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Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Year 2022 was full of disruptions Corona, climate change and the Russian invasion of Ukraine

Year Ender 2022: व्यवधानों भरा रहा यह साल, कोरोना, जलवायु परिवर्तन और यूक्रेन-रूसी संघर्ष में उलझी रही दुनिया

Fri, 30 Dec 2022 11:04 AM IST
patralekha chatterjee पत्रलेखा चटर्जी
Updated Fri, 30 Dec 2022 11:04 AM IST
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सार
कोरोना, जलवायु परिवर्तन और यूक्रेन पर रूसी हमला- ये तीन ऐसे व्यवधान रहे हैं, जिनका व्यापक असर रहा है। अनिश्चितता के मौजूदा दौर में यह निश्चित है कि ऐसे व्यवधान आते रहेंगे। इस साल का सबक यही है कि ऐसी संभावित घटनाओं से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
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Year 2022 was full of disruptions Corona, climate change and the Russian invasion of Ukraine
रूस और यूक्रेन युद्ध - फोटो : ANI

विस्तार

यदि एक शब्द में वर्ष 2022 का सार बताने के लिए कहा जाए, तो वह है व्यवधान। और हमने इस वर्ष कई रूपों में व्यवधान का सामना किया, जो एक महत्वपूर्ण संदेश का संकेत देता है-बेहद अनिश्चित समय की शुरुआत। यह सभी घटनाओं के लिए तत्काल तैयारियों की आवश्यकता पर बल देता है।



शुरुआत से वर्ष 2022 की घटनाओं पर नजर डालें, हम कोविड-19 महामारी के डर, मौतों की चिंता, बीमारी और आर्थिक नुकसान से उबर ही रहे थे कि अचानक युद्ध का संकट सामने आ गया। व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला कर दिया, जिसने दुनिया भर में बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा किया। इसका सबसे ज्यादा असर ईंधन और खाद्यान्न पर पड़ा। कीमतें बढ़ गईं और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई।


अब जबकि वर्ष 2022 खत्म हो रहा है, यूक्रेन तो अब भी लड़ और यातना झेल ही रहा है, बाकी दुनिया भी सदमे से जूझ रही है। दुनिया के कुछ हिस्सों में ऊर्जा की कीमतें और खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ गई है। यूरोजोन में वार्षिक मुद्रास्फीति अक्तूबर में तेजी से बढ़कर 10.6 फीसदी हो गई। अब जबकि हम इस वर्ष के अंत के करीब हैं, युद्ध तीन प्रमुख व्यवधानों में से एक है। जलवायु परिवर्तन और कोरोना वायरस अन्य दो व्यवधान हैं, जो अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहे हैं।

कोरोना वायरस एक बार फिर सुर्खियों में है। चीन में यह महामारी फिर से कहर बरपा रही है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को जनता के दबाव में अपनी शून्य कोविड नीति को पलटने के लिए बाध्य होना पड़ा है। यह सिर्फ जनस्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक मामला है, क्योंकि दुनिया चीन निर्मित उत्पादों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। चीन से आ रही ताजा खबरें बता रही हैं कि आगामी आठ जनवरी को चीन कोविड-19 के इलाज को कम करके सीमाओं को फिर से खोल देगा और क्वारंटीन की व्यवस्था को खत्म कर देगा। यह फैसला तीन साल के शून्य-कोविड नीति को खत्म करने और वायरस के साथ जीने की दिशा में चीन का आखिरी कदम है। फिर जलवायु परिवर्तन है, जो न सिर्फ इस ग्रह का तापमान बढ़ा रहा है, बल्कि बाढ़ जैसी स्थितियां भी लाता है, जिसने पाकिस्तान की एक तिहाई आबादी को इस वर्ष प्रभावित किया और यह 'बम साइक्लोन' भी लाता है, जिसने अमेरिका के कुछ हिस्सों को पंगु बना दिया। अब तक बम साइक्लोन कनाडा की सीमा से लेकर मैक्सिको की सीमा तक करीब 3,000 किलोमीटर के दायरे में रिकॉर्ड स्तर पर बर्फवारी, वर्षा और तूफान का कारण बना है। बम साइक्लोन का कहर अभी अमेरिका में जारी है और मरने वालों की संख्या 34 तक पहुंच गई है, जबकि लाखों लोग बिना बिजली के रहने पर मजबूर हैं।

वर्ष 2022 में जलवायु आपातकाल के कारण दुनिया भर में कई चरम मौसमी घटनाएं देखी गईं। यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम नहीं किया गया, तो इन घटनाओं के बढ़ने की आशंका है। अमीर देशों के कारण बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के मुआवजे को लेकर कमजोर देशों ने इस साल नए सिरे से लड़ाई के लिए कमर कस ली है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के 27वें सम्मेलन (कॉप-27) में इसे 'नुकसान और क्षति' के रूप में संदर्भित किया गया था। अत्यधिक और अनिश्चित मौसम शीत लहर में भी योगदान कर सकता है। यह आलेख लिखते वक्त दिल्ली में धर्मशाला और नैनीताल से ज्यादा ठंड दर्ज की गई है।

इन सब चीजों से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं? जैसा कि घिसी-पिटी उक्तियों की कोई भी किताब आपको बताएगी, भारत के बारे में किसी भी बयान का उसके विपरीत तर्क से खंडन किया जा सकता है और अक्सर दोनों सच होते हैं। बस इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि कोई किससे बात करता है और वह सामाजिक-आर्थिक खाद्य शृंखला में कहां है। नया वैरिएंट आने पर भी कोरोना वायरस के लिए भारत बेहतर तरीके से तैयार है। देश में 12 वर्ष से ज्यादा उम्र के 95 फीसदी लोगों ने कम-से-कम टीके की एक खुराक ले ली है और 88 फीसदी से ज्यादा लोगों ने टीके की पूरी खुराक ली है।

जनवरी में बूस्टर डोज के लिए नाक में डालने वाला टीका लगाया जाएगा। भारत को दक्षिण एशिया में व्यापक रूप से एक शानदार जगह के रूप में भी देखा जाता है। अगर हवाई अड्डों पर आने-जाने वालों की संख्या पर गौर किया जाए, तो बहुत से भारतीय अपने महामारी से पहले के, 'सामान्य' जीवन में लौट रहे हैं। लेकिन कहा जाता है कि कई जगह पर छंटनी हुई है और कई छोटे व्यवसाय अभी तक उबर नहीं पाए हैं। अभी मोदी सरकार ने घोषणा की है कि वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दिए जाने वाले सभी खाद्यान्न एक और वर्ष तक मुफ्त देगी और योग्य भारतीयों को जनवरी से हर महीने पांच किलो चावल या गेहूं या मोटा अनाज मुफ्त मिलेगा। जाहिर है, इसमें एक गंभीर सच्चाई छिपी हुई है। इसका मतलब है कि प्रमुख अस्थिर करने वाली घटनाओं के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत का स्थान उज्ज्वल है, भारतीय अरबपति नियमित रूप से सुर्खियों में रहते हैं, फिर भी देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न की आवश्यकता है।

जलवायु परिवर्तन और महामारी के प्रभाव ने गरीबों को ज्यादा प्रभावित किया है। गर्म होती धरती पर शीत लहरों के समय में गरीब सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। लू से निपटने की तैयारियों के बारे में अब ज्यादा जागरूकता है, लेकिन दिल्ली स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट ऐंड वाटर के जलवायु नीति विशेषज्ञ अबिनाश मोहंती कहते हैं कि 'हमें मलिन बस्तियों और अस्थायी बसेरों सहित अपने घरों को शीत लहर के लिए तैयार करने की आवश्यकता है। इसका मतलब गर्म करने वाले उपकरणों तक पहुंच के साथ निर्माण सामग्री बदलाव होगा।'

यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने अक्षय ऊर्जा पर जोर देने की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा उत्पादक भारत जी-20 अध्यक्षता के दौरान अपनी हरित पहलों के माध्यम से अपने सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करेगा।

अनिश्चितता के मौजूदा दौर में एक बात निश्चित है कि हमारे सामने कई तरह के व्यवधान आएंगे और कभी-कभी विभिन्न मोर्चों पर वे व्यवधान एक साथ आक्रमण करेंगे। वर्ष 2023 के लिए यही संदेश है कि सभी घटनाओं के लिए तैयार रहें, क्योंकि यह 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साल होगा, जो जनमत को आकार देगा।

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