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फिर ढहा पुल: गुजरात में वडोदरा का हादसा सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति पर गंभीर सवाल, सच्ची श्रद्धांजलि तभी जब...
Fri, 11 Jul 2025 07:15 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 11 Jul 2025 07:15 AM IST
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वडोदरा पुल हादसा
- फोटो :
PTI
विस्तार
गुजरात के वडोदरा जिले में पुल ढहने के हादसे ने एक बार फिर देश में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पुल करीब चालीस साल पुराना था और इसे बीते कुछ वर्षों से मरम्मत की सख्त जरूरत थी। मिल रही जानकारियों के अनुसार, करीब तीन साल पहले हुई एक जांच में भी इस पुल को गंभीर रूप से जर्जर पाया गया था और सरकार ने इसकी फौरी मरम्मत भी कराई थी। फिर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा समय रहते इसकी जांच और रखरखाव की कोई प्रभावी पहल नहीं की गई।
जाहिर है कि यह हादसा, जिसने कई जानें भी निगल लीं, किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के अभाव का दुखद प्रमाण है। जिस समय यह पुल टूटा, उस वक्त लोग इस पर से गुजर रहे थे। गनीमत तो यह रही कि नदी में पानी कम था, अन्यथा स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। दरअसल, यह हादसा महज संरचनात्मक विफलता नहीं है; यह हमारी प्रणाली की उस कमी को उजागर करता है, जो बार-बार ऐसे हादसों को जन्म देती है।
गौरतलब है कि 2022 में गुजरात के ही मोरबी में एक केबल सस्पेंशन ब्रिज के ढहने से 130 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। सवाल यह है कि उस हादसे से क्या कोई सबक सीखा गया? ताजा हादसा इस सवाल को और गहरा करता है। विकास हो रहा है, बड़े-बड़े काम भी हो रहे हैं, लेकिन छोटे कामों में जिन बारीकियों की और जिस फॉलो-अप व्यवस्था की जरूरत होती है, उनकी अनदेखी हो रही है, तो इसमें दोष व्यवस्था का ही है।
और, यह केवल गुजरात की समस्या नहीं है; यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। यह हादसा सबक देता है कि पुराने ढांचों की नियमित और गहन जांच जरूरी है। यही नहीं, भ्रष्टाचार और लापरवाही को रोकने के लिए कड़े नियम और उन्हें सख्ती से लागू करने की भी जरूरत है। जांच का आश्वासन तो दिया गया है, लेकिन यह महज औपचारिकता नहीं होनी चाहिए; इसके नतीजों को सार्वजनिक करना और दोषियों को दंड देना भी जरूरी है।
हर बार जब कोई पुल ढहता है, या कोई इमारत गिरती है, तो हम जिंदगियों के खोने के साथ लोगों का भरोसा भी खोते हैं। पुल हादसे में जो जिंदगियां खोई हैं, उनको सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।