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भ्रष्टाचार पर यह कैसी सियासत

Thu, 15 Dec 2016 07:14 PM IST
शिवदान सिंह
शिवदान सिंह Updated Thu, 15 Dec 2016 07:14 PM IST
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What kind of this politics on corruption
शिवदान सिंह

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले में 423 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी की गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार के एक बड़े कदम के रूप में देखी जा रही है। परंतु कांग्रेस इसे दबाव की राजनीति मानकर देख रही है, क्योंकि इटली की अदालत में पेश आरोप पत्र में कहा गया था कि ग्यूसोन ओरसी जो अगस्ता वेस्टलैंड की मूल कंपनी के सीईओ थे, उनके द्वारा सोनिया गांधी के सलाहकारों को कथित तौर पर रिश्वत के जरिये खरीदने का प्रयास किया गया था। यह मामला वर्ष 2005 का है, जब देश में कांग्रेस की सरकार थी और त्यागी वायुसेना प्रमुख। यहां पर इटली की न्याय व्यवस्था की सराहना करनी होगी कि यह मामला वर्ष 2012 में एक रेडियो प्रसारण के द्वारा प्रकाश में आया और आठ अप्रैल, 2016 को कंपनी के सीईओ ओरसी को चार वर्ष की कठोर कारावास की सजा वहां की अदालत ने सुना दी।

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क्या हमारे देश में इतनी शीघ्र तथा किसी अन्य देश में ऑर्डर लेने के लिए दी गई रिश्वत जैसी अनैतिक हरकत पर ऐसी कार्रवाई की कल्पना की जा सकती है, तो इसका उत्तर होगा नहीं। इसका कारण है कि हमारे देश में इतिहास प्रसिद्ध राजनीति एवं अर्थशास्त्र के ज्ञाता चाणक्य की सिखाई साम, दाम, दंड भेद की राजनीति से शासन चलाने की संस्कृति 1947 से ही चली आ रही है। नतीजतन भ्रष्टाचार के अनेक उदाहरण हैं, जिनमें दस-दस वर्ष से विभिन्न जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं, परंतु अभी तक मुकाम तक पहुंचने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सजा की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती है। इस क्रम में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कर्नाटक में मुस्लिम वक्फ बोर्ड की 27,000 एकड़ जमीन की हेरा-फेरी, राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित घोटाला, कोयला घोटाला जैसे अनेक उदाहरण गिनाए जा सकते हैं, जिनकी जांच में सजा कब सुनाई जाएगी, कहा नहीं जा सकता।
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देश में ज्यादातर बड़े घोटालों की जांच का जिम्मा सीबीआई को ही सौंपा जाता है और उनकी जांचों की विस्तृत जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने विगत 16 अक्टूबर को राज्य सभा में दी। उनके अनुसार, कुल 2,555 प्रकरणों में जांच दस वर्ष से ज्यादा समय से चल रही है। देश की विभिन्न अदालतों में सीबीआई के 9,347 मामले लंबित हैं।
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भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्र की संपदा, धन दौलत तथा इसके नागरिकों के जान-माल की जिम्मेदारी संबंधित प्रदेश सरकारों की होती है। इसलिए इन दोनों को जब कोई क्षति, जैसे आर्थिक भ्रष्टाचार या नागरिक के प्रति हिंसा, पहुंचाता है, तो इसमें पीड़ित पक्ष संबंधित प्रदेश सरकार मानी जाती है और प्रदेश सरकारों का प्रतिनिधित्व स्थानीय पुलिस करती है। और ऐसा अक्सर देखने में आया है कि आर्थिक घोटाले या गंभीर या सनसनीखेज अपराध केवल सत्ता के नजदीक रहने वाले अपराधी ही करते हैं। तब इस स्थिति में अपराधी और पीड़ित पक्ष एक ही तरफ आ जाते हैं। इसलिए प्रदेश सरकार इस प्रकार के घोटालों तथा अपराधों की जांच को लंबे समय तक केवल इसलिए खींचती है, ताकि अपराध के बारे में जनता का ध्यान हट जाए तथा साथ-साथ उससे संबंधित साक्ष्य भी मिट जाए। उसके बाद जब सत्ता पक्ष चुनाव हारकर विपक्ष में आता है। उस समय नया सत्ता पक्ष इन अपराधों को दबाव बनाने के लिए उठाता-दबाता रहता है।

लेकिन अब समय आ गया है, जब भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार किया जाए।

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