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दूसरा पहलू: आधी आबादी की आवाज पर ताला... विश्व स्तर पर महिला अधिकारों की स्थिति गंभीर, अधिकार छीनना आसान...

Mon, 09 Dec 2024 05:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा हिंद एल्हिन्नावी
हिंद एल्हिन्नावी Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 09 Dec 2024 05:15 AM IST
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सार
अफगानिस्तान और इराक जैसे देशों में महिलाओं की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले कानूनों को नष्ट किया जा रहा है। अफगानिस्तान में नौ साल की बच्ची के लिए भी हिजाब अनिवार्य है, तो इराक में नौ साल की बच्ची के विवाह को कानूनी मान्यता दे दी गई है। अगर दुनिया तालिबान के अमानवीय प्रतिबंधों और इराक के प्रतिबंधात्मक कानूनों को सहन कर सकती है, तो इससे महिलाओं के अधिकारों की स्थिति की गंभीरता का पता चलता है।
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Voice and condition of women question of rights global concern now easier to snatch rights
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इराक से लेकर अफगानिस्तान तक में महिलाओं की बुनियादी आजादी खत्म कर दी गई है। इन मुल्कों की सरकारों ने महिलाओं को आजादी देने वाले कानूनों को खत्म करना शुरू कर दिया है। इस साल अगस्त में अफगानिस्तान की तालिबानी हुकूमत ने फरमान जारी कर महिलाओं के सार्वजनिक रूप से बोलने पर पाबंदी लगा दी। हंसना तो दूर एक महिला का दूसरी को सार्वजनिक रूप से कुरान पढ़कर सुनाना भी अपराध बना दिया है।



पिछले तीन वर्षों के दौरान तालिबान ने महिलाओं के कई बुनियादी अधिकार खत्म कर दिए हैं। दृष्टिहीन लड़कियों के स्कूल बंद कर दिए गए और कक्षा चार से छह तक (नौ से 12 साल की उम्र) की लड़कियों के लिए स्कूल जाते समय अपना चेहरा ढकना अनिवार्य कर दिया गया है। इन सबका नतीजा है कि महिलाएं अब विश्वविद्यालयों में दाखिला नहीं ले सकतीं या राष्ट्रीय स्तर पर डिग्री हासिल नहीं कर सकतीं। कंधार क्षेत्र में दाई या नर्सिंग प्रशिक्षण का कोर्स भी नहीं कर सकतीं। महिलाओं को घर से बाहर नौकरी करने की इजाजत नहीं है। इराक में 1959 के कानून में बदलाव कर विवाह के लिए सहमति की उम्र 18 से घटाकर नौ साल (या न्यायाधीश और माता-पिता की इजाजत से 15 साल) कर दिए जाने का प्रावधान है। इराक में पहले से ही कम उम्र में शादी की दर काफी ऊंची है। सात प्रतिशत लड़कियों की शादी 15 साल की उम्र में हो जाती है, जबकि 28 प्रतिशत की शादी 18 साल की कानूनी उम्र से पहले हो जाती है। इराक में ऐसी शादियां जो धर्मगुरुओं के जरिये करवाई जाती हैं और कानूनन अदालत में दर्ज नहीं होतीं, वे भी लड़कियों को नागरिक अधिकारों तक पहुंचने से रोकती हैं।


बीते कुछ वर्षों में अमेरिका में महिलाओं की गर्भपात तक पहुंच काफी कम हो गई है। अमेरिका में हर 68 सेकंड में एक यौन हमला होता है। हर पांच अमेरिकी महिलाओं में से एक दुष्कर्म या दुष्कर्म की कोशिश का शिकार होती है। 2009 से 2013 तक अमेरिकी बाल सुरक्षा सेवा एजेंसियों को इस बात के पुख्ता साक्ष्य मिले थे कि हर साल 63,000 बच्चे यौन शोषण के शिकार होते हैं। अगर दुनिया तालिबान के अमानवीय प्रतिबंधों और इराक के प्रतिबंधात्मक कानूनों को सहन कर सकती है, तो इससे विश्व स्तर पर महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की स्थिति की गंभीरता का पता चलता है और समझा जा सकता है कि महिला अधिकारों को छीनना कितना आसान होता जा रहा है।  (द कन्वर्सेशन से)

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