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महिला विरोधी क्यों हैं हमारी सोच और मान्यताएं
सुभाषिनी सहगल अली
Updated Thu, 07 Aug 2014 07:13 PM IST
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अंधविश्वास का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर होता है। वे अपने-आपको इतना असुरक्षित और असहाय महसूस करती हैं कि तमाम रीति-रिवाजों, अंधविश्वास पर आधारित मान्यताओं और अवैज्ञानिक गतिविधियों पर उन्हें जल्दी भरोसा हो जाता है, और पूरी तन्मयता के साथ वे उन्हें अपनाने में जुट जाती हैं। जबकि इस तरह की सोच का सबसे बुरा असर उन्हीं के जीवन पर पड़ता है।
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लगभग हर रेलवे स्टेशन पर एक पुस्तक बिकती है-हिंदू मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार । इसे पढ़कर कई मान्यताओं की जानकारी मिलती है। जैसे कि अगर कोई गर्भवती महिला आंखों में काजल लगाती है, तो उसका बच्चा अंधा हो सकता है। इसी तरह, अगर कोई सौभाग्यवती महिला करवा चौथ का व्रत नहीं रखती, तो उसके पति के साथ कोई दुर्घटना घट सकती है। स्वाभाविक है कि तमाम महिलाएं इन मान्यताओं का सम्मान करती हैं और इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करने की कोशिश करती हैं। लेकिन इन मान्यताओं के पीछे जो अवैज्ञानिक और महिला-विरोधी सोच छिपी हुई है, वह यह है कि हर मुसीबत के लिए महिला ही जिम्मेदार है।
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कुछ दिन पहले कानपुर में एक ऐसी घटना घटी, जिससे पूरा शहर सिहर उठा। बदायूं, मोहनलालगंज और न जाने कहां-कहां, क्या-क्या नहीं हुआ है, लेकिन कानपुर की घटना के बारे में सुनने के बाद तो ऐसा लगता है कि इसने बर्बरता, वहशीपन और अमानवीयता के तमाम कीर्तिमान तोड़ दिए।
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घटना का पहला वर्णन इस प्रकार था कि एक रईस आदमी अपनी दुल्हन को लेकर रेस्टोरेंट में खाना खाने गया। खाना खाकर दोनों अपनी गाड़ी में बैठकर जाने लगे। शहर के सबसे ज्यादा वीआईपी इलाके की यह बात है। रात ग्यारह बजे वे थोड़ी ही दूर पहुंचे थे कि मोटरसाइकिल पर सवार छह युवकों ने उनकी गाड़ी रोक ली। उन्होंने पुरुष को मारकर गाड़ी से उतार दिया और गाड़ी व उसकी दुल्हन को लेकर चले गए।
दूसरे दिन शहर में कोहराम मच गया। दंगे की तैयारी होने लगी, क्योंकि इस बात का प्रचार था कि मोटरसाइकिल सवार लड़के एक खास 'समुदाय' के हैं। लेकिन कुछ ही घंटों में सच्चाई सामने आने लगी। गाड़ी ले जाने वाले लड़के अनजान नहीं, पति के ड्राइवर और कर्मचारी ही थे। पति के कहने पर ही उन्होंने बड़ी बेरहमी के साथ उस नव-विवाहिता की जान ली। चाकू से गोद-गोदकर उसकी हत्या कर दी। इस बात का भी अंदेशा है कि अगर उसका पति खुद चाकू नहीं चला रहा था, तो पत्नी को अपने सामने दर्दनाक मौत मरते हुए देख रहा था या उसकी चीखें सुन रहा था।
पति पड़ोस में रहने वाली एक लड़की से प्यार करता था। लेकिन चूंकि उन दोनों की कुंडलियां नहीं मिलती थी, इसलिए शादी नहीं हो पाई। दुर्भाग्य से जिस निरीह लड़की की कुंडली उससे मिल गई, उसके साथ उसकी शादी हो गई। उसकी हत्या पति के हाथों लिखी है, इसका जिक्र कहीं भी उसकी कुंडली में नहीं था। कुंडली जैसी अनिवार्य मानी जाने वाली वस्तु से कई बार कितना अनर्थ हो सकता है, इसकी कल्पना भी करना मुश्किल है।
हत्या करने वाले सजा पाएंगे, इसकी संभावना तो है, लेकिन क्या कोई कभी सोचेगा कि कुंडली मिलने के बावजूद उस स्त्री की ऐसी दर्दनाक मृत्यु क्यों हुई।
(लेखिका माकपा नेत्री हैं)