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West Asia: नेतन्याहू नहीं, अयातुल्ला का युद्ध.. इस संघर्ष में आजादी तभी, जब इस्राइल के अस्तित्व से गुरेज न हो

Thu, 10 Oct 2024 05:20 AM IST
SPrasannarajan प्रसन्नराजन एस प्रसन्नराजन
Updated Thu, 10 Oct 2024 05:20 AM IST
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सार
गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्ला और यमन में हूती। ये तथाकथित ‘स्वतंत्रता सेनानी’ हैं, जो सीधे ईरान की शह पर काम करते हैं। ये वे प्रतिनिधि हैं, जो ईरान के पड़ोस को अराजकता की स्थिति में रखते हैं, जो वैसी ही क्रांति के अनुकूल है, जिसे अयातुल्ला खुमैनी के उत्तराधिकारी लगभग आधी सदी पहले आगे बढ़ाना चाहते थे।
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West Asia Conflict Netanyahu vs Ayatullah War Israel and Iran tension amid question of existence
इस्राइल ने लेबनान पर किए हवाई हमले (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

दुनिया के सबसे बड़े और घातक लड़ाकू संगठन के नेता हसन नसरल्ला की हत्या पर शोक व्यक्त करते हुए ईरान ने एक संप्रभु राष्ट्र पर मिसाइल हमला किया। गाजा युद्ध के बाद पारस्परिक न्याय की तत्वमीमांसा में, ईरान द्वारा इस्राइल पर 181 बैलिस्टिक मिसाइलें दागना, बेरूत में तेहरान के सबसे प्रिय प्रतिनिधि और शिया गुरिल्ला की अपरिहार्य मृत्यु के बाद विनम्र उदारवादी हलकों में एक आघात-प्रतिरोधी व्याकुलता थी।



पिछले वर्ष सात अक्तूबर को जब यहूदियों ने नरसंहार के बाद घृणा की सबसे भयावह प्रताड़ना को झेला था, उसकी वर्षगांठ से पहले हुआ यह हमला उस प्रचलित नैतिक व्यवस्था के अनुरूप था, जिसके अनुसार फलस्तीनी बेघरों की नजर में इस्राइल एक भौगोलिक गलती है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की धुरी कहां है, यह इसकी एक और आधिकारिक पुष्टि मात्र थी। गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्ला और यमन में हूती-ये तथाकथित ‘स्वतंत्रता सेनानी’ हैं, जो सीधे ईरान की शह पर काम करते हैं। और ये वे प्रतिनिधि हैं, जो ईरान के पड़ोस को अराजकता की स्थिति में रखते हैं, जो वैसी ही क्रांति के अनुकूल है, जिसे ईरानी क्रांति के नेतृत्वकर्ता और ईरान के पूर्व सुप्रीम नेता अयातुल्ला खुमैनी के उत्तराधिकारी लगभग आधी सदी पहले आगे बढ़ाना चाहते थे, जब उन्होंने युद्ध की घोषणा की और दूर-दराज की यहूदी बस्तियों में आतंक का निर्यात शुरू किया।


यदि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की संभावना बढ़ती जा रही है, तो यह मान लेना सत्य के विरुद्ध अपराध होगा कि यह सब एक सनकी यहूदी राज्य की देन है, जो अस्तित्व संबंधी अपनी चिंताओं को गाजा और अन्य स्थानों पर बर्बर समुदायों को स्थानांतरित कर रहा है। जो दिख रहा है और जो कहा जा रहा है, सत्य उससे अलग भी हो सकता है। गाजा की तस्वीरें दिखाकर इस्राइल को कोसना आसान है, लेकिन इसकी आड़ में संघर्ष की जड़ में छिपे मुख्य अपराधी को बख्शा नहीं जा सकता। इस्लामी आतंकवाद की दुनिया में ईरान की बादशाहत पश्चिम एशिया में हिंसक अस्थिरता को बनाए रखती है। इस्राइल को हमेशा चौकन्ना रखना एक रणनीति है, भले ही इसके लिए उसे कई हार और अपमान का सामना करना पड़े।

ईरान, जो पहले की तुलना में अपने परमाणु सपने को साकार करने के ज्यादा करीब है, इन्कार और विनाश की कला को संरक्षण देता है, जो पीड़ितों के बाजार में व्यापक रूप से लोकप्रिय है। इस कैनवास पर इस्राइल एक अमूर्त चित्र है, जो वास्तविकता को प्रतिबंधित करता है, या एक झूठ है, जिसे केवल एक ऐतिहासिक सत्य की जमीन पर गिराया गया है : फलस्तीनी लोगों का बेघर होना। बाकी सब कुछ, चाहे वह राष्ट्रवादी संघर्ष का इस्लामीकरण हो या शांति सूत्र की असंभवता, जिसमें इस्राइल के अस्तित्व के अधिकार पर बातचीत हो, गौण और खारिज करने योग्य है। ईरान को अराजकता के इस कैनवास की जरूरत है, क्योंकि क्रांति के अवशेषों को दुश्मन के मंडराते खतरे के बिना बनाए नहीं रखा जा सकता है। यह दुश्मन खुद भू-राजनीतिक जरूरतों के साथ विकसित हुआ है।

पुराना शैतान, जो साम्राज्यवादी अमेरिका है, अब बेकाबू नहीं रहा, लेकिन इस्राइल के अस्तित्व ने उसकी इच्छाशक्ति को कठोर बना लिया है। जो युद्ध व्यापक होता जा रहा है, वह नेतन्याहू का युद्ध नहीं है। वह अयातुल्ला का युद्ध है। किसी भी युद्ध में, अपना बचाव करने के लिए जवाबी हमला करने का अधिकार होता है। अपने हालिया मिसाइल हमले के बाद ईरान ने दंडित होने का अधिकार अर्जित किया है। तेहरान को विलंबित प्रतिशोध के बारे में भरोसा है, क्योंकि इस्राइल का साथ दे रहे अमेरिका की नजर इस पूरे परिदृश्य पर है। बाइडन इस्राइल का समर्थन ऐतिहासिक दायित्व के रूप में करते हैं, और उनका समर्थन इस्राइल की रक्षा के लिए सीमित प्रतिबद्धता के साथ आता है। वह ईरान की परमाणु बम को लेकर प्रतिबद्धता के बारे में अनावश्यक चिंतित नहीं हैं, जिसका केवल एक ही निशाना है-इस्राइल।

ईरान ने अपने परमाणु प्रतिष्ठानों पर इस्राइली हमले की आशंका को पहले से कहीं अधिक बल दिया है, लेकिन सहयोगी और दुश्मन के रूप में अमेरिका नैतिक रूप से नरम पड़ गया है। इस्राइल को पहली बार अपने हितैषी से निराश होना पड़ा है। यह जरूरी नहीं है कि इस्राइल की जवाबी कार्रवाई को रोका जाए, खासकर ऐसे समय में, जब ईरान के सबसे बड़े समर्थक हमास और हिजबुल्ला कमजोर पड़ गए हैं। पश्चिम एशिया के खूनी संघर्ष के चक्र में सब कुछ लगातार बदल रहा है, केवल एक ही चीज स्थिर है, और वह है इस्राइल द्वारा इस्राइल होने के अपने तर्क को संशोधित करने से इन्कार करना। अपने पड़ोस और उससे परे, एक राष्ट्र के रूप में इस्राइल विवाद का विषय बना हुआ है। जब विवाद केवल फलस्तीनियों की मातृभूमि के बारे में था, तो फलस्तीन मुक्ति संगठन यानी पीएलओ नेतृत्व समाधान से पीछे हट गया; और आज, फलस्तीन पश्चिम की सड़कों और परिसरों में स्वतंत्रता का सबसे गूंजता हुआ नारा हो सकता है, लेकिन इसके वास्तविक युद्धक्षेत्रों पर संघर्ष का जवाब ढूंढना आसान नहीं है।

इस संघर्ष में आजादी तभी संभव है, जब इस्राइल के अस्तित्व को मान्यता देने में किसी को गुरेज न हो। ईरान, अपने जागीरदारों को हथियार और पैसे देकर संघर्ष को जीवित रखता है। इस्राइल एक खोई हुई क्रांति का आखिरी तिनका है। इस्राइल अपने जन्म से ही युद्ध में उलझा हुआ है, और आज जो वह एक और बड़े युद्ध की धमकी दे रहा है, उससे पता चलता है कि समय बीतने के साथ-साथ इसके अस्तित्व की परीक्षा और भी कठिन और अलग-थलग पड़ती जा रही है। पश्चिम एशिया में जो कुछ चल रहा है, वह वस्तुतः जीवन और मृत्यु का संघर्ष है। जीवन का केवल एक ही रक्षक है, जबकि मृत्यु के पास ईश्वर और शहीद हैं, जिनका नेतृत्व अंतिम थकी हुई क्रांति कर रही है।

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