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बेटियों के साथ ऐसा क्यों

Sun, 16 Oct 2016 05:33 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 16 Oct 2016 05:33 PM IST
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 Why with with daughters
तवलीन स‌िंह

लखनऊ के रामलीला मैदान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दशहरे की शाम अपने भाषण में देश की बेटियों की दुर्दशा पर दुख व्यक्त करने के बाद सीरिया की एक बच्ची का जिक्र किया। पिछले सप्ताह सीरिया के अलेप्पो शहर पर बमबारी के बाद उस बच्ची का खून और आंसुओं से लथपथ चेहरा टीवी पर दिखाया गया था। अच्छा हुआ कि गर्ल चाइल्ड डे को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने उस बच्ची की बात की। काश, उनको भारत की एक बेटी भी याद आई होती, जो आज सिर्फ इसलिए जिंदा नहीं है, क्योंकि उसने माता-पिता के जोर देने पर लंबा उपवास रखने का ऐसा फैसला लिया था, जिसके लिए उसका शरीर तैयार नहीं था।

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जी, मैं आराधना समदरिया की बात कर रही हूं। आराधना अपने माता-पिता की अनुमति से अड़सठ दिनों तक भूखी रही। नतीजतन उसके शरीर ने जवाब दे दिया। जैन धर्म में चातुर्मास में इस तरह का उपवास रखने की प्राचीन परंपरा है। लेकिन ऐसा उपवास अमूमन वही रखते हैं, जिन्होंने अभ्यास के बाद लंबा उपवास रखने की शक्ति अपने शरीर में पैदा की हो। आराधना में यह शक्ति नहीं थी, क्योंकि उसकी उम्र सिर्फ तेरह साल थी। वह संपन्न परिवार की स्कूल जाने वाली बच्ची थी, सो खतरे की घंटी तभी बजनी चाहिए थी, जब कमजोर हो जाने के कारण पच्चीस दिनों के बाद उसने स्कूल जाना बंद कर दिया था। स्कूल में उसके दोस्त जानते थे कि कई दिनों से आराधना सुबह-साम सिर्फ गरम पानी पी रही थी, पर उन्होंने इस बारे में किसी को कुछ बताना जरूरी नहीं समझा। उसके माता-पिता ने अपनी बेटी को यह उपवास रखने के लिए कहा था, क्योंकि किसी ज्योतिषी ने उन्हें बताया था कि इसी से उनके परिवार की व्यापारिक समस्या का समाधान हो सकता है। आराधना के माता-पिता अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों को बताते भी रहे कि उनकी बेटी बाल तपस्वी बनने जा रही है। नतीजतन उनके घर में रोज भीड़ लगी रहती थी। दर्शनार्थियों में हैदराबाद के राजनेता और सरकारी अधिकारी भी थे। लेकिन इनमें से किसी को नहीं लगा कि बच्ची का इतने लंबे समय तक उपवास रखना ठीक नहीं।
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आराधना की मौत के बाद जब जिम्मेदार लोगों से पूछा गया कि उन्होंने बच्ची को इतना लंबा उपवास रखने की अनुमति क्यों दी, तो उनका जवाब था कि आराधना से भी छोटे बच्चे इतना लंबा उपवास रख चुके हैं। ऐसा हो सकता है, लेकिन सबकी शारीरिक क्षमता तो एक समान नहीं होती। आराधना के माता-पिता पर बेटी की हत्या के लिए एफआईआर दर्ज हो चुकी है। लेकिन आराधना की मौत के लिए सिर्फ वही जिम्मेदार नहीं हैं। उसकी असामयिक मृत्यु के लिए वे लोग भी कम जिम्मेदार नहीं, जो हैदराबाद की गलियों में आराधना को रथ पर दुल्हन के लिबास में अपने माता-पिता के साथ घूमते देख गर्वित महसूस करते थे। आराधना की मृत्यु के लिए वे लोग भी जिम्मेदार हैं, जो इस बाल तपस्वी को देखने उसके घर तो आते थे, लेकिन जो यह नहीं कह पाए कि इतनी छोटी बच्ची को इतना लंबा उपवास नहीं रखना चाहिए।
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इस देश में बच्चों को भूखा रखना अगर जुर्म माना जाता है, तो यह जुर्म करने की अनुमति किसी को नहीं होनी चाहिए। ऐसा नहीं है कि उपवास करना जुर्म है। सभी धर्मों में उपवास की परंपरा है। प्रधानमंत्री खुद भी नवरात्रों के दौरान उपवास रखते हैं। लेकिन लंबा उपवास करने की अनुमति सिर्फ उन्हें ही मिलनी चाहिए, जिनमें यह क्षमता हो। इसी तरह समाज को भी इस तरह के मामलों पर नजर रखनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनहोनी न हो।

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