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जरूरी मीटिंग में उल्लू
अतुल कनक
Updated Mon, 12 Nov 2012 11:50 AM IST
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लक्ष्मी जी पृथ्वी भ्रमण पर निकलना चाहती थीं, लेकिन उल्लू था कि प्रगट ही नहीं हो रहा था। लक्ष्मी जी ने हर ओर हरकारे भेजे, लेकिन उल्लू का कहीं पता नहीं चला। उन्होंने उसके मोबाइल पर कॉल किए, लेकिन मोबाइल ही स्विच ऑफ जा रहा था। लक्ष्मी जी को गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन वह उल्लू का इंतजार करने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थीं।
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उन्हें डर लगा कि कहीं किसी ने उल्लू का अपहरण तो नहीं कर लिया। लेकिन उल्लू के पास कहने को अपना है ही क्या? हो सकता है, अपहरण करने वाले का निशाना लक्ष्मी जी रही हों? लोग या तो पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए अपहरण करते हैं या फिर फिरौती की मोटी रकम वसूलने के लिए। लक्ष्मी जी की हालांकि किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, पर उनके चक्कर में कई लोगों ने आपस में दुश्मनियां पाल रखी हैं।
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धरती पर तो बहुत से पति ही अपनी पत्नियों का अपहरण करवा देते हैं। तो कहीं...? उन्होंने मन ही मन खुद को धिक्कारा कि उल्लू के बारे में सोचते-सोचते उन्होंने नाहक ही अपने स्वामी पर शक किया। उन्होंने तय कर लिया कि दीवाली का प्रोटोकॉल भ्रमण पूरा करने के बाद वह विष्णु जी से क्षमा मांग लेंगी।
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लेकिन दीवाली भ्रमण का प्रोटोकॉल तो तब निभना था, जब उल्लू सामने होता। तभी सामने से तेजी से आता उल्लू दिखाई दिया। उसने आते ही लक्ष्मी जी को सैल्यूट ठोंका और कहने लगा, सॉरी मैडम, एक जरूरी मीटिंग थी, जो कुछ ज्यादा ही लंबी खिंच गई। अपनी मुसकराहट को काबू में करते हुए लक्ष्मी जी ने पूछा, किस बात को लेकर मीटिंग बुला ली तुम लोगों ने?
उल्लू विनम्रता से बोला, मैडम, भारत में हम जब भी जाते हैं, देखते हैं कि हर कोई मीटिंग में बैठा हुआ है। ऐसी मीटिंग से होता कुछ नहीं है, बस आम आदमी को उल्लू बनाया जाता है। आम आदमी को उल्लू बनाने पर तुले लोग हम उल्लुओं को ऐरा-गैरा उल्लू न समझ लें, इसीलिए हम लोगों ने एक मीटिंग रखी। अब चूंकि मैं साक्षात आपका खास उल्लू हूं, इसलिए मुझे अध्यक्षता की जिम्मेदारी निभानी पड़ी।
उल्लू की बात सुन लक्ष्मी जी ने पृथ्वी की ओर देखा। उनके इंतजार में जगमगा रहे दीपक मंद पड़ने लगे थे। उन्होंने उल्लू को पृथ्वी भ्रमण के लिए जल्दी निकलने के लिए कहा। रवाना होते-होते उन्होंने इतना जरूर कहा, काम से मीटिंग को ज्यादा जरूरी समझता है, उल्लू कहीं का!