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जल संकट: जीवन की सबसे बुनियादी चीज़ के लिए तरस रहा आम आदमी

Mon, 01 Jul 2019 07:01 AM IST
तवलीन सिंह तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Published by: तवलीन सिंह Updated Mon, 01 Jul 2019 07:01 AM IST
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Water crisis in country

इस वर्ष बरसात ने इतनी देर कर दी कि गांव के तालाब में पानी बिल्कुल नहीं है। महाराष्ट्र के इस गांव को मैं वर्षों से जानती हूं और पहली बार ऐसा होते देखा है। कोई बीस वर्ष पूर्व जब पहली बार यहां आना हुआ, तो यह मछुआरों का गरीब-सा गांव था। आज गांव में सबके पास सेल फोन आ गए हैं, हर घर में टीवी है। लेकिन शायद ही कोई घर होगा, जिसमें नलों में पानी आता हो। पानी टैंकरों से आता है। टैंकर न आए, तो पानी की समस्या गंभीर हो जाती है। सो जब टीवी पर प्रधानमंत्री के भाषण सुने संसद के दोनों सदनों में और घोषणा सुनी जल शक्ति मंत्रालय की, तो मुझे निजी तौर पर खुशी हुई। इसलिए कि मैंने अपनी आंखों से स्वच्छ भारत योजना की सफलता इस गांव में देखी है। इस योजना के शुरू होने से पहले इस गांव के तकरीबन सारे लोग खुले में शौच करते थे। अब हर घर में शौचालय है, और जिस समुद्र तट पर गांववासी खुले में  शौच करते थे, वहां आज पर्यटकों के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं।


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इस लिए ‘मोदी है तो मुमकिन है’ वाले नारे में मुझे विश्वास है। विश्वास इस जल शक्ति मंत्रालय पर भी है, क्योंकि जिस व्यक्ति को स्वयं प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत की सफलता का श्रेय देते हैं, उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री ने हर घर में नल से पानी उपलब्ध करवाने का श्रेय दिया है। परमेश्वर अय्यर अन्य सरकारी अधिकारियों से इसलिए अलग हैं, क्योंकि जब प्रधानमंत्री ने लाल किले से 2014 के भाषण में स्वच्छ भारत योजना का एलान किया था,  अय्यर साहब तब वियतनाम में विश्व बैंक में काम कर रहे थे। वह नौकरी छोड़कर वापस आए, क्योंकि देशभक्त तो वह हैं ही, स्वच्छता या सैनिटेशन के विशेषज्ञ भी हैं। स्वच्छ भारत योजना की सफलता में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है। दिल्ली में कुछ दिन पहले जब उनसे मुलाकात हुई थी, तो उनकी नियुक्ति जल शक्ति मंत्रालय में नई-नई हुई थी। बातचीत शुरू होने से पहले उन्होंने स्वीकार किया कि देश में पानी की समस्या इतनी बड़ी है कि इसका समाधान ढूंढना आसान नहीं होगा।

वर्तमान स्थिति यह है कि ग्रामीण भारत के लगभग 80 प्रतिशत घरों में नलों के जरिये पानी नहीं आता। उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और ओडिशा की स्थिति इतनी बुरी है कि पांच प्रतिशत से भी कम ग्रामीण घरों में पानी पहुंचा है। शहरों का इतना बुरा हाल है कि चेन्नई में इस मौसम में पानी सिर्फ वीआईपी घरों में मिल रहा है। आम आदमी आधी रात टैंकरों से दो बाल्टी पानी लेने के लिए गुजार देते हैं। मुंबई में भी हाल अलग नहीं है। वहां वीआईपी घरों में पानी की कोई किल्लत नहीं है, लेकिन आम आदमी बूंद-बूंद पानी बचाने पर मजबूर है। ऊपर से पिछले सप्ताह आरटीआई से जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री और कई अन्य मंत्रियों ने वर्षों से अपने बिल तक नहीं दिए हैं।

अय्यर साहब से जब मेरी मुलाकात हुई, तो उन्होंने कहा कि पानी की समस्याओं का हल ढूंढने के लिए हम इस्राइल से बहुत कुछ सीख सकते हैं। वहां किसी को पानी मुफ्त नहीं दिया जाता। सो जल शक्ति मंत्रालय जब अपना काम शुरू करेगा, तो उम्मीद है कि उन वीआपीई लोगों से सख्ती से पेश आएगा, जो पानी मुफ्त में लेते हैं या जिनकी मुफ्तखोरी का पैसा हम भरते हैं। शर्म की बात है कि जीवन की इस सबसे बुनियादी चीज़ के लिए देश का आम आदमी स्वतंत्रता के सत्तर साल के बाद भी तरस रहा है। जल शक्ति मंत्रालय को युद्ध स्तर पर काम करना होगा। तभी इस समस्या का समाधान संभव होगा।

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