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चीन की मंशा समझे विश्व बिरादरी

Mon, 23 Dec 2013 07:43 PM IST
शिवदान सिंह
शिवदान सिंह Updated Mon, 23 Dec 2013 07:43 PM IST
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the world community should understand the motive of china

चीनी सैनिकों के एक बार फिर भारतीय सीमा को लांघकर चुमार सेक्टर में घुसने की खबर ने इस पड़ोसी देश की मंशा को उजागर किया है। अभी थोड़े दिन पहले जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने प्रवास के दौरान अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताया था, तब भी चीन ने भड़काने वाला बयान दिया था।

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हालांकि अक्तूबर महीने में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सीमा रक्षा सहयोग समझौते (बीडीएसए) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बावजूद चीन की नीयत बदली नहीं है। वह यदा कदा भारतीय सीमा का बलपूर्वक उल्लंघन करता रहा है। इससे पहले उसने लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में टेंट बनाकर और सैनिक टुकड़ी को वहां रखकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। ऐसा नहीं है कि वह केवल भारत को अपनी शक्ति का एहसास करा रहा है। वह पूरे दक्षिणी पूर्व एशियाई देशों जापान, वियतनाम और कंबोडिया के साथ भी इसी प्रकार का व्यवहार कर रहा है।
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चीन कोरी राजनीति के लिए कोई कदम नहीं उठाता, बल्कि उसका असली उद्देश्य है, अपने आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति। इस समय चीन आर्थिक व व्यापारिक रूप से भी एक महाशक्ति बन चुका है। इस आर्थिक विकास के लिए उसे ऊर्जा के नए भंडार चाहिए और उसे ये भंडार पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में मिल सकते हैं। चीन इन भंडारों को किसी भी पड़ोसी देश, जैसे वियतनाम या भारत के साथ नहीं बांटना चाहता।
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इसी कारण भारत का भी टकराव कुछ समय पहले चीन के साथ उस समय हुआ था, जब वियतनाम के बुलावे पर हमारा एक जहाज वियतनाम के समुद्री क्षेत्र तेल व गैस की खोज में सहायता देने के लिए वहां गया था। इस जहाज को चीनी जहाजों ने चारों तरफ से घेरकर वापस जाने के लिए मजबूर किया। दरअसल पिछले काफी समय से भारत के रिश्ते जापान व वियतनाम के साथ प्रगाढ़ होते जा रहे हैं, जो चीन को रास नहीं आ रहा है। यही वजह है कि जापान सम्राट के भारत दौरे के समय उसने हमारे राष्ट्रपति की अरुणाचल यात्रा पर ही सवाल उठा दिए।

चीन ने 1962 में आक्रमण कर हमारी 48,000 वर्ग किलोमीटर भूमि अपने कब्जे में कर ली, जो अभी तक उसके कब्जे में है। इसके अलावा 1986 में उसने अरुणाचल प्रदेश में हैलीपेड बनाकर तथा 2013 में लद्दाख में घुसपैठ करके भारत को ललकारा है।

अरुणाचल में हैलीपैड के निर्माण के कारण हमें दोबारा अपने पूर्वोत्तर की रक्षा तैयारियों को मजबूत करना पड़ा और उन जगहों पर सेना तैनात करनी पड़ी, जहां भौगोलिक नजरिये से पहले ऐसा नहीं किया गया था। इससे आर्थिक बोझ भी पड़ा और सिक्किम जैसे प्रदेशों का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ा। असल में सेना की दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती के कारण वहां आवागमन के लिए पहाड़ों को काटकर सड़कों का निर्माण करना पड़ा। पेड़ काटे गए, जिसका प्रकृति पर बुरा प्रभाव पड़ा। 2007 में सिक्किम में भयानक भूकंप आया था, जिसका केंद्र उत्तरी सिक्किम में बताया गया। भूगर्भ विशेषज्ञों ने इसका कारण वहां पर प्रकृति से छेड़छाड़ बताया था।

आखिर चीन इतना आक्रमक क्यों हो गया है, जो एक साथ जापान, वियतनाम, कंबोडिया तथा अमेरिका जैसे देश को भी पूर्वी चीन सागर के ऊपर उड़ान भरने की सूचना मांग रहा है। इसका मुख्य कारण है, उसकी आर्थिक प्रगति। 80 के दशक तक चीन जनसंख्या तथा गरीबी से परेशान था। परंतु जब पूरे विश्व में आर्थिक उदारीकरण के कारण विकास आया, तो चीन ने विकास के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई। जनसंख्या नियत्रंण के लिए कठोर नियम बनाए तथा औद्योगिकीकरण को कठोर हाथों से बढ़ाया दिया। देश के मानव संसाधन का सही उपयोग करते हुए अपने उत्पादन को बढ़ाया और दिखावे से दूर रहते हुए विश्व में आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा।


इसी समय में भारत में भी विकास हुआ तथा विश्व पटल पर भारत चीन को चुनौती देता नजर आया। सूचना तकनीक के क्षेत्र में भारत चीन से आगे निकल गया। यह सब चीन को रास नहीं आ रहा। इसलिए चीन भारत के विकास में बाधा डालने की कोशिशों के तहत ही इधर-उधर घुसपैठ व भड़काऊ बयानबाजी करता रहता है।

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