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जब मिले दो सच्चे मित्र

Wed, 28 Jun 2017 03:30 PM IST
नरेश चंद्रा
नरेश चंद्रा Updated Wed, 28 Jun 2017 03:30 PM IST
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When met two true friends
नरेश चंद्रा

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा थी, जिसको लेकर पहले से ही तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का व्हाइट हाउस में जोरदार स्वागत किया, बल्कि उन्हें अपना सच्चा दोस्त और अच्छा प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि मोदी भारत में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। आर्थिक तौर पर भारत की प्रगति के लिए उन्होंने मोदी को मुबारकबाद भी दी। आम तौर पर डोनाल्ड ट्रंप नेताओं से हाथ मिलाना पसंद करते हैं, न कि गले  लगना। लेकिन प्रधानमंत्री  मोदी को अपना सच्चा मित्र कहने वाले ट्रंप ने न सिर्फ उनसे हाथ मिलाया, बल्कि गले भी लगे। दोनों नेताओं की इस मुलाकात में अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली, जो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों के भविष्य के लिहाज से संभावनाएं जगाती हैं।

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इन दोनों राष्ट्रवादी नेताओं की बातचीत में निश्चित रूप से आतंकवाद का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत से पहले ही अमेरिकी विदेश विभाग ने कश्मीरी आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के नेता सैयद सलाहुद्दीन का नाम अंतरराष्ट्रीय आंतकवादियों की सूची में जोड़कर पाकिस्तान को एक सख्त संदेश दे दिया। सैयद सलाहुद्दीन का नाम अंतरराष्ट्रीय आंतकवादियों की सूची में शामिल करना बताता है कि ट्रंप के नेतृत्व में अमरीका भारत के साथ काम करना चाहता है। भारत में अमेरिका के इस कदम का स्वागत किया गया है, क्योंकि उम्मीद है कि इससे पाकिस्तान को सबक मिलेगा और इससे आतंकी संगठनों की गतिविधियों और फंडिंग पर असर पड़ेगा। दोनों नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में दुनिया से आतंकवाद को खत्म करने पर प्रतिबद्धता जताई। ट्रंप ने कहा कि हम कट्टर इस्लामिक आतंकवाद को खत्म करेंगे, वहीं मोदी ने कहा कि आतंकवाद से लड़ना दोनों देशों के हित में है और हम मानवजाति की रक्षा के लिए इसे मिलकर खत्म करेंगे।
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लेकिन देखने वाली बात होगी कि क्या अमेरिका पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में कटौती करेगा? किसी आतंकवादी को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का बेशक एक प्रतीकात्मक महत्व है, लेकिन पाकिस्तान को असली सबक तभी मिलेगा, जब उसे मिलने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगे। जहां तक पाकिस्तान से अमेरिका के रिश्ते की बात है, तो यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका अपने हित में संबंध बनाए रखना चाहता है। अगर आईएसआई के साथ अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का तालमेल नहीं रहता है, तो उसे अफगानिस्तान में काफी मुश्किलें आ सकती हैं।
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जहां तक चीन के प्रति ट्रंप प्रशासन के नजरिये की बात है, तो इस बारे में अभी उनकी नीति खुलकर सामने नहीं आई है। हालांकि इस मुलाकात से पहले ही ट्रंप सरकार भारत को 22 ड्रोन बेचने के लिए राजी हो गई, जिनका इस्तेमाल भारत हिंद महासागर में चीनी नौसेना पर नजर रखने के लिए कर सकता है। दोनों नेताओं के बीच बेहतर तालमेल सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, चीन के लिए भी एक संदेश है। इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व पर अंकुश लगाना भारत और अमेरिका, दोनों की नीतियों का हिस्सा है। लेकिन इस मामले में हमें यह ध्यान में रखना होगा कि चीन न सिर्फ हमारा पड़ोसी देश है, बल्कि सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों देशों के बीच निष्पक्ष और पारस्परिक व्यापार की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर किया जाएगा और हम दोनों मिलकर नई तकनीक और बुनियादी संरचनाओं के साथ रोजगार में बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि भारत की एक एयरलाइंस ने सौ अमेरिकी जहाजों का ऑर्डर दिया है, जो सबसे बड़ा ऑर्डर है और इससे अमेरिका में हजारों नौकरियां मिलेंगी। गौरतलब है कि नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में भारत तेजी से उभर रहा है, इसलिए भारत को नए विमानों की जरूरत होगी। इस दृष्टि से यह समझौता दोनों देशों में हित में है। अपने अमेरिका फर्स्ट की नीति को आगे रखते हुए ट्रंप ने भारत में ऊर्जा निर्यात की उम्मीद जताते हुए कहा कि इस संबंध में दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस महत्वाकांक्षी अमेरिकी दौरे से भारत के लोगों को यह उम्मीद थी कि दोनों नेताओं के बीच एच1बी वीजा पर बात होगी और भारत के हित में इसका कुछ हल निकलेगा, लेकिन दोनों नेताओं द्वारा जारी संयुक्त बयान में इसका जिक्र नहीं है। इसी तरह परमाणु समझौते से संबंधित विषय पर भी दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है। पेरिस जलवायु समझौते पर भी कोई बातचीत नहीं हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा और बातचीत को द्विपक्षीय सहयोग के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका वैश्विक विकास के प्रमुख इंजन हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी एक नई ऊंचाई को छुएगी और इससे उत्पादकता, विकास, रोजगार सृजन तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। मजबूत और सफल अमेरिका भारत के हित में है और भारत का विकास और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका अमेरिका के हित में है।


उन्होंने ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट और अपनी मेक इन इंडिया के बीच संतुलन साधते हुए कहा कि हम दोनों की इन नीतियों में कोई अंतर नहीं है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दोनों नेताओं के बीच रिश्तों की शुरुआत एक सकारात्मक माहौल में हुई है, जिससे भविष्य के लिए उम्मीदें बनती हैं।

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