फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Tractor by smartphone

स्मार्टफोन से किराये का ट्रैक्टर

Fri, 21 Oct 2016 07:40 PM IST
आयशा वेंकटरमण
आयशा वेंकटरमण Updated Fri, 21 Oct 2016 07:40 PM IST
विज्ञापन
Tractor by smartphone
ट्रैक्टर

स्मार्टफोन की सहायता से सफर करना अब एक पुरानी बात है। लोग इसके जरिये उबर, लैफ्ट या कैरीम की सेवाएं ले ही रहे हैं। पर स्मार्टफोन से ट्रैक्टर की सेवा लेने के बारे में आपके क्या विचार हैं? जिस तरह शहरी इलाकों में जिनके पास का नहीं है, वे स्मार्टफोन के जरिये किराये की टैक्सी में सफर करते हैं, वैसे ही भारत के ग्रामीण इलाकों में किसान स्मार्टफोन के जरिये खेती को आसान बनाने में लगे हैं। दरअसल छोटे किसानों को खेती के लिए ट्रैक्टर के अलावा दूसरे उपकरणों की जरूरत पड़ती है, लेकिन वे इन्हें खरीदने में सक्षम नहीं हैं।

विज्ञापन


ऐसे में जरूरत के समय ट्रैक्टर किराये पर लेना एक विकल्प है, लेकिन भारत में किराये पर ट्रैक्टर लेने की जो व्यवस्था है, वह जरूरतमंद किसानों के हित में नहीं है। एक तो किराये पर देने की यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर अनौपचारिक है-यानी अगर आप ट्रैक्टर मालिक से परिचित नहीं हैं, और दूरस्थ इलाकों में रहते हैं, तो जरूरत के समय ट्रैक्टर मिलने की उम्मीद कम है। इसके अलावा जो लोग किराये पर ट्रैक्टर देते हैं, वे पक्षपात करते हैं, यानी वे आपके बजाय अपने गहरे परिचित को किराये पर ट्रैक्टर दे देंगे, या किराया उनसे कम और आपसे अधिक लेंगे। भारत की एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने इस सिलसिले को तोड़ने की पहल की है। कंपनी के कृषि उपकरण विभाग के मुख्य कार्यकारी राजेश जेजुरीकर कहते हैं, 'गरीब किसान किराये पर ट्रैक्टर लेने के लिए जिस तरह की मुश्किलों को सामना करता है, उसे देखते हुए ही हमने इस दिशा में पहल करने के बारे में सोचा। गरीब किसानों की स्थिति इतनी दयनीय होती है, जैसे वे भीख मांग रहे हों। वे महसूस नहीं करते कि यह उनका अधिकार है।'
विज्ञापन


इसीलिए यह कंपनी एक स्मार्टफोन ऐप लेकर आई है, जिसका नाम ट्रिंगो है। विगत सितंबर में कर्नाटक में इसकी शुरुआत हो चुकी है और जल्दी ही गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों के किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। किसानों को करना यह होगा कि इस ऐप के जरिये उन्हें बताना होगा कि उन्हें क्या चाहिए और कब चाहिए। उसी अनुरूप कंपनी ड्राइवर के साथ ट्रैक्टर भेजेगी। एक ट्रैक्टर की कीमत ढाई से दस लाख के बीच है, जबकि ट्रिंगो के किराये की दर चार सौ से सात सौ रुपये प्रति घंटा है। इस अभियान में हालांकि एक बाधा है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण भारत में नौ फीसदी लोगों के पास ही स्मार्टफोन है। ऐसे में, कंपनी ने जगह-जगह कॉल सेंटर शुरू किए हैं, जहां किसान किराये के ट्रैक्टरों की बुकिंग कर सकते हैं। कंपनी इसके बाद हार्वेस्टर और राइस ट्रांसप्लांटर जैसे महंगे कृषि उपकरणों को भी किराये पर देने के बारे में सोच रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed