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नवाचार : पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में वस्त्र उद्योग, पकड़ी पुनर्नवीनीकरण की राह
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रिसाइकिल प्लास्टिक बोतल से बनी जैकेट पहने पीएम मोदी।
- फोटो :
संसद टीवी
विस्तार
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी को संसद में बजट सत्र के दौरान पुनर्नवीनीकृत प्लास्टिक की बोतलों से बनी एक विशेष नीली जैकेट पहने हुए देखा गया था, जिसे इंडियन ऑयल द्वारा अपने ग्रीन इनिशिएटिव ऑफ सस्टेनेबल गारमेंट्स के तहत पुनर्नवीनीकृत पीईटी बोतलों से बनाया गया था। पुनर्नवीनीकरण या पुनर्चक्रीकरण एक ऐसा फॉर्मूला है, जो पर्यावरण की सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से हम प्राकृतिक संसाधनों के विनाश, पर्यावरण प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन से कराहती दुनिया में एक चक्रीय अर्थव्यवस्था भी स्थापित कर सकते हैं, जो हमें विनाश के दुश्चक्र से छुटकारा दिलाने में सहायक होगी।
कपड़ा उद्योग में बहुत सारा अपशिष्ट पैदा होता है, जो न केवल कपड़ा निर्माण के दौरान, बल्कि कपड़ा उपयोग के दौरान भी पैदा होता है। वस्त्र अपशिष्ट दो प्रकार के होते हैं; उत्पादक अपशिष्ट और उपभोक्ता अपशिष्ट। उत्पादक अपशिष्ट में कपास, ऊन, पॉलिएस्टर, ऐक्रेलिक, सिंथेटिक, नायलॉन आदि सभी प्रकार की सामग्री होती है, जो कपड़ा निर्माण के विभिन्न चरणों, जैसे यार्न स्पिनिंग, फैब्रिक बुनाई आदि से आती है। उपभोक्ता अपशिष्ट इस्तेमाल किए गए कपड़ों से रैग्ज के रूप में आता है।
आजकल कुछ लोग जरूरत से ज्यादा कपड़े खरीदते हैं। कुछ कपड़े ऐसे भी होते हैं, जिन्हें लोग एक बार से ज्यादा नहीं पहनते हैं और बाद में वे कबाड़ में पहुंच जाते हैं। अपने अपघटन के दौरान कपड़े ग्रीनहाउस गैसों का उत्पादन करते हैं। कपड़ा उद्योग वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 10 फीसदी ग्रीनहाउस गैसों का उत्पादन करता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है।
कपड़ा उद्योग ने पर्यावरण पर अपने हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जिनमें से एक कपड़ा पुनर्नवीनीकरण है। यह नई अवधारणा नहीं है, पेटागोनिया कपड़े की पहली कंपनी थी, जिसने 1993 में पहली पॉलिएस्टर फ्लीस जैकेट का उत्पादन करने के लिए पीईटी बोतलों को पुनर्नवीनीकृत किया था।
हरियाणा स्थित कपड़ा पुनर्नवीनीकरण केंद्र हर साल कई विकसित देशों द्वारा छोड़े गए लगभग 1,44,000 टन पुराने कपड़ों को रीसाइकल करता है। कपड़ा पुनर्नवीनीकरण पुराने कपड़े, फाइबर और स्क्रैप का उपयोग नए कपड़े बनाने की विनिर्माण प्रक्रिया है। हर प्रकार के कपड़े का पुनर्नवीनीकरण किया जा सकता है। पुनर्नवीनीकृत किए जा रहे आम कपड़ों में सूती और पॉलिएस्टर शामिल हैं।
पुनर्नवीनीकरण पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद है, जो रसायनों की आवश्यकता को कम करता है। इसके अलावा, कपड़ा पुनर्नवीनीकरण से लैंडफिल स्पेस की आवश्यकता कम हो जाती है, ऊर्जा की भी खपत कम होती है, और पानी की बर्बादी भी कम होती है। तथ्यों के अनुसार, कपड़ों की पुनर्नवीनीकरण करने से 70 फीसदी कम ऊर्जा, 75 फीसदी कम कार्बन डाइऑक्साइड और 86 फीसदी कम पानी का उपयोग होता है।
रंग के आधार पर वस्त्रों को क्रमबद्ध करके, पुनर्नवीनीकृत कपड़े को फिर से रंगने की आवश्यकता नहीं होती है। फलस्वरूप, यह ऊर्जा का संरक्षण करता है और कपड़ा रंगाई प्रक्रिया के दौरान होने वाले प्रदूषण को कम करता है। कई फैशन ब्रांड जैकेट, जींस, हुडी, स्वेटशर्ट और पफर जैकेट आदि बनाने के लिए पुनर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग करते हैं।
कपड़ा अपशिष्ट की एक बड़ी मात्रा, कंबल, शॉल, कालीन आदि जैसे कम गुणवत्ता वाले उत्पादों को बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में भी उपयोग की जाती है। कपड़ा पुनर्नवीनीकरण को केवल तभी बढ़ावा दिया जा सकता है, जब लोग इस पर्यावरण अनुकूल प्रक्रिया से निर्मित वस्त्र उत्पाद को बढ़ावा दें और उसका उपयोग करें। इस संबंध में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाने और निर्माताओं को नए उत्पादों में वस्त्र अपशिष्ट के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
-लेखिका निफ्ट, कांगड़ा में टेक्सटाइल डिजाइन की सहायक प्रोफेसर हैं।