स्त्री ही क्यों कठघरे में

शंकर शरण Updated Sat, 22 Dec 2012 12:00 AM IST
why women in dock
आज से तीस वर्ष पूर्व दिल्ली में रंगा और बिल्ला नामक दो बलात्कारियों को फांसी दी गई थी। बलात्कार की उस घटना पर भी संसद में उद्वेलन हुआ था। यदि कड़ी सजा मात्र से बलात्कार रुक सकते, तो मामला आसान था। लेकिन ऐसा है नहीं। अर्थ-दृष्टि, नीति-अनीति, शिक्षा और संस्कृति में हो रहे परिवर्तन समाज को प्रभावित कर रहे हैं। यह मूल्यों के क्षरण से जुड़ा विषय है, जिसमें जैसे भी हो पैसा बनाने, और फिर हर तरह के भोग में लिप्त होने को ही जीवन का मुख्य उद्देश्य समझा जा रहा है। वस्तुतः लड़कियों, स्त्रियों के प्रति वस्तुवादी, भोगवादी दृष्टि की बढ़त असली चिंता का विषय होना चाहिए।

चारों तरफ हर तरह के विज्ञापन लड़कियों का शरीर बेचते हैं। सिनेमा और टीवी लड़कियों का शरीर अधिक से अधिक नंगा दिखाने में लगे हैं। विज्ञापन के जुमले लड़कियों को भोग-मात्र की वस्तु बताते हैं। जैसे पहले लोग सुविधा के लिए अपना लोटा या थाली साथ लेकर चलते थे, अब विज्ञापन में लिखा मिलता है, 'कंडोम के साथ चलो।' कास्टिंग-काउच जैसी परिघटना अब सिनेमा में रोल पाने के लिए ही नहीं, बल्कि कई तरह के डील की एक पूर्वापेक्षा सी बन गई है।

विगत कुछ वर्षों में दिल्ली और अनेक शहरों में बेहिसाब संख्या में शराब की दुकानें खोली गई हैं। गौतम बुद्ध ने शराब को ‘दुराचार की जननी’कहा था और उसे आग, तलवार, हिंसक जानवर और पहाड़ से कूद पड़ने से भी अधिक भयकारी बताया था। आज शराब की दुकानें हमारी सरकारें परम उत्साह से हर सड़क पर खोल रही हैं! शराब पीने-पिलाने के प्रति वातावरण इतना सामान्य बनाया जा रहा है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे-बच्चियां भी अठारह वर्ष की होने का इंतजार कर रही हैं, क्योंकि तब उन्हें ‘ड्रिंक’ की अनुमति मिल जाएगी! पर सवाल यह है कि जब वातावरण ऐसा दुष्प्रेरक बन रहा हो, तो क्या वह तब तक रुकी रहेगी?

यह बदलता, बिगड़ता वातावरण मुख्य चिंता का विषय होना चाहिए। क्या अनेक दार्शनिकों ने यह नहीं कहा है कि कल्पना में भी यदि किसी स्त्री के प्रति व्यभिचार का विचार आए, तो वह भी व्यभिचार ही है? तब यह सारे विज्ञापन, फिल्मी दृश्य, कामुक जुमले, सेक्सी कहने-कहलाने को बढ़ावा अंततः व्यभिचार की ओर कदम बढ़ना-बढ़ाना ही है। यह सब गिरती संस्कृति के लक्षण हैं, जिसमें मूल्यों का भारी क्षरण हो रहा है।

यह हमारी भाषा की गिरावट में भी प्रतिबिंबित हो रहा है। हमारे देश में महिलाओं को प्रशंसात्मक अर्थ में सुंदर, आकर्षक, रूपवती, लावण्यमयी आदि कहा जाता रहा है। अब यह सब छोड़कर उन्हें ‘सेक्सी’ कहा जाने लगा है। यह इतना प्रचलित हो रहा है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने भी कह दिया कि लड़कियों को ‘सेक्सी’ कहे जाने को सकारात्मक रूप से लिया जाना चाहिए।

कुछ लोग इसे बात खींचना कह सकते हैं, मगर यह निराधार नहीं है। जिस तरह सुसंगति और कुसंगति होती है, उसी तरह सुप्रेरणा और कुप्रेरणा भी होती है। केवल कानूनी धारा दिखाने से काम चलने वाला नहीं। वैसे भी कानूनी धाराएं भी लोग ही बनाते- बिगाड़ते हैं। जब ‘सेक्सी’ संबोधन सहज हो गया, तो‘सेक्सिस्ट रिमार्क’ स्वतः सामान्य हो जाएगा।

फिर भारतीय दंड संहिता की धाराएं 292, 298 (ए) और (बी) और 509 स्वयं दुर्बल हो जाएंगी, जिनके तहत स्त्रियों पर यौनार्थक फब्तियां कसना या उन्हें यौन-भावात्मक चित्र आदि दिखाना दंडनीय अपराध है। यदि इन सब बातों को बलात्कार की बढ़ती घटनाओं से अलग करके देखने की जिद करें, तो यही साबित होगा कि हम में विचार-विमर्श की क्षमता नहीं है। विदेशी समाजों के व्यापारिक, सांस्कृतिक, वैचारिक, भाषाई व्यवहार की नासमझ नकल करके हमने अपनी चिंतन क्षमता को गहरी चोट पहुंचाई है।

बलात्कारी को बेशक फांसी दें, किंतु समाज को व्यभिचारी, जुआरी, नशेड़ी और मतिहीन, विवेकहीन समाज में बदलने से रोकने पर भी विचार करें। इसके लिए शिक्षा को रोजगार केंद्रित करने के बजाय चरित्र-निर्माण केंद्रित करना जरूरी है। ‘मनीमेकर’ बनाने वाली शिक्षा वस्तुतः कुशिक्षा ही है, जो हमारे युवाओं को दी जा रही है। इसके घातक परिणामों पर विचार करना भी आवश्यक है।

Spotlight

Most Read

Opinion

सैन्य प्रमुख के मन की बात

सैन्य प्रमुख ने सेना के विचारों और उसकी जरूरतों के बारे में बातें की हैं, यह सत्ता में बैठे लोगों का कर्तव्य है कि वे उनके शब्दों और विचारों को ध्यान में रखें और उनका सम्मान करें।

22 जनवरी 2018

Related Videos

कटरीना का नया लुक देखकर दिल तेज धड़कने लगेगा

अमर उजाला टीवी स्पेशल बॉलीवुड टॉप 10 में आज आपको दिखाएंगे ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में कैसा है कटरीना का लुक, अक्षय कुमार क्यों नीलाम करेंगे अपनी साइकिल और पटना में क्यों नहीं हो पाएगी ‘सुपर 30’ की शूटिंग समेत बॉलीवुड की 10 खबरें।

22 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper