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कठिन समय में हवा का रुख मोड़ने वाले बाइडन

Sun, 08 Nov 2020 03:03 AM IST
कल्लोल चक्रवर्ती कल्लोल चक्रवर्ती 
कल्लोल चक्रवर्ती  Published by: कल्लोल चक्रवर्ती Updated Sun, 08 Nov 2020 03:03 AM IST
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US Elections: Joe Biden struggle and his policies
Joe Biden - फोटो : Twitter@JoeBiden

वर्ष 1972 में सीनेट के लिए पहली बार चुने गए उनतीस साल के जो बाइडन अमेरिकी इतिहास में दूसरे सबसे युवा सीनेटर थे। वर्ष 2020 के चुनाव में जीत की देहरी पर खड़े करीब अठहत्तर साल के बाइडन अमेरिका के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होंगे! अमेरिकी चुनाव के इतिहास में बाइडन को सबसे अधिक वोट मिले हैं। जबकि उनका चुनाव अभियान बेहद सामान्य तरीके से शुरू हुआ था। बल्कि एक समय तो उनकी उम्मीद भी टूट गई थी और वह मान बैठे थे कि व्हाइट हाउस में जाने का आखिरी अवसर उनके हाथ से निकल चुका है। इससे पहले वह दो बार 1988 और 2008 में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार थे। पहली बार तब उन्हें अपना नामांकन वापस लेना पड़ा था, जब उन पर ब्रिटिश लेबर पार्टी के नेता नील किनॉक का भाषण चुराने का आरोप लगा था। और दूसरी बार बेहद कम समर्थन मिलने के कारण उन्हें अपना नाम वापस लेना पड़ा था।


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छह बार सीनेटर और अमेरिका के 47 वें उप-राष्ट्रपति रह चुके बाइडन मध्यवर्गीय परिवार से आते हैं। बचपन में उन्हें बोलने में समस्या थी और बहुत मेहनत से उन्होंने वक्तृत्व कला सीखी। हालंकि अपनी बेतुकी बातों के कारण अब भी वह कई बार उसी तरह मजाक के पात्र बनते हैं, जिस तरह स्कूल में शिक्षकों और सहपाठियों के निशाने पर होते थे। बाइडन की राजनीतिक यात्रा उनकी पारिवारिक त्रासदियों के कारण बाधित होती रही है। वर्ष 1972 में सीनेट के लिए चुने जाने के कुछ ही दिनों बाद कार दुर्घटना में उनकी पत्नी और बेटी की मृत्यु हो गई थी। तब उन्होंने अस्पताल के उस कमरे से शपथ ली थी, जिसमें उनके घायल दो छोटे बेटों का इलाज चल रहा था। ऐसे ही 2015 में बेटे की ब्रेन कैंसर से मौत के कारण अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी महत्वाकांक्षा को धक्का लगा। एक जर्नल में उन्होंने लिखा था, 'मैं कभी अपने जीवन की योजना नहीं बना पाया। जब भी मैं ऐसा करने की कोशिश करता हूं, मेरा व्यक्तिगत जीवन इसमें खलल डालता है।'

करीब पचास साल लंबी बाइडन की राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ावों भरी रही है। सीनेटर के अपने शुरुआती दौर में एक महिला द्वारा यौन शोषण के शिकायत की सुनवाई करते हुए आरोपी को छोड़ देने की ग्लानि से बाद तक वह नहीं उबर पाए। महिलाओं के प्रति उनका रवैया 1994 के वायलेंस एगेंस्ट वुमैन ऐक्ट से पता चलता है, जिसे पारित कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। मगर उन पर महिलाओं से नजदीकी जताने के आरोप लगते रहे हैं। इस बार भी चुनाव में उन पर महिला मतदाताओं से अनावश्यक नजदीकी जताने के आरोप लगे। जबकि उनकी नस्लवाद-विरोधी छवि का प्रमाण यह है कि उप-राष्ट्रपति के आठ साल के दौरान उन्होंने अश्वेत ओबामा का अनुगामी बनना पसंद किया, और इस बार राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनने पर एक अश्वेत कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति प्रत्याशी के तौर पर चुना।

आक्रामक विदेश नीति में बाइडन का यकीन नहीं है। वियतनाम से अमेरिकी फौज की वापसी का समर्थन करने वाले बाइडन ने बुश द्वारा सद्दाम हुसैन के इराक के खिलाफ बल प्रयोग का विरोध किया था। ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाए गए जिस अभियान ने ओबामा की मजबूत छवि बनाई, और जिस ऑपरेशन को ओबामा ने लाइव देखा था, उस अभियान तक में उप-राष्ट्रपति बाइडन की सहमति नहीं थी। ओबामा के राष्ट्रपति काल में अमेरिका की विदेश नीति बाइडन पर ही निर्भर थी। वर्ष 2012 में उप-राष्ट्रपति बाइडन तब सुर्खियों में थे, जब उन्होंने घोषित नीति से अलग हटते हुए कहा था कि समलैंगिक विवाह पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मजबूरन ओबामा को भी इस पर हामी भरनी पड़ी थी। 

कोरोना महामारी के बीच बाइडन ने व्यापक और मुफ्त जांच तथा मुफ्त वैक्सीन की बात कही। वह बार-बार कह चुके हैं कि अपनी व्यक्तिगत त्रासदियों के कारण वह स्वास्थ्य सेवा को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखते हैं। पर वह सबके लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवा के पक्ष में नहीं है। बाइडन अमेरिकी राजनीति में द्विदलीय व्यवस्था के समर्थक हैं। वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका की नेतृत्वकारी भूमिका पर बल देने के बावजूद वह चीन से आक्रामक रिश्ता रखने के हिमायती नहीं हैं। राष्ट्रपति के नामांकन के दौरान उन्होंने यमन में चल रहे गृहयुद्ध में सऊदी अरब को मिल रहे अमेरिकी समर्थन का विरोध किया था।

भारत से उनके भावुक रिश्ते की एक कहानी है। वर्ष 1972 में सीनेट का पहला चुनाव जीतने पर मुंबई के किन्हीं बाइडन ने उन्हें बधाई संदेश भेजा था। वह उस पत्र का जवाब नहीं दे पाए, लेकिन जुलाई, 2013 में भारत आने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में दिए भाषण में उन्होंने इसका जिक्र किया था कि वह उस शख्स से मिलना चाहते थे, जो उनका रिश्तेदार हो सकता था। चुनाव से पहले बाइडन ने कहा था कि बराक ओबामा की परंपरा को जारी रखते हुए वह इस चुनौतीपूर्ण समय में अमेरिका को एकजुट करने का काम करेंगे। उम्मीद करनी चाहिए कि एक भयानक और अनिश्चित दुनिया में अमेरिका का नेतृत्व एक अनुभवी राजनेता के हाथों में है।   

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