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विकास दर के आंकड़े क्या कहते हैं : लाखों लोगों के लिए क्या मतलब, इससे कौन खुश होगा और कौन दुखी

Sun, 04 Sep 2022 07:10 AM IST
Palaniappan Chidambram पी. चिदंबरम
Updated Sun, 04 Sep 2022 07:10 AM IST
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सार
आंकड़ों को उन लोगों के नजरिये से देखना होगा जो कि संबंधित क्षेत्र के प्रदर्शन से प्रभावित होंगे। उदाहरण के लिए, 'कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन', देश के अधिकांश परिवारों की जिंदगियों को प्रभावित करता है।
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What growth rate figures says: does it mean for millions of people, who will be happy and who unhappy
indian economy - फोटो : istock

विस्तार

बीते बुधवार को एनएसओ ने जीडीपी की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) 2022-23 के अनुमान जारी किए हैं। इनमें सबसे अहम आंकड़ा है 13.5 फीसदी की विकास दर। सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) के संदर्भ में यह आंकड़ा है 12.7 फीसदी। यह देखते हुए कि रेटिंग एजेंसियों, बैंकों और रिजर्व बैंक ने 13 फीसदी से 16.2 फीसदी (रिजर्व बैंक) के बीच अनुमान व्यक्त किया था और मैं समझता हूं कि इस सीमा में आने वाली किसी भी संख्या पर नजर जाना स्वाभाविक है।



हालांकि सांख्यिकी से परे एक बड़ी दुनिया है। यह आलेख इस पर केंद्रित है कि एनएसओ के आंकड़ों का वास्तविक दुनिया में रहने वाले लाखों लोगों के लिए क्या मतलब है और कौन इससे खुश होगा और कौन दुखी।


आंकड़े जो मायने रखते हैं
मैंने 2019-20 और 2021-22 से संबंधित आंकड़ों और 2022-23 की पहली तिमाही के आंकड़ों के आधार पर एक टेबिल तैयार की है (नीचे देखें)। चूंकि वर्ष 2020-21 महामारी से प्रभावित था, जिसका लंबा हिस्सा लॉकडाउन में चला गया, इसलिए मैंने टेबिल में उस वर्ष के आंकड़े शामिल नहीं किए। मैं बता सकता हूं कि 2019-20 एक सामान्य वर्ष था। वर्ष 2021-22 को बहाली वाले वर्ष के रूप में देखा गया। 2022-23 वह वर्ष है, जिसमें उम्मीद की जा रही थी कि पूर्ण बहाली होगी। इसलिए ध्यान वर्ष 2019-20, 2021-22 और 2022-23 के आंकड़ों पर केंद्रित होना चाहिए।

इसके अलावा आंकड़ों को उन लोगों के नजरिये से देखना होगा जो कि संबंधित क्षेत्र के प्रदर्शन से प्रभावित होंगे। उदाहरण के लिए, 'कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन', देश के अधिकांश परिवारों की जिंदगियों को प्रभावित करता है। 'खनिज और उत्खनन' तथा 'निर्माण' महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये दो क्षेत्र ऐसे लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार देते हैं, जिनके पास कम कौशल हो और जिनकी स्कूली शिक्षा ठीक से पूरी न हुई हो। 'वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएं' महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये शिक्षित और पढ़े लोगों को रोजगार देती हैं, जिन्हें व्हाइट कॉलर एम्पलाई कहा जाता है। मानदंड 2019-20 है। एक देश जो वृद्धि कर रहा है उसे पिछले वर्ष तथा मानदंड वर्ष से ऊपर और अधिक तेज दर से वृद्धि करनी चाहिए।

जीवीए के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि महामारी वर्ष (2020-21) के निराशाजनक प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था 2021-22 में उबर गई, लेकिन कृषि को छोड़कर क्षेत्रवार वृद्धि सामान्य वर्ष 2019-20 के स्तर तक नहीं पहुंच सकी। यहीं पर एक मर्मभेदी सबक निहित है :  महामारी हो या न हो, किसानों और खेत मजदूरों के पास अपना अस्तित्व बचाने के लिए अपने खेतों में मेहनत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उनके पास 'वर्क फ्रॉम होम' की विलासिता उपलब्ध नहीं है! ('वित्तीय आदि' में मामूली वृद्धि सांख्यिकीय रूप से नगण्य थी।)

समस्याएं कायम हैं
इसलिए हमें 2022-23 में जो वृद्धि देखनी चाहिए, वह 2021-22 की वृद्धि के आधार पर नहीं, बल्कि 2019-20 की वृद्धि के आधार पर देखनी चाहिए। टेबिल की अंतिम दो पंक्तियां इस अंतर को उजागर करती हैं। 2022-23 की पहली तिमाही की वृद्धि की तुलना जब हम पिछले वर्ष (2021-22) की पहली तिमाही से करते हैं, तो यह प्रभावी लगती है, लेकिन जब हम मानक वर्ष (2019-20) की पहली तिमाही से तुलना करते हैं, तो निराशा होती है। 'कृषि इत्यादि' ने लगता है कि अपना हौसला कायम रखा है। 'वित्तीय, रियल एस्टेट इत्यादि' में तेजी उत्साहजनक है। लेकिन टेबिल में दिखाए गए अन्य तीन क्षेत्र बताते हैं कि अर्थव्यवस्था की कहानी में समस्याएं कायम हैं। 

मैंने टेबिल में 'विनिर्माण' को शामिल नहीं किया, क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उसके आंकड़े, आंकड़ों के जंगल में खो जाएं। तीनों संबंधित वर्षों की पहली तिमाही में विनिर्माण में मूल्य संवर्धन था : 5,65526, 7,77,249 और 6,05104 करोड़ रुपये। वृद्धि के संदर्भ में 2022-23 की पहली तिमाही ने 2019-20 की तुलना में सात फीसदी की वृद्धि और 2021-22 की तुलना में 4.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। मेरा निष्कर्ष है कि विनिर्माण में वृद्धि पर्याप्त नया निवेश न होने या मांग कम होने या फिर दोनों ही वजहों से कमजोर है।  सहज रूप से मेरा निष्कर्ष है कि एमएसएमई क्षेत्र अब भी मंदी में है।

पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में स्थिर मूल्यों (करोड़ रुपये में) सकल मूल्य संवर्धन 
वर्ष कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन खनिज और उत्खनन निर्माण व्यापार, होटल, परिवहन और संचार वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर
2019-20
2021-22
2022-23
448,703
472,258
493,325
82,696
80,243
85,423
259,728
225,166
262,918
662,305
445,454
559,723
796,851
805,847
880,313
2022-23 तक (फीसदी में)
2019-20
2021-22



9.9
4.5



3.3
6.5



1.2
16.8



-15.5
25.7



10.5
9.2

धीमी शुरुआत
महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भविष्य में खासतौर से रोजगार पर इसके क्या प्रभाव पड़ेंगे। किसानों और खेतिहर मजदूरों की हैसियत में कोई बदलाव नहीं आएगा और गैर कृषि नौकरियों में थोड़ी हलचल हो सकती है। चूंकि 'खनन इत्यादि' और 'निर्माण' 2019-20 की तुलना में थोड़े ही बेहतर हैं, जब तक कि दमदार पुनरुद्धार नहीं होता है, अकुशल और कम कुशल श्रमिकों के बीच बेरोजगारी अधिक बनी रहेगी। विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम स्पष्ट रूप से अपर्याप्त हैं और एमएसएमई क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में विफल रहे हैं। कुशल, व्हाइट कॉलर श्रमिकों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन सेवा क्षेत्र ('व्यापार, होटल इत्यादि') का एक बड़ा हिस्सा अभी तक पुनर्जीवित नहीं हुआ है, जिससे नौकरी के अवसर कम हो रहे हैं। (नोट : अगस्त में बेरोजगारी दर बढ़कर 8.3 फीसदी हो गई।)

रिजर्व बैंक ने 2022-23 में तिमाही-वार वृद्धि का अनुमान 16.2, 6.2, 4.1 और 4.0 प्रतिशत बताया था। ध्यान दें कि यह गिरावट को दर्शा रहे हैं। हमने पहली तिमाही की शुरुआत 13.5 फीसदी के साथ की है, जो रिजर्व बैंक के अनुमान से कम है। यह धीमी शुरुआत बाकी तीन तिमाहियों के बारे में क्या बताती है?

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