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जवाबी कार्रवाई के खतरे

Wed, 21 Nov 2012 11:26 PM IST
बी. रमन
बी. रमन Updated Wed, 21 Nov 2012 11:26 PM IST
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threat of reaction

मुंबई हमले में शामिल आतंकी अजमल कसाब को 21 नवंबर, 2012 की सुबह फांसी देने से पहले हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने भारत और पाकिस्तान में मौजूद जेहादी आतंकवादियों के प्रतिशोध की आशंका को जरूर खंगाला होगा। ऐसे किसी हमले को टालने के उद्देश्य से सुरक्षा संबंधी एहतियाती प्रयास भी उसने सुनिश्चित कर लिए होंगे। लश्कर, जैश और इससे जुड़े अन्य आतंकवादी संगठन तुरंत जवाबी हमले के फिराक में होंगे।

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वैसे इन संगठनों के लिए जम्मू-कश्मीर को छोड़कर भारत के भीतर समुचित तैयारी के बगैर जवाबी कार्रवाई करना काफी कठिन है। हां, जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान पर तात्कालिक हमलों की आशंका जरूर बन गई है। जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकवादी खुद के या फिर लश्कर की कार्रवाईयों के एक क्रम के रूप में तुरंत पलटवार करने की कोशिश कर सकते हैं।
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इसी तरह अफगानिस्तान में लश्कर, हक्कानी नेटवर्क, तालिबान और गुलबुद्दीन हिकमतयार के हिज्बे इसलामी जैसे आतंकवादी संगठनों के पास काबुल में भारतीय दूतावास व वाणिज्य दूतावास के साथ-साथ वहां की निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के खिलाफ तात्कालिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त ताकत है। इसलामाबाद में भारतीय उच्चायोग पर भी विशेष चौकसी की जरूरत है, क्योंकि यह लश्कर, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और अन्य आतंकवादी संगठनों के निशाने पर आ सकता है।
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मेरा आकलन है कि जम्मू-कश्मीर को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में इंडियन मुजाहिदीन, हरकत-उल-जिहादी-अल-इसलामी (हूजी) और हूजी के सदस्य रोहिंग्या मुसलिमों पर तुरंत निगरानी बढ़ानी चाहिए। यह बात भी गौर करने वाली है कि कसाब को पुणे जेल में फांसी दी गई है और 2010 से लेकर उस शहर में कई आतंकवादी हमले हुए हैं, जिनकी जांच के नतीजे संतोषजनक नहीं रहे हैं। पुणे में मौजूद आतंकियों के ढांचे को अभी निष्क्रिय नहीं किया जा सका है। ऐसे में पुणे आतंकी हमले के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील है।

दुनिया के दूसरे देशों में मौजूद हमारे दूतावासों की सुरक्षा बढ़ाए जाने की भी जरूरत है। इस घटनाक्रम पर अपने विचार रखने के लिए मुझसे कई टीवी चैनलों ने संपर्क किया। पर, हाल ही में टेलीविजन चैनलों द्वारा परवेज मुशर्रफ को एक सेलीब्रिटी की तरह तवज्जो देने के विरोध में मैंने उन्हें प्रतिक्रिया न देने का निर्णय किया।


मुंबई के 26/11 हमले की तैयारी आईएसआई ने उस समय शुरू की थी, जब मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे। यह बात अलग है कि जिस समय यह हमला हुआ, वह पद छोड़ चुके थे। इसके अलावा हमारे सभी टीवी चैनल सर्वोच्च न्यायालय की उस प्रतिकूल टिप्पणी को ढकने की साजिश में शामिल हैं, जिसमें कहा गया था कि चैनलों ने बिना किसी चर्चा के गैर-जिम्मेदार तरीके से मुंबई हमलों की कवरेज की। सर्वोच्च अदालत ने कसाब को मौत की सजा सुनाए जाने के समय यह टिप्पणी की थी।

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