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चुनावी शोर में महिला सुरक्षा
सुभाषिनी सहगल अली
Updated Thu, 16 Feb 2017 07:29 PM IST
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सुभाषिनी सहगल अली
उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव के नतीजे कई राजनीतिक दलों के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालेंगे। यही कारण है कि अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर राजनीतिक दल समाज के विभिन्न हिस्सों को आकर्षित कर रहा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तमाम तरीके अपना रहा है। इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाले वे आश्वासन हैं, जो भारतीय जनता पार्टी महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए दे रही है।
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यह बात बिल्कुल सही है कि उत्तर प्रदेश में महिलाएं बेहद असुरक्षित हैं। महिलाओं के खिलाफ बलात्कार, अपहरण और हिंसा की वारदातें काफी बढ़ गई हैं। समाजवादी पार्टी मतदाताओं को यह दिलासा देने की कोशिश कर रही है कि टिकट देने में अपराधियों से परहेज करने के बाद अब पिछली घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी। यानी अगर वह दोबारा सत्ता में आती है, तो कानून-व्यवस्था सुधारना उसकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर होगा। लेकिन विधानसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवारों की सूची यही बताती है कि अब भी पार्टी में अपराधियों की संख्या अच्छी-खासी है। दूसरी ओर, बसपा सख्त कानून-व्यवस्था को अपनी उपलब्धि बताकर अपने पक्ष में वोट मांग रही है। वह अपने पक्ष में इस बात को दोहराती है कि उसके कार्यकाल में किसी बलात्कारी को बख्शा नहीं गया था, चाहे वह उसके अपने दल का नेता ही क्यों न हो।
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भाजपा सबसे अधिक जतन के साथ महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने की बात कर रही है। उसका कहना है कि उसके सत्ता में आने पर उत्तर प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित होंगी। अपने घोषणापत्र में उसने रोमियो-विरोधी जत्थों के गठन का आश्वासन दिया है। क्या इन जत्थों में पुलिसकर्मी होंगे? भाजपा के राष्ट्रीय सह-संयोजक सुनीत भराला ने इस बारे में जो कहा है, वही इस पार्टी की सोच बताने के लिए काफी है। एक समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इन जत्थों का काम 'लव जेहाद ' को रोकना होगा। यानी ये ऐसे गिरोह होंगे, जो दो मजहबों के बीच प्रेम और विवाह के मामले में हस्तक्षेप करेंगे और इन्हें रोकेंगे। जैसे कि इस समय गौरक्षक गिरोह करते हैं। और हैरानी की बात नहीं कि रोमियो-विरोधी जत्थे का यह हस्तक्षेप निश्चित तौर पर हिंसक भी हो सकता है।
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उत्तर प्रदेश में भाजपा द्वारा घोषित लव जेहाद का बड़ा मामला अगस्त, 2014 का था। दरअसल मेरठ जिले के एक गांव की महिला के बारे में यह प्रचार तमाम समाचार पत्रों और चैनलों में बहुत ही जबर्दस्त तरीके से हुआ था कि उसका अपहरण और बलात्कार कुछ मुस्लिम पुरुषों ने किया और फिर उन्हीं में से एक पुरुष के साथ जबर्दस्ती उसका निकाह भी पढ़वा दिया गया। नतीजतन आसपास के इलाकों में तनाव की लपटें उठने लगीं। पुलिस ने कुछ मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं को गिरफ्तार भी किया। उस घटना के कुछ महीनों के बाद उस महिला ने बयान दिया कि उसने एक मुस्लिम से शादी की है और उसके साथ रहना चाहती है। उसके बयान के बाद उस पुरुष को जेल से छोड़ा गया और अब दोनों साथ रह रहे हैं। लड़की के पिता ने पत्रकारों को बताया कि झूठा बयान देने के लिए एक भाजपा नेता ने उसे पच्चीस हजार रुपये दिए थे।
क्या संविधान की धज्जियां उड़ाने वाले संगठन, जिन्हें कानून हाथ में लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, महिलाओं को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं? डर तो इस बात का है कि इस तरह के जत्थे महिलाओं के लिए माहौल और हिंसक व खतरनाक ही बनाएंगे।
-लेखिका माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं।