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मौसम टोपी का है

Mon, 13 Jan 2014 07:13 PM IST
अशोक मधुप
अशोक मधुप Updated Mon, 13 Jan 2014 07:13 PM IST
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there is a season of cap

जुम्मन मियां आज सवेरे ही मेरे घर पर आ धमके। बोले, मियां सोचतां हूं कि फिर से टेलरिंग का खानदानी काम शुरू कर दूं। मैने हंसकर पूछा, ये नया शगल दिमाग में कहां से आ गया? वह बोले, यार केजरीवाल ऐंड पार्टी ने दिल्ली में क्या टोपी लगाई कि जैसे टोपी युग लौट आया।

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टोपी से परहेज करने वाले भाजपाई भी अब टोपी पहने नजर आने लगे हैं। इनके गुरू संघी तो पहले ही टोपी लगातें हैं। सपाई भी टोपी पहनतें हैं। राजीव गांधी से बाद कांग्रेस में टोपी युग खत्म हो गया था। लगता है कि केजरीवाल ऐंड पार्टी के जीत को ये टोपी का करिश्मा मानकर फिर से टोपी पहनना शुरू न कर दें। ऐसे में मुझे टोपी बनाने के काम में कोई नुकसान नजर नहीं आता।
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थुक गटकते हुए उन्होंने फिर से कहना शुरू किया, अलग-अलग पार्टियों के लिए टोपी सिलना मुश्किल काम भी नहीं है। टोपी सिलो। आप की सफेद है ही। भाजपाइयों के लिए भगवा, सपा के लिए लाल और संघी के लिए काली रंगवा दो। बस! काम बहुत अच्छा है। हल्दी लगे न फटकी, रंग आवे चोखा।
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टोपी पहनने वाले और खरीदने वाले नेता छुटभैया नेता तो होंगे नहीं, जो मोल-भाव करें। बड़े नेता होंगे, जो मांगो वह मिलेगा। दुकान अच्छी चलेगी। चुनाव के टाइम तो पौ-बारह रहेगी। जैसे केजरीवाल के मुख्यमंत्री के शपथ लेने के दिन उनकी पार्टी का चुनाव निशान झाड़ू की दिल्ली में इतनी मांग हुई कि कई गुने दाम देने पर भी बाजार में टोटा हो गया।

मैने कहा, भाई बहुत अच्छा है। आप टोपी पहनाने का तो काम करोगे। दूसरों को इज्जत बख्शोगे। वरना ये राजनेता दूसरों को टोपी पहनाते नहीं, उनकी टोपी उतारते हैं। सरे बाजार उछालते हैं। जहां कोई विरोधी आगे बढ़ा, लगे उसकी कमी निकालने। उनकी ही नहीं, उसके पूरे कुटुंब की जन्मकुंडली खोजी जाने लगती है। छांट-छांटकर आरोप लगाए जाने लगते हैं। यह भी नही सोचा जाता कि किसे क्या कह रहे हैं।


कोई यह नहीं सोचता कि अगर तुम्हें दूसरा ऐसा कहे, तो कैसा लगेगा? इनका काम टोपी उछालना है, तो कुछ तो कहना ही है। कोई तो आरोप लगाना ही है। कब किसे वे डाकू मानसिंह या सुलताना का वंशज बता दें, नही कहा जा सकता। किसी विरोधी को हिटलर, नादिरशाह या मुहम्मद बिन तुगलक से जोड़ते इन्हें शर्म नहीं आएगी। बड़ी बेशर्मों की पंचायत है यह। अच्छा है, तुम इन गंदों को टोपी पहनाओगे। इनकी टोपी उतारोगे नहीं।

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