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मंशा तो अच्छी है: युवा आबादी में देश को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की क्षमता; उम्मीदों की इंटर्नशिप योजना

Wed, 31 Jul 2024 06:56 AM IST
patralekha chatterjee पत्रलेखा चटर्जी
Updated Wed, 31 Jul 2024 06:56 AM IST
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सार
बजट में प्रस्तावित इंटर्नशिप योजना को लेकर लोगों में दिलचस्पी बढ़ी है। इस योजना का लक्ष्य 500 शीर्ष भारतीय कंपनियों के माध्यम से पांच साल में एक करोड़ युवाओं को कौशल प्रदान करना है। इसका लक्ष्य 21 से 24 वर्ष के वैसे युवा हैं, जो न तो कहीं नौकरी करते हैं और न ही जिन्होंने पूर्णकालिक शिक्षा हासिल की है।
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young population has potential to make the country a global economic superpower; Internship scheme of hope
रोजगार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

यह कोई रहस्य नहीं है कि भारत की युवा आबादी में देश को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की क्षमता है। 65 फीसदी से ज्यादा भारतीय 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। भारतीयों की औसत आयु मात्र 28 वर्ष है। यह भी किसी से छिपा नहीं है कि इस संभावित गतिशील, युवा कार्यबल को एक बड़ी बाधा का सामना करना पड़ता है- कौशल का अंतर, जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों से अपेक्षित कौशल और कर्मचारियों के पास वास्तव में मौजूद कौशल के बीच की असमानता को बताता है।



भारत के लाखों युवक-युवतियों के पास, जिनमें औपचारिक डिग्रीधारी भी शामिल हैं, देश में या उसके बाहर आज के गतिशील कार्यस्थल के लायक जरूरी कौशल का अभाव है, चाहे वह विनिर्माण का क्षेत्र हो या सेवा का। भारत की उन्नति तभी होगी, जब उसका कार्यबल तेजी से बदलते कामकाज की दुनिया में कार्य करने के लिए तैयार हो। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डाटा, डाटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा तेजी से भविष्य के मुख्य कौशल बनते जा रहे हैं। इसके अलावा, विश्लेषणात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, संकट प्रबंधन और टीम के साथ मिलकर काम करने का हुनर भी महत्वपूर्ण है।


बेशक कुछ सम्मानजनक अपवाद हैं, लेकिन अब भी भारत की शिक्षा प्रणाली व्यापक स्तर पर रटने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करती है, जिससे युवा लोग कार्य की बदलती दुनिया के लिए अयोग्य साबित होते हैं। इसमें बदलाव की जरूरत है, और इसके लिए व्यापक तौर पर फिर से प्रतिभा को तराशने और पुनर्कौशल की जरूरत है। यह सब नरेंद्र मोदी सरकार के केंद्रीय बजट-2024 में प्रस्तावित नई इंटर्नशिप योजना के लिए प्रासंगिक हैं। कौशल पर ऐसे समय में जोर दिया गया है, जब 2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कॉलेज से निकलने वाले दो में से लगभग एक स्नातक रोजगार के योग्य नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि, 'अनुमानों से पता चलता है कि लगभग 51.25 फीसदी युवा ही रोजगार के योग्य माने जाते हैं। यानी कॉलेज से निकलने वाले लगभग दो में से एक युवा अभी रोजगार के लिए तैयार  नहीं माने जाते हैं। हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले दशक में यह आंकड़ा 34 फीसदी था, जो बढ़कर 51.3 फीसदी हो गया है।' सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि 2030 तक सालाना औसतन लगभग 78.5 लाख नौकरियां पैदा करने की जरूरत है।

बजट में प्रस्तावित इंटर्नशिप योजना को लेकर लोगों में दिलचस्पी बढ़ी है। इस योजना का लक्ष्य 500 शीर्ष भारतीय कंपनियों के माध्यम से पांच साल में एक करोड़ युवाओं को कौशल प्रदान करना है। इसका लक्ष्य 21 से 24 वर्ष के वैसे युवा हैं, जो न तो कहीं नौकरी करते हैं और न ही जिन्होंने पूर्णकालिक शिक्षा हासिल की है। आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर और चार्टर्ड एकाउंटेंसी कॉलेज के स्नातक इसके योग्य नहीं हैं। अधिकांश लागत सरकार खुद वहनकरेगी, लेकिन संगठनों को अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) फंड से इसमें योगदान देना जरूरी है। 

इस योजना पर नजर डालने से पता चलता है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत की शीर्ष 500 कंपनियों में से प्रत्येक को पांच वर्ष में 20,000 युवाओं को इंटर्नशिप कराना होगा, यानी हर साल 4,000 युवाओं को। प्रशिक्षुओं को प्रति माह 5,000 रुपये इंटर्नशिप भत्ता और 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि देनी होगी। कंपनियों से अपेक्षा है कि वे अपने सीएसआर फंड से प्रशिक्षण लागत और इंटर्नशिप लागत का 10 फीसदी वहन करें। 

यकीनन यह एक महत्वाकांक्षी योजना है। लेकिन अभी तक इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है और योजना के बारे में जवाबों से ज्यादा सवाल हैं। सरकार ने इस पर जोर दिया है कि यह योजना 'स्वैच्छिक' है, जिसका मतलब है कि किसी भी कंपनी को इसमें शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित योजना में किन 500 कंपनियों का संदर्भ दिया जा रहा है। 
एक कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) प्रमुख ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'हालांकि सरकार का रोजगार सृजन का इरादा सही दिशा में है, लेकिन एक साल में संख्या को 500 से बढ़ाकर 4,000 तक पहुंचाना हमारे लिए मुश्किल होगा।' एक और चिंता यह है कि यदि इंटर्न नौकरी छोड़ देता है या कंपनी उसे बीच में ही हटा देती है, तो फंड का क्या होगा? एक और जरूरी बात है कि प्रभावी कौशल विकास के लिए एक मजबूत आधार की जरूरत होती है। अगर गांवों में रहने वाले लोगों सहित औसत भारतीयों के लिए बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता खराब रहती है, तो आधार कमजोर रहेगा। इसलिए बुनियादी शिक्षा पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है। प्रस्तावित इंटर्नशिप योजना की मंशा अच्छी है, लेकिन इसे और अधिक विस्तार से समझने की आवश्यकता है।

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