फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   They are preparing to defeat the sun

एरोसोल का प्रयोग: वे सूरज को हराने की तैयारी में हैं

Sun, 14 Apr 2024 12:16 PM IST
निर्मल कांत क्रिस्टोफर फ्लेवेले, न्यूयॉर्क टाइम्स
क्रिस्टोफर फ्लेवेले, न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 14 Apr 2024 12:16 PM IST
विज्ञापन
सार
प्रचंड गर्मी जिस तरह से हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रही है, कैलिफोर्निया प्रयोग उम्मीद की आखिरी किरण बन गया है।
loader
They are preparing to defeat the sun
तापमान - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुबह नौ बजे से थोड़ा पहले का वक्त रहा होगा। मैथ्यू गैलेली नामक एक इंजीनियर ने, जो सैन फ्रांसिस्को की खाड़ी में एक सेवामुक्त विमानवाहक पोत के डेक पर बैठा था, एक स्विच को ऑन किया। कुछ ही सेकंड बाद बर्फ बनाने वाली मशीन जैसा दिखने वाला एक उपकरण गड़गड़ाने लगा। मशीन के मुंह से निकले छोटे एरोसोल कणों की एक महीन धुंध हवा में मीलों दूर तक फैल गई। यह बादलों को ताकत देने और सूर्य की कुछ किरणों को वापस अंतरिक्ष में भेजने के लिए अमेरिका में किए जा रहे एक प्रयोग का पहला आउटडोर परीक्षण था। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो हम अपने ग्रह को ठंडा रख सकेंगे। मनुष्य जिस गति से वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड को पंप कर रहे हैं, हम पृथ्वी के तापमान को औद्योगिक समय की तुलना में डेढ़ डिग्री सेल्सियस के सुरक्षित स्तर पर रखने के लक्ष्य से दूर होते जा रहे हैं।

 

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की टीम के प्रमुख वैज्ञानिक रॉबर्ट वुड कहते हैं, ‘हर साल हमारे पास तापमान बढ़ने के नए रिकॉर्ड होते हैं, जो हमें इनसे निपटने के लिए नए उपायों की खोज के लिए प्रेरित करते हैं।’ नए बादल पैदा कर सौर ऊर्जा को वापस अंतरिक्ष में भेजना इन्हीं विचारों में से एक है, जिसमें खतरनाक रसायनों के बजाय समुद्री नमक आधारित एरोसोल उपयोग में लाए जा रहे हैं। हालांकि प्रकृति में हस्तक्षेप का यह विचार इतना विवादास्पद है कि बाइडन प्रशासन ने भी इस कैलिफोर्निया प्रयोग से दूरी बनाई हुई है। 

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में पर्यावरणीय वैज्ञानिक सारा डोहेर्टी कहती हैं कि इस तरह प्राकृतिक तापमान से छेड़छाड़ से समुद्रों का तापमान भी बदलेगा, जिससे समुद्री जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। दरअसल, तापमान कम करने के लिए इस प्रयोग का सुझाव सबसे पहले ब्रिटेन के भौतिक विज्ञानी जॉन लैथम ने दिया था। अपने पुत्र के साथ एक यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि बादल ऊपर की ओर चमकदार और नीचे की तरफ स्याह होते हैं। इस आधार पर उन्होंने टॉमे इफेक्ट नामक वैज्ञानिक संकल्पना रखी, जिसके अनुसार, बड़ी मात्रा में छोटे-छोटे कण, कम मात्रा वाले बड़े-बड़े कणों की तुलना में सूर्य की ज्यादा रोशनी को परावर्तित कर सकते हैं।

सूरज का प्रकाश धरती पर टकरा कर वापस अंतरिक्ष में लौट जाता है, लेकिन जब वातावरण में प्रदूषक कण ज्यादा हो जाते हैं, तो वे सूर्य की किरणों को अंतरिक्ष में जाने से रोक लेते हैं, जिससे ग्रह गर्म होने लगता है। अब कैलिफोर्निया प्रयोग जिन ऐरोसॉल का प्रयोग कर रहा है, वे इन प्रदूषक कणों से कितना अलग ढंग से व्यवहार करेंगे, प्रयोग की सफलता इसी पर निर्भर करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed