अपनी लंगोटी संभालो मियां

विजय क्रांति Updated Tue, 22 Oct 2013 06:44 PM IST
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मियां नवाज शरीफ बहुत हिम्मती शख्स हैं। वह ऐसा बहुत कुछ करने की हिम्मत रखते हैं, जो दुनिया का कोई शरीफ प्रधानमंत्री शायद ही कर पाए। कश्मीर में साठ साल तक बार-बार धूल चाटने के बाद भी उन्होंने राग-कश्मीरी नहीं छोड़ा है।
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कश्मीर के सवाल पर अमेरिकी मदद के लिए इस बार वह इतने उतावले थे कि आधे रास्ते में ही ओबामा से फरियाद कर बैठे कि इस मामले में वह बिचौलिया बन जाएं। हालांकि उनके अमेरिका पहुंचने से पहले ही ओबामा सरकार ने पाकिस्तान और मियां शरीफ, दोनों को बता दिया कि भारत के साथ इस कुश्ती में उन्हें अपनी लंगोटी खुद ही संभालनी होगी।
ऐसा नहीं कि ओबामा सरकार पाकिस्तान या शरीफ मियां से प्यार नहीं करती। करती है, लेकिन वह अपनी लंगोटी से भी तो प्यार करती है। भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाले लंबे दंगलों में ऐसा कई बार हो चुका है कि पाकिस्तान की लंगोटी बचाने के चक्कर में अमेरिका की अपनी लंगोटी पर बन आई।
1965 के भारत-पाक युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान को पैटन टैंक और सैबर जेटों से लैस करके दंगल में उतारा था। लेकिन हिंदुस्तानी फौज ने पाकिस्तान की ऐसी धोबी पछाड़ धुलाई की कि पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की भी लंगोटी उतर गई। तिलमिलाए हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने जब भारत को दी जाने वाली गेहूं की ‘पी एल-480’ खैरात बंद करने की धमकी दी, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी की अपील पर करोड़ों हिंदुस्तानियों ने व्रत रखके उसे ठेंगा दिखा दिया।

यही सब 1971 में हुआ, जब पाकिस्तान को बचाने के लिए अमेरिका ने अपनी नौसेना का सातवां बेड़ा रवाना कर दिया। लेकिन भारत के खिलाफ ‘घास खाकर भी हजार साल तक जंग करने’ की धमकियां देने वाले जुल्फिकार अली भुट्टो की पूरी फौज ने हजार घंटे से भी पहले भारतीय सेना के आगे हथियार डाल दिए।

वो दिन और आज का दिन, अमेरिका समझ चुका है कि अपनी लंगोटी ज्यादा कीमती है। अमेरिका तो समझ गया, लेकिन मियां शरीफ को अब भी लगता है कि वह भारत को नीचा दिखा सकते हैं। वह भूल गए हैं कि कारगिल में पाकिस्तानी फौज का क्या हाल हुआ था। अमां शरीफ मियां, अपने पुराने यार की सलाह मानो। और अपनी लंगोटी में रहो। ऐसा न हो कि अगली बार आपकी सरकार और आपकी फौज के छक्के छूट जाएं।
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