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बाबा हैं, तो कुछ कर दिखाएं

Sun, 15 Sep 2013 07:05 PM IST
श्याम विमल
श्याम विमल Updated Sun, 15 Sep 2013 07:05 PM IST
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whact can do baba?

कोई बंगाली फकीर हैं, जो अपनी इबारत के साथ छपे हुए पैंफलेट में दैनिक अखबार के जरिये सुबह-सुबह हमारे नगर के पीड़ित जनों की पीड़ा हरने घर-घर आ जाते हैं। और प्रॉमिसिंग अंदाज में, धन के प्यास की अपनी ओट में समस्याग्रस्त लोगों की कमजोरियों को जानी-पहचानी भाषा में संबोधित करने लगते हैं।

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पैंफलेट की जो भाषा होती है, उससे लगता है कि फकीर जानते हैं कि हमारे बहुविध समाज में ज्यादातर दकियानूस या अंधविश्वासी जनों में अधिकांश औरतें होती हैं, जो सूफी संतों-पीरों की दरगाहों पर सिजदा करने, अपनी सेलिब्रिटी की रौबदाब स्थिति के मुताबिक भीड़-भड़क्के में फूलों के टोकरों व बढ़िया चादर शिरोधार्य करके, अपनी नेतागीरी चमकाने, फिल्में प्रमोट कराने, मन्नतें आदि मनवाने झोली फैलाए दर पर जाते रहते हैं।
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इधर पैंफलेट वाले फकीर समाज की परेशानियों में काजी समान दुबले नहीं, बल्कि उबले हुए जाते हैं और घोषित करते हैं-लव मैरिज, मनचाहा प्यार, वशीकरण, शैतान व दुश्मन से छुटकारा, गृहक्लेश, कारोबार, मूठकरनी (पता नहीं, यह क्या बला है), जादू-टोना, ऊपरी असरात आदि ए टू जेड सभी समस्याओं का समाधान घर बैठे फोन पर भी होता है। बशर्ते दो नींबू, अगरबत्ती के दो पैकेट और फीस के 151 रुपये साथ लेते आएं। 'फीस' शब्द डॉक्टर की फीस या पब्लिक स्कूलों की फीस के समांतर प्रतीत होता है।
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इस पैंफलेट में सर्वधर्म समभाव दर्शाते ये प्रतीक भी छपे हुए हैं-साईंबाबा की आशीर्वाद में उठा हाथ, ओम, चांद-तारा, सिक्खी किरपान, पांच आम्रपत्र-नारियल और स्वस्तिक चिह्न से सजा कलश।

यह सब यहां लिखने का असली मुद्दा कुछ खास है। वह यह कि ऐसे सूफियाना किस्म के दरवेश या तांत्रिक अगर इतने पहुंचे हुए जीव हैं, तो ऐसा कुछ क्यों नहीं कर दिखाते कि अपने इस भारत महान के राजनेता-परिवारों में, सभी मंत्रालयों में, संस्थानों में, खेलों-मैचों में तथा चुनावों में फैले जो भ्रष्टाचार, घोटाले, बदनामियां, दागी, जातिवाद, छुआछूत, झूठ-फरेब, मिलावट, जमाखोरी, नकल, धोखा, महंगाई, कुपोषण, गरीबी, बलात्कार, दुराचार, दंगा-फसाद, हत्या-आत्महत्या और असाध्य रोग हैं, उन्हें दूर कर दें।


ये साधु-संत-पीर-फकीर-बाबा लोग कुछ कर दिखाएं, तो बात बने। ये अगर सचमुच असंभव को संभव कर सकते हैं, तो इस देश को भ्रष्टाचार, अपराध और स्त्री-विरोधी हिंसा से मुक्त करें।

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