आंतरिक सुरक्षा पर कब गर्व कर सकेंगे हम
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यह वाकई गर्व का विषय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा गणतंत्र दिवस पर हमारे मुख्य अतिथि होंगे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच बेहतर संबंधों के कारण संभव हुआ है। आज चारों तरफ देश में नई आशाएं जन्म ले रही हैं, क्योंकि अमेरिका भारत को एक विशिष्ट स्थान दे रहा है। लेकिन हमारी आंतरिक सुरक्षा का हाल यह है कि हमारे राष्ट्रीय अतिथि को अपनी सुरक्षा के लिए भारी लाव-लश्कर के साथ आना पड़ रहा है। गणतंत्र दिवस की परंपरा के अनुसार देश के राष्ट्रपति पहले चार घोड़ों की बग्घी में अतिथि के साथ राजपथ पर आते थे, परंतु पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा की दृष्टि से अब राष्ट्रपति कार द्वारा अतिथि के साथ राजपथ पर आते हैं। पिछले करीब 10 दिन से अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ जोर दे रहे थे कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति की कार में सुरक्षित नहीं रहेंगे, इसलिए वे होटल से अपनी अति सुरक्षित कही जाने वाली कार बीस्ट में ही आएंगे। परंतु काफी समझाने के बाद वे संतुष्ट हुए। इतना विश्वास भी हम तब पैदा कर पाए, जब 15,000 सीसीटीवी कैमरे एवं एक लाख अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी के जरिये सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा इस प्रकार की कवायद एवं इतना बड़ा सुरक्षा लाव-लश्कर हमें यह बताने के लिए काफी है कि हमारी आंतरिक सुरक्षा का क्या हाल है। अमेरिका आज दुनिया का अव्वल राष्ट्र इसलिए बना है कि वह दिखावे में विश्वास नहीं करता। उसने हमारी आंतरिक सुरक्षा का आईना हमारे देशवासियों को दिखा दिया है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी जब अमेरिका गए थे, तो उनके साथ केवल एक छोटा-सा सुरक्षा दल उन्हीं के साथ हवाई जहाज में गया था, क्योंकि अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था इतनी अभेद्य है कि वहां किसी अतिथि को खतरा नहीं हो सकता।
किसी देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से आंकी जाती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में देश की सीमाओं की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता आती है। सीमाओं की सुरक्षा तो हम मजबूती से कर रहे हैं, आर्थिक तरक्की की राह पर भी आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर हम आज भी कमजोर हैं। यदि आज हमारी आंतरिक सुरक्षा यानी कानून-व्यवस्था एवं पुलिस की हालत अच्छी होती, तो क्या अमेरिका को मात्र दो दिनों के लिए सुरक्षा का इतना बड़ा लाव-लश्कर भेजना पड़ता। हमारी आंतरिक सुरक्षा की इस बदहाली के लिए राजनीतिक व्यवस्था ही जिम्मेदार है। विकास की राजनीति के स्थान पर सांप्रदायिकता, जातिवाद एवं क्षेत्रवाद होता रहा है। जानबूझकर पुलिस एवं कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं किए गए। आज भी देश की पुलिस 1861 के अंग्रेजी पुलिस ऐक्ट के अनुसार काम कर रही है। कानून की किताबों में अब भी ऐसे कानून हैं, जो अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं। उन्हीं कानूनों का सहारा लेकर शातिर अपराधी बच निकलते हैं। इन सब कारणों से देश की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति खराब होती है, और हमारी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है।
दिल्ली की एक अदालत ने सही पूछा कि ये 15,000 सीसीटीवी कैमरे केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए क्यों लगाए गए और आम नागरिक के लिए क्यों नहीं। आदर्श स्थिति तो यही होती कि हर समय देश में आंतरिक सुरक्षा इतनी ही चाक-चौबंद रहती, जितनी ओबामा के कारण की जा रही है। अब समय आ गया है, जब आर्थिक सुधारों के साथ-साथ पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस, न्याय एवं प्रशासनिक व्यवस्था में भी सुधार किया जाए। जब हमारी आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा उच्च कोटि की होगी, तो हम अपने मेहमानों से गर्व के साथ कह सकेंगे कि हम आपकी सुरक्षा करने में सक्षम हैं।