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धूप आने दो: हर महीने क्यों घटता-बढ़ता है चंद्रमा, क्या है क्रोधित दक्ष के शाप की कहानी

Sun, 10 Dec 2023 06:56 AM IST
Ashutosh Garg आशुतोष गर्ग
Updated Sun, 10 Dec 2023 06:56 AM IST
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सार
क्रोधित दक्ष ने चंद्रमा को शाप दिया कि तुम्हें अपने रंग-रूप और तेज पर बहुत अभिमान है। मैं तुम्हें शाप देता हूं कि तुम क्षय रोग से ग्रस्त हो जाओगे तथा तुम्हारा तेज एवं रूप नष्ट हो जाएगा।
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Why does moon wax and wane every month, mythology of angry Daksha cursed Chandra
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दक्ष प्रजापति की बहुत-सी कन्याएं थीं। एक दिन चंद्रमा भ्रमण करते हुए निकला तो उसकी दृष्टि दक्ष की पुत्रियों पर पड़ गई। उन सब में रोहिणी सबसे सुंदर थी। रोहिणी को देखते ही चंद्रमा उस पर आसक्त हो गया। चंद्रमा के तेज एवं सौंदर्य से प्रभावित होकर रोहिणी समेत दक्ष की अन्य छब्बीस पुत्रियों का मन भी चंद्रमा पर आ गया। वे सब चंद्रदेव से विवाह करने की इच्छुक हो गईं। यह जानकर चंद्रमा ने दक्ष के सामने सभी सत्ताईस कन्याओं से विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया। दक्ष ने चंद्रमा का प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार करते हुए सभी कन्याओं का विवाह चंद्रमा से कर दिया।



चंद्रमा ने दक्ष की पुत्रियों से विवाह तो कर लिया किंतु वह सबसे अधिक प्रेम रोहिणी से करता था। इस कारण चंद्रमा की शेष छब्बीस पत्नियां उपेक्षित महसूस करने लगीं। यह उपेक्षा धीरे-धीरे ईर्ष्या में बदल गई। फिर एक दिन उन्होंने चंद्रमा की शिकायत अपने पिता से कर दी।


दक्ष ने सुना तो उन्होंने चंद्रमा से मिलकर उसे समझाया और पक्षपात न करने का तथा सभी पत्नियों को समान रूप से प्रेम करने का सुझाव दिया। चंद्रमा ने धैर्य से दक्ष की बातें सुनीं परंतु फिर भी रोहिणी के प्रति उसका स्नेह कम नहीं हुआ। कुछ दिन बाद दक्ष को पता लगा कि चंद्रमा ने उनकी अवहेलना की है तो वह क्रोधित हो उठे और उन्होंने चंद्रमा को शाप दे दिया : ‘तुम्हें अपने रंग-रूप और तेज पर बहुत अभिमान है और तुमने मेरी अवहेलना की है इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूं कि तुम क्षय रोग से ग्रस्त हो जाओगे तथा तुम्हारा तेज एवं रूप नष्ट हो जाएगा!’

दक्ष के शाप का चंद्रमा पर तुरंत प्रभाव हुआ और उसे क्षय रोग हो गया। उस रोग के कारण चंद्रमा का तेज घटता चला गया और अंत में पूरी तरह समाप्त हो गया। अब चंद्रमा के पास न प्रकाश रहा और न ही पहले-सा सौंदर्य! चंद्रमा को मिले इस शाप का प्रभाव संपूर्ण सृष्टि पर भी पड़ने लगा क्योंकि चंद्रमा के प्रकाश के अभाव में पृथ्वी रात्रि के समय अंधकार में डूब गई और काल-गणना भी गड़बड़ाने लगी। सृष्टि के नियमों में उथल-पुथल हुई तो परेशान होकर सभी देवता, चंद्रमा को साथ लेकर भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और उन्होंने ब्रह्मा से इस समस्या का उपाय पूछा।

ब्रह्मा ने कहा कि चंद्रमा को शाप से मुक्ति दिलाने का सामर्थ्य केवल भगवान शिव के पास है। इसलिए उन्होंने चंद्रमा को शिवलिंग स्थापित करने और शिव की उपासना का सुझाव दिया...
यह सुनकर चंद्रमा के मन में पुनः स्वस्थ होने की आशा जग गई और उसने पश्चिमी समुद्र के तट पर एक शिवलिंग का निर्माण किया और वहीं बैठकर शिव के नाम का जाप आरंभ कर दिया। काफी समय बीत गया। आखिर एक दिन चंद्रमा की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चंद्रमा को दर्शन दिए। शिव ने चंद्रमा की इच्छा पूछी तो चंद्रमा ने शिव से वरदान में अपना तेज और सौंदर्य वापस माँग लिया।

यह सुनकर शिव दुविधा में पड़ गए। वह बोले, ‘मैं प्रजापति दक्ष के शाप को समाप्त तो नहीं कर सकता किंतु उसे संशोधित अवश्य कर सकता हंू। तुम पर दक्ष के शाप का प्रभाव तो होगा किंतु वह प्रभाव स्थायी नहीं होगा। इसलिए तुम्हारी आभा पूर्ण लुप्त होने के बाद अगले दिन से ही फिर बढ़ने लगेगी। तुम पंद्रह दिनों में फिर से दीप्तिमान हो जाओगे। परंतु अगले पंद्रह दिन तक फिर शाप के असर से तुम्हारा तेज घटना शुरू हो जाएगा। इस प्रकार तुम्हारा यह तेज घटता-बढ़ता रहेगा और इसी से माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष बनेंगे। दक्ष से तुम्हारी रक्षा के लिए मैं तुम्हें अपने मस्तक पर धारण करूंगा!’

चंद्रमा को अपने शीष पर धारण करने के कारण शिव का नाम ‘चंद्रशेखर’ पड़ा। चंद्रमा का एक नाम ‘सोम’ है इसलिए जिस स्थान पर उसने शिव की आराधना की थी, उसे भी पवित्र नाम मिला – सोमनाथ। देश के बारह ज्योर्तिलिंगों में इसकी गिनती होती है।

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