{"_id":"63bf3c98f52ecd2555791414","slug":"towards-an-inclusive-global-health-framework","type":"story","status":"publish","title_hn":"Global Health: समावेशी वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे के लिए","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
Global Health: समावेशी वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे के लिए
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो :
istock
विस्तार
नव वर्ष हम सभी के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धताओं और संकल्पों को तय करने का समय है। महामारी के बाद की वैश्विक व्यवस्था में जब दुनिया नई शुरुआत, अवसरों और आशा के साथ आगे बढ़ रही है, भारत ने जी-20 की अध्यक्षता प्राप्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया है कि भारत की अध्यक्षता समावेशी, कार्रवाई उन्मुख और निर्णायक होगी। जी-20 एक अंतर सरकारी मंच है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। जी-20 देश दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में 85 फीसदी और वैश्विक व्यापार में 75 फीसदी की हिस्सेदारी करते हैं और दुनिया की दो तिहाई आबादी इन्हीं देशों में रहती है।
जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत के पास सामान्य विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करने और वर्तमान नई विश्व नीति में अपना रास्ता बनाने का एक असाधारण अवसर है। प्राथमिकताएं न केवल सदस्य देशों, बल्कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी दर्शाती हैं, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी कर दी जाती है। विकसित और विकासशील देशों के बीच सहयोग बनाने के लिए भारत जी-20 की अपनी अध्यक्षता का उपयोग करके ग्लोबल साउथ की वास्तविक आवाज बन सकता है। इसके अलावा यह स्वास्थ्य सहयोग में संलग्न होने और एकीकृत कार्रवाई की दिशा में काम करने के लिए विभिन्न बहुपक्षीय भागीदारों के बीच चर्चाओं के लिए एक शक्तिशाली मंच प्रदान करती है।
भारत की जी-20 अध्यक्षता स्वास्थ्य के मामले में तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। पहली प्राथमिकता है, स्वास्थ्य आपात स्थितियों की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया (एक स्वास्थ्य और रोगाणुरोधी प्रतिरोध), जिसके अंतर्गत वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से रोकथाम, तैयारी और भविष्य की महामारियों का प्रबंधन करना। मैंने हाल ही में ओमान में आयोजित रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर तीसरे वैश्विक उच्च मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत का पक्ष रखा। मैंने 'एक स्वास्थ्य ढांचे' के तहत एएमआर (एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस) से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। हमारा मुख्य जोर नए सुरक्षित और प्रभावी रोगाणुरोधी के निर्माण के लिए अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन देने के साथ जी-20 में फोकस क्षेत्रों में से मनुष्यों और जानवरों, दोनों में रोगाणुरोधी के दुरुपयोग को कम करना होगा।
चिकित्सा प्रत्युपाय (वैक्सीन चिकित्सीय और निदान) की पहुंच और उपलब्धता दूसरी प्राथमिकता है। भारत ने अपनी और 120 से अधिक देशों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करके कोविड-19 संकट के दौरान वैश्विक फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में ताकत का प्रदर्शन किया। हमने स्वदेशी कोविड-19 के टीके विकसित किए और 2.19 अरब से अधिक टीकों को प्रशासित करने का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया। भारत की अध्यक्षता जी-20 देशों को गुणवत्ता और प्रभावी चिकित्सा प्रत्युपायों की उपलब्धता, पहुंच और सामर्थ्य में अंतर को दूर करने के लिए स्थायी तंत्र और प्रभावी साझेदारी पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
एक और प्राथमिकता है, जिसे लेकर मैं उत्साहित हूं और वह है डिजिटल स्वास्थ्य, जहां भारत सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में अपने प्रयासों को साझा कर सकता है। कोविड ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल वितरण में डिजिटल स्वास्थ्य की बढ़ती मांग को जन्म दिया है, जो टेलीमेडिसिन निगरानी और दूरस्थ नैदानिक प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं में अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों को बेहतर ढंग से शामिल करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। टेली-परामर्श के लिए भारत के ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म ने हाल ही में आठ करोड़ से अधिक परामर्शों को प्रदान कर उल्लेखनीय मील का पत्थर पार किया है। अंत में, मैं प्रधानमंत्री के संदेश से प्रेरित हूं, जहां उन्होंने कहा है कि 'आइए, मानव-केंद्रित वैश्वीकरण के एक नए प्रतिमान को आकार देने के लिए मिलकर काम करें।'
-केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री