं चाहिए।