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कभी हां, कभी ना: अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रंपोनॉमिक्स से देशों-बाजारों को उलझन में डाला, विश्व व्यवस्था पर असर

Wed, 09 Jul 2025 06:13 AM IST
Shankar Ayair शंकर अय्यर
Updated Wed, 09 Jul 2025 06:13 AM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नीतियों और ट्रंपोनॉमिक्स की पद्धति से राष्ट्रों और बाजारों को उलझन में डाल रखा है। हर सुबह राष्ट्राध्यक्ष और निवेशक, चाहे वे कहीं भी हों, यह सोचते हुए उठते हैं कि आज उन्होंने कोई नया फैसला तो नहीं ले लिया।
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US Tariff Policy amid yes-no US President confuses countries and markets with Trumponomics impacts world order
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अगर यह कोई फिल्म होती, तो इसका शीर्षक होता-कभी हां, कभी ना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप ने अपनी मनमानी नीतियों और ट्रंपोनॉमिक्स की पद्धति से राष्ट्रों और बाजारों को उलझन में डाल रखा है। ऊपरी तौर पर देखा जाए, तो लगभग सभी प्रमुख शेयर सूचकांक 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर हैं। डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ की समय-सीमा बढ़ाने की घोषणा से पहले चीन, भारत और यूरोपीय संघ से व्यापार सौदों की बात करते रहे हैं। लेकिन इस आशावाद के बुलबुले के नीचे एक बड़ा डर है कि ट्रंप जाने कब, क्या कह या क्या कर दें, जिससे बाजार गिर जाए। 



ट्रंप ने व्यापार सौदों, ईरान के साथ युद्ध विराम, यूक्रेन में युद्ध विराम और एलन मस्क के साथ अपने झगड़े पर बातें की हैं। बीते दिनों ट्रंप ने घोषणा की थी कि कनाडा के साथ कोई समझौता नहीं होगा, जिससे अगले दिन वार्ता ‘फिर से शुरू’ होने से पहले कनाडा और अमेरिका के शेयर बाजार में गलत संदेश गया। उन्होंने यूरोजोन को उच्च टैरिफ की धमकी दी, लेकिन कुछ दिनों बाद ही समझौते की भविष्यवाणी की। हाल ही में ट्रंप ने घोषणा की कि जापान के साथ कोई समझौता नहीं होगा, क्योंकि वे अमेरिका का शोषण कर रहे हैं। इसके बाद, उन्होंने वियतनाम के साथ समझौते की घोषणा की, जबकि वियतनामी सरकार ने कहा कि बातचीत अब भी जारी है। साफ है कि ट्रंप केवल युद्ध में ही नहीं, बल्कि व्यापार युद्धों में भी सर्जिकल या पूर्व-प्रतिक्रियात्मक हमलों में विश्वास करते हैं। 


हर सुबह राष्ट्राध्यक्ष और निवेशक, चाहे वे कहीं भी हों, यह सोचते हुए उठते हैं कि सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया गया है और इसके क्या निहितार्थ हैं। लगता है कि दुनिया को एक आंख खुली रखकर सोना चाहिए। ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही सुर्खियों का दौर लगातार देशों और बाजारों को परेशान कर रहा है। ईरान में परमाणु स्थलों पर हमले के तुरंत बाद, जब कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, तो ट्रंप ने चेतावनी दी: ‘हर कोई तेल की कीमतें कम रखे, मैं देख रहा हूं! ऐसा मत करो!’ नाटो शिखर सम्मेलन में जब स्पेन ने रक्षा खर्च बढ़ाने पर असहमति जताई, तो ट्रंप ने उच्च टैरिफ की धमकी दी। इन्कार के बावजूद ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को युद्ध विराम के लिए मजबूर करने के लिए व्यापार सौदों का इस्तेमाल किया। 

अमेरिका को फिर से महान बनाने का विचार (मागा) ट्रंप के इस विश्वास पर आधारित है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सेना की ताकत का उपयोग सहयोगियों को सुरक्षा के लिए भुगतान करने तथा 290 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के बाजारों में भागीदारी के विशेषाधिकार के लिए दूसरों से प्रवेश शुल्क वसूलने के लिए किया जाना चाहिए। हालांकि, मागा का सपना अमेरिकी कर्ज और घाटे से परेशान है। 2024 में, इसका व्यापार घाटा 918 अरब डॉलर, संघीय घाटा 18.3 खरब डॉलर और कुल कर्ज 362 खरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 123 प्रतिशत था। यह स्थिति और भी बदतर होती जा रही है, क्योंकि संघीय बजट के लिए गठित गैर-लाभकारी समिति के अनुसार, नया ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ 2034 तक 35-42 खरब डॉलर का ऋण जोड़ देगा।
 
ट्रंपोनॉमिक्स के सनकपन में एक तरीका छिपा है। ट्रंप का मानना है कि टैरिफ से कई उद्देश्य पूरे होंगे-इससे पहले ही प्रतिमाह लगभग 30 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हो रहा है, तथा व्यापार घाटे में कमी आएगी और उत्पादन को अन्यत्र लाने पर बल मिलेगा। इसका आधार करों में कटौती है, जो कि हाल ही में पारित किए गए ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ का सार है। ट्रंप की पश्चिम एशिया यात्रा भू-अर्थशास्त्र को ध्यान में रखकर की गई थी। उन्होंने दावा किया है कि इससे 20 खरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आया है। पिछले साल, अमेरिका ने ब्याज लागत पर 881 अरब डॉलर खर्च किए थे। इस साल, इस पर प्रतिदिन तीन अरब डॉलर खर्च होने की उम्मीद है। सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) प्रयोग का भुगतान अब तक नहीं हुआ है और कल्याण लागत बढ़ती जा रही है। 

ट्रंप ने धन प्रेषण (रेमिटेंस) पर कर लगाया है और उनकी 50 लाख डॉलर की ट्रंप कार्ड वीजा योजना में पहले से ही 75,000 से अधिक आवेदक हैं। ब्याज दरों पर फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल को निशाना बनाने का उद्देश्य उधार लेने की लागत को कम करना है। विदेशियों के पास 90 खरब अमेरिकी डॉलर का ऋण है और डॉलर के अवमूल्यन को ऋण का गुप्त प्रबंधन कहा जा सकता है। भूराजनीति में उनके हस्तक्षेप (चाहे वह यूक्रेन हो या कांगो-रवांडा) का लक्ष्य खनिज अधिकारों का दोहन और वाणिज्यिक लाभ कमाना है। इस सप्ताह, नाटो सदस्य अपने जीडीपी के दो से पांच प्रतिशत तक रक्षा व्यय बढ़ाने पर सहमत हुए। ट्रंप इस मामले में विजयी हुए।

2024 में अमेरिका ने 314 अरब डॉलर मूल्य के हथियारों का निर्यात किया, जिसके 2033 तक बढ़कर 447 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है। यूरोप में अमेरिका की हथियार बिक्री का 35 प्रतिशत हिस्सा है और रक्षा पर होने वाला अधिक खर्च अमेरिकी हथियार कंपनियों के पास जाएगा। ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं है कि हथियार कंपनियों का मूल्यांकन बढ़ गया है। ट्रंप अपने आप में भाग्यशाली हैं। 2024 में उनकी जीत ने उन्हें सत्ता की त्रिमूर्ति दी है-सीनेट, सदन और सुप्रीम कोर्ट में बहुमत।

इस सप्ताह उन्होंने पार्टी प्राइमरी में असंतुष्टों को धमकी दी कि वे ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ के माध्यम से अपने अभियान के वादे को पूरा करेंगे, भले ही कर छूट ज्यादातर सबसे अमीर लोगों के लिए फायदेमंद है। टिप और ओवरटाइम के लिए रियायतें संहिताबद्ध नहीं हैं और 2028 में समाप्त हो जाएंगी। लाखों लोग चिकित्सा देखभाल तक पहुंच खो देंगे। चाहे ईरान पर हमला करना हो या कानूनी फर्मों, विश्वविद्यालयों और अवैध आव्रजन पर कार्रवाई करना हो, ट्रंप खुद का समर्थन करते हैं। एक अधिकतमवादी दृष्टिकोण चलन में है-सौदे की कला के साथ-साथ देरी की कला भी है। यह निस्संदेह एक जोखिम भरा दांव है, जिसका संप्रभु बैलेंस शीट और नियम-आधारित विश्व व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल ट्रंप ने टैरिफ की समय-सीमा 8 जुलाई से बढ़ाकर एक अगस्त कर फौरी राहत तो दे दी है। उसके बाद ही उनके इरादों का पता चलेगा। 

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