फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Why we not see reality

हम सच क्यों नहीं देखते

Sun, 18 Sep 2016 06:48 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 18 Sep 2016 06:48 PM IST
विज्ञापन
Why we not see reality
तवलीन सिंह

अपने यहां शोहरत हासिल करने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है कि जब किसी को आसानी से शोहरत मिल जाती है, तो अधिकतर लोगों को खुशी नहीं, ईर्ष्या होती है। सो जब किसी बड़ी शख्सियत पर किसी किस्म की मुसीबत आती है, तो हम उसका साथ देने के बदले उसे और मुसीबत में डालने की कोशिश करते हैं। पिछले सप्ताह यह देखकर मैं हैरान हुई, जब कपिल शर्मा की मुश्किलों पर अखबारों और टीवी में मजाक उड़ाया गया। मुझे एक भी ऐसा लेख पढ़ने को नहीं मिला, जिसमें कहा गया हो कि टीवी के इस अति लोकप्रिय कॉमेडियन ने हमारे जीवन में व्याप्त भ्रष्ट आदतों का पर्दाफाश कर इस देश की सेवा की है। इसमें भी बहुत साहस चाहिए।

विज्ञापन


कपिल शर्मा की निंदा करने के बदले हमको यह कहना चाहिए था कि जब और भी प्रसिद्ध भारतीयों में ऐसा करने की हिम्मत आएगी, तभी हम भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की उम्मीद कर सकेंगे। मेरा मानना है कि कपिल शर्मा ने बहुत साहस दिखाकर प्रधानमंत्री को ट्वीट किया कि करोड़ों रुपये टैक्स अदा करने के बाद भी उनको बृहन्मुंबई नगरपालिका परिषद के किसी अधिकारी को पांच लाख रुपये की रिश्वत देनी पड़ी। जाहिर है कि इस ट्वीट के बाद नगरपालिका के अधिकारी हरकत में आ गए और मीडिया में खुद को पाक-साफ और कपिल शर्मा को बदनाम करने में लग गए। सो यह खबर फैलाई गई कि कपिल शर्मा ने अवैध निर्माण किया है। चूंकि मुंबई में शिवसेना का राज है, ऐसे में, शिवसेना ने एलान किया कि कपिल शर्मा के शो की शूटिंग अब मुंबई में नहीं होने देंगे।
विज्ञापन


निजी तौर पर मुझे उम्मीद थी कि कम से कम अब तो मेरे पत्रकार बंधु देख सकेंगे कि यथार्थ क्या है। यथार्थ यह है कि मुंबई में कम ही ऐसी इमारत होगी, जिसमें अवैध निर्माण करने पर लोग मजबूर नहीं होते हैं, क्योंकि कानून ही ऐसे बने हैं, जिनका पालन करना असंभव है। सीआरजेड कानून का ही मामला लीजिए, कपिल शर्मा ने जिसका कथित उल्लंघन किया है। यह कानून जिसने लागू किया था, उसे शायद इतनी भी जानकारी नहीं थी कि आधा मुंबई शहर समंदर से जमीन लेकर बना है। सो समंदर के निकट निर्माण को अवैध बताना बेवकूफी भी है और भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोलने का जरिया भी।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुंबई में आबादी इतनी ज्यादा है और जमीन इतनी थोड़ी कि आधे से ज्यादा मुंबई वासी झुग्गी बस्तियों में रहते हैं। बाकी आबादी का बड़ा हिस्सा एक या दो छोटे कमरों के टूटे-पुराने फ्लैटों में रहता है। इस महानगर के धनी लोग और बॉलीवुड सितारे भी अक्सर छोटे फ्लैटों में रहते हैं। दिल्ली में सांसद या अधिकारी भी इनसे बड़ी कोठियों में रहते हैं। सो कपिल शर्मा के इस किस्से से पत्रकारों को यह सीख लेनी चाहिए थी कि मुंबई में निर्माण के जितने भी कानून हैं, उन्हें नए सिरे से देखा जाए, ताकि फिजूल के जो प्रतिबंध हैं, उन्हें हटाने का काम हो। उल्टे हम उस व्यक्ति के पीछे पड़ गए, जिसने साहस दिखाकर भ्रष्ट अधिकारियों के चेहरों से पर्दा हटाने की कोशिश की थी।


कपिल शर्मा को उनकी शोहरत की कीमत चुकानी पड़ रही है। कौन है यह नौजवान, जो इतनी छोटी उम्र में इतनी लोकप्रियता हासिल कर मुंबई में रहने लायक हो गया है? इस पूरी प्रक्रिया में वे लोग सामने नहीं आए, जो कपिल शर्मा के शो के प्रशंसक हैं। ऐसे में, यकीन के साथ कहा जा सकता है कि मुंबई महानगर पालिका के अधिकारी अब कपिल शर्मा का जीना हराम कर देंगे। यानी भ्रष्टाचार की जीत हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed