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सांप और नेवले की ऎसी दोस्ती आप कभी सोच नहीं सकते

Thu, 07 May 2015 11:36 AM IST
जेम्स थर्बर
जेम्स थर्बर Updated Thu, 07 May 2015 11:36 AM IST
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who is the enemy

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला पैदा हो गया, जो सांप तो क्या, किसी भी जानवर से लड़ना नहीं चाहता था। सभी नेवलों में यह बात फैल गई। आखिरकार एक सभा बुलाई गई और वहां तय हुआ कि अगर नेवला किसी और जानवर से लड़ना नहीं चाहे, तो कोई बात नहीं, मगर सांपों से लड़ना और उनका खात्मा करना हर नेवले का फर्ज है। वह शांतिप्रिय नेवला भी उस पंचायत में मौजूद था। उसने तत्काल सवाल किया, फर्ज क्यों?

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उसका यह पूछना था कि नेवले तरह-तरह के कयास लगाने लगे। उन्होंने समझा और आपस में कहा-सुना भी कि यह न केवल सांपों का हिमायती और नेवलों का दुश्मन दिख रहा है, बल्कि नए ढंग से सोचने वाला और नेवला-जाति की परंपराओं एवं आदर्शों का विरोधी भी है।
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उस नेवले के पिता ही कहने लगे, वह पागल है। उसकी मां ने भी कहा, वह बीमार है। भाई भी कहां पीछे रहने वाला था, वह तपाक से बोला, वह बुजदिल है। इसके बाद तो जिन नेवलों ने उसे कभी देखा नहीं था, उन्होंने भी कहना शुरू कर दिया कि वह नेवला सांपों की तरह रेंगता है, और नेवला-जाति को नष्ट कर देना चाहता है। शांतिप्रिय नेवले ने प्रतिवाद किया, मैं तो शांतिपूर्वक सोचने-समझने की कोशिश कर रहा हूं।

यह सुनकर तत्काल एक अन्य नेवला बोल उठा, सोचना गद्दारी की निशानी है! दूसरा चिल्लाया, सोचना तो हमारे दुश्मनों का काम है। फिर तो यह भी अफवाह फैल गई कि सांपों की तरह उस नेवले के भी जहर के दांत हैं। तब उस पर मुकदमा चला और बहुमत से उसे देश-निकाले की सजा दे दी गई। यानी जो दुश्मन के हाथों न मारा जाए, वह अपने ही लोगों के हाथों मारा जा सकता है।

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