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हां भी और न भी
अरविंद तिवारी
Updated Mon, 15 Apr 2013 09:15 PM IST
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इस देश की विडंबना देखिए भाई साहब, कि एक तरफ तो कहा जा रहा है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण करो, दूसरी तरफ सत्ता के दो केंद्र भी बर्दाश्त नहीं हो रहे! भुस में ‘लूघर’ डालने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब भुस जलेगा, तो वह कोठरी भी जलेगी, जिसमें भुस भरा हुआ है। ‘होलटाइमर’ पार्टी प्रवक्ताओं के बयान फरेबी नहीं हैं, मगर उनकी व्याख्या जिस तरह विरोधी दलों द्वारा की जा रही है, वह फरेबी है।
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अपने प्रधानमंत्री की छवि को ‘कातर’ टाइप बताने वालों की आंखें तब फटी रह गईं, जब उन्होंने कह दिया कि वह अगले पीएम की होड़ में हैं भी, और नहीं भी। सच-सच बताना ऐसा कौशल किसी और नेता में देखा है? मीडियाकर्मियों के तंग नजरिये का यह हाल है कि वह अपने पीएम से कहते हैं कि आप ‘यस’ या ‘नो’ में जवाब दो! सब जानते हैं कि राजनीति में ‘यस’ और ‘नो’ होता ही नहीं। वहां सिर्फ ‘शो’ होता है। जिसके पास तुरुप के तगड़े पत्ते आ जाते हैं, वह गेम में ‘शो’ करवा देता है।
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भाई साहब, अब मैं आपको एक टॉप सीक्रेट वाकया बताने जा रहा हूं। कुछ दिनों पहले अपने पीएम ब्रिक्स सम्मेलन में गए थे। अनौपचारिक क्षणों में वह ब्राजील और चीन के नेताओं के साथ चाय पी रहे थे। चीन के नेता ने चाय पीकर खाली कप उल्टा रख दिया। ब्राजील के नेता ने कप सीधा रख दिया। हमारे प्रधानमंत्री ने काफी सोचने और समझने के बाद कप को टेढ़ा रख दिया।
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चीन और ब्राजील के नेताओं ने अपने पीएम को ऐसा करने के बारे में पूछा, जिसके जवाब में अपने पीएम ने उन दोनों से उल्टा और सीधा कप रखने के बारे में पूछ लिया। चीन के नेता ने कहा, मुझे और चाय नहीं चाहिए, इसलिए कप उल्टा रखा है। ब्राजील के नेता ने कहा, मुझे चाय और चाहिए, इसलिए कप सीधा रखा है। अपने पीएम बोले, मैं तो हिंदुस्तानी नेता हूं, इसलिए कप टेढ़ा रखा है। चाय आ गई, तो पी लेंगे, नहीं आई, तो हमारे कप को उल्टा ही समझना!
भाई साहब! इस घटना से आप समझ सकते हैं कि अपने पीएम अगली बार पद लेने के लिए लालायित नहीं हैं। कुर्सी हाथ आ गई, तो बैठ जाएंगे, वरना उन्हें संन्यासी ही समझना! हो सकता है कि इतिहास खुद को दोहराए और अपने पीएम तीसरी बार भी कुर्सी पर बैठ जाएं। पार्टी यदि हारती है, तो पीएम उसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे, क्योंकि सत्ता का दूसरा केंद्र भी है।