फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Urban Flooding result of unplanned urbanisation and encroachment

आपदा: अनियोजित शहरीकरण का नतीजा है शहरी बाढ़, अतिक्रमण ने तोड़ा जमीन से जल का नाता

Thu, 17 Aug 2023 07:11 AM IST
Varun Gandhi वरुण गांधी
Updated Thu, 17 Aug 2023 07:11 AM IST
विज्ञापन
सार
शहरी बाढ़ अब भारत में एक नियमित घटना है। जैसे-जैसे शहर कंकरीट के जंगल में बदल रहे हैं, वर्षा जल का जमीनी रिसाव कम हो गया है।
loader
Urban Flooding result of unplanned urbanisation and encroachment
Delhi Flood (File Photo) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते तीन हफ्तों में देश के प्रमुख शहरों दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई ने बाढ़ का बड़ा संकट देखा है। शहरी बाढ़ अब भारत में एक नियमित घटना है। हैदराबाद (2000 में), मुंबई (2005 में), श्रीनगर (2014 में), चेन्नई (2021 में) और बंगलूरू (2022 में) जैसे शहरों के कई इलाके खासतौर पर भारी बारिश से पानी में डूब गए। हालिया सर्वे के मुताबिक, 94 फीसदी शहर जलभराव के संकट से जूझ रहे हैं। असल में, अनियोजित शहरीकरण और निचले इलाकों में बेतहाशा निर्माण से जल निकायों का नुकसान हुआ है। जैसे-जैसे शहर कंकरीट के जंगल में बदल रहे हैं, वर्षा जल का जमीनी रिसाव कम हो गया है। ये सारी लापरवाहियां अब तूफानी जल बहाव की शक्ल में हमारी परीक्षा ले रही हैं।



ज्यादातर भारतीय शहर बाढ़ के मैदानों और आर्द्र भूमियों के साथ किसी न किसी नदी के किनारे स्थित हैं। एक आदर्श दुनिया में, ऐसे क्षेत्रों को अछूता छोड़ दिया जाता, पर भारत ने तो पिछले 30 वर्षों में अपनी 40 फीसदी आर्द्र भूमि तक खो दी है। इस तरह के ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर के नुकसान से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इसी तरह के पैटर्न अन्य शहरों में भी दिख रहे हैं।


नदियों सहित तमाम जल निकायों, भूमि उपयोग से जुड़े जलग्रहण क्षेत्र और बाढ़ के जोखिम को समझने के लिए सभी शहरों में अलग से अध्ययन होने चाहिए। इसके बाद इसे लघु, मध्यम और दीर्घकालिक उपायों से जोड़ा जा सकता है। झील और नदी प्रबंधन योजनाओं के रख-रखाव में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी और अतिक्रमण हटाने पर जोर होना चाहिए। भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग स्थानीय जल निकायों को टैग करने, अतिक्रमणों पर नजर रखने और उनकी मौसमी स्थिति को समझने में मदद करने के लिए किया जा सकता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर मौसम के बदलते पैटर्न पर वास्तविक समय के अपडेट को सक्षम करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (डॉप्लर रडार सहित) में अधिक निवेश की आवश्यकता है। स्थानीय वर्षा डाटा को केंद्रीय जल आयोग और क्षेत्रीय बाढ़ नियंत्रण प्रयासों के साथ एकीकृत किया जा सकता है। हमें शहर-व्यापी डाटाबेस में भी निवेश करना चाहिए, जो बाढ़ की स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाएगा।

दूसरा, हमें अपने शहरों में मौजूदा जल निकासी और तूफानी जल नेटवर्क का पुनर्निर्माण और विस्तार करना चाहिए। 5,000 से अधिक शहरों और कस्बों में से अधिकांश में एक बेहतर सीवरेज नेटवर्क नहीं है। इसके अलावा, अधिकतर शहरों के पास ड्रेनेज मास्टर प्लान नहीं है। तीसरा, मध्यम से दीर्घावधि तक के लिए शहरी नियोजन में सुधार की दरकार है।

स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन पर जोर, जल निकायों की अखिल भारतीय जनगणना, जल निकायों के संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश और रामसर स्थलों (आर्द्र भूमि) को बढ़ाना स्वागत योग्य कदम हैं। वैसे हमें शहरी स्थानों में जल प्रबंधन का मार्गदर्शन करने के लिए एक बेहतर शहरी जल नीति की दरकार है। सेंट्रल वेटलैंड रेगुलेटरी अथॉरिटी जैसे नियामक निकायों को वैधानिक शक्तियां प्रदान की जा सकती हैं, जबकि शहरी जल प्रशासन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी का स्वागत होना चाहिए। हमें स्थानीय मिसालों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें आजमाना चाहिए। उदयपुर ने कैस्केड सिस्टम से जुड़ी झीलों की एक शृंखला का निर्माण और रख-रखाव किया है, जिससे वहां शुष्क क्षेत्र में जल आपूर्ति में आत्मनिर्भरता आई है। कई शहरों में लंबे समय से ऐतिहासिक झीलें हैं, जो पानी की आपूर्ति करती हैं, जैसे- गोवा में कंबोलिम, श्रीनगर के पास डल झील, नैनीताल की नैनी झील और गुजरात में नलसरोवर।

हमें नागरिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की राह पर बढ़ना होगा। बंगलूरू की कैकोंद्रहल्ली झील एक बड़ी मिसाल है। इस झील में सीवेज प्रवाह से गाद भर रहा था। बीबीएमपी ने झील को पुनर्जीवित करने के लिए समुदाय संचालित दृष्टिकोण अपनाया। सीवेज प्रवाह को एक टैपिंग पाइपलाइन के माध्यम से दूर किया गया। झील में उगने वाली वनस्पति को हटाने और झील की गहराई को एक मीटर तक बढ़ाने के लिए झील से गाद निकालने का काम भी हुआ। दरअसल, हमारे शहरों को जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमें वर्षा जल संचयन और बेहतर जल निकासी में निवेश बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed