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एकीकृत पेंशन योजना: गरिमापूर्ण जीवन बुजुर्गों का हक है.. वरिष्ठ नागरिकों की मदद के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी

Sat, 31 Aug 2024 02:53 AM IST
patralekha chatterjee पत्रलेखा चटर्जी
Updated Sat, 31 Aug 2024 02:53 AM IST
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सार
केंद्र सरकार ने एकीकृत पेंशन योजना को मंजूरी दे दी है। इससे पहले भी भारत सरकार ने बुजुर्गों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन अब भी उनके लिए काफी कुछ करना शेष है।
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Unified Pension Scheme Dignified Life right of Senior Citizens and Elderly know more
बुजुर्गों को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार (प्रतीकात्मक) - फोटो : एएनआई

विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के 23 लाख से अधिक कर्मचारियों के लिए एकीकृत पेंशन योजना को मंजूरी दे दी है, जो न्यूनतम 25 वर्ष की सेवा के लिए सेवानिवृत्ति से पहले के आखिरी 12 महीनों के औसत मूल वेतन की 50 फीसदी पेंशन सुनिश्चित करती है। इस योजना के अपने समर्थक एवं विरोधी भी हैं। हालांकि हमारा देश 28 वर्ष की औसत आयु के साथ एक युवा देश बना हुआ है, लेकिन बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है। इस समय देश में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की आबादी 15.3 करोड़ है, जो वर्ष 2050 तक 34.7 करोड़ हो जाने का अनुमान है। ये महज आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हमारे जैसे देश में इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जहां ज्यादातर लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की भारत की प्रमुख एंड्रिया वोज्जनर ने पिछले साल एक राष्ट्रीय अखबार में टिप्पणी की थी कि देश में वित्तीय सुरक्षा का भारी नुकसान देखा गया है, जहां 40 फीसदी बुजुर्ग अत्यंत निर्धन वर्ग में आते हैं, जबकि करीब 20 फीसदी आबादी की कोई आय नहीं है।



संयुक्त परिवारों का, जो पहले बुजुर्गों को वित्तीय एवं भावनात्मक समर्थन देते थे, तेजी से विघटन हुआ है। भारत सरकार ने अपनी दूरदर्शी और समावेशी नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं, जैसे कि बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीएचसीई), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी), वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 और (संशोधन) विधेयक, अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई), और बुजुर्गों के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन-एल्डरलाइन, आदि के साथ सकारात्मक कदम उठाए हैं। 1990 के दशक से भारतीय अर्थव्यवस्था दस गुना बढ़ गई है और 2027 तक इसके दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। इस अतिरिक्त संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा वे लोग पैदा करेंगे, जो अभी काम कर रहे हैं और जो 2050 तक वरिष्ठ नागरिक बन जाएंगे।


जैसे-जैसे हम बुजुर्ग होते जाते हैं, न केवल दैनिक जरूरतों के भुगतान के लिए पैसे की आवश्यकता होती है, बल्कि स्वास्थ्य जरूरतों का खर्च भी बढ़ता जाता है। भारत में हर कोई पेंशन या मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल का हकदार नहीं है। भारत को बुजुर्ग आबादी की विशेष जरूरतों के लिए विशेष स्वास्थ्य देखभाल सेवा की जरूरत है। हमें न केवल वरिष्ठों और युवा लोगों के बीच रिश्तों को बढ़ावा देने की जरूरत है, बल्कि हमें बुजुर्गों को यह भी एहसास कराना चाहिए कि वे बेकार नहीं हैं। मुझे 'सिल्वर इकॉनमी' (50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाने वाली आर्थिक गतिविधियां)  में निवेश का विचार पसंद है। यह एक तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है, जिसमें बीमा, पेंशन और बैंकिंग तथा निवेश, तथा यात्रा और पर्यटन जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं, जो विशेष रूप से वैसे बुजुर्गों को लक्षित करते हैं, जिनके पास पर्याप्त बचत और संपत्ति है। सिल्वर इकॉनमी केवल समृद्ध बुजुर्गों के लिए नहीं होनी चाहिए। जाहिर है, भारत को अपने वरिष्ठ नागरिकों के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू करने की जरूरत है, जिन्होंने राष्ट्रीय विकास में बहुत योगदान दिया है और जो अब सम्मानपूर्ण जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और अच्छी मानसिकता के हकदार हैं।

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