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धर्म और सदाचार पर अटल

Mon, 26 Aug 2013 07:30 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Mon, 26 Aug 2013 07:30 PM IST
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the person, who commits to religion and morality

ईसा मसीह प्रेम, दानशीलता और उदारता को स्थायी शांति और संतोष प्राप्त करने का साधन मानते थे।

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एक बार एक भक्त ने उनसे स्वर्ग प्राप्ति का सरल उपाय जानना चाहा। ईसा ने कहा, स्वर्ग अर्थात ईश्वर का राज्य हर मानव के अंदर है। बाहर उसकी खोज करना समय गंवाने के समान है। जो व्यक्ति सबसे प्रेम करता है और अपने पड़ोसी के दुख से दुखी और सुख से सुखी होता है, वह स्वर्ग में ही तो है। अपनी आय का कुछ अंश भूखों को भोजन और वस्त्रहीनों को वस्त्र देने का नियम बना लो, तुम्हें लगेगा कि तुम सच्चे स्वर्ग में रह रहे हो।

उन्होंने कहा, जब तक तुम एक बालक की भांति अबोध तथा निश्छल नहीं हो जाते, तब तक ईश्वर के राज्य (स्वर्ग) में तुम्हारा प्रवेश वर्जित रहेगा।

ईसा मसीह ने कहा, धन्य वे हैं, जो धर्म के लिए भूख-प्यास सहन करते हैं। जो व्यक्ति धर्म और सदाचार पर अटल रहता है, प्रत्येक प्राणी से प्रेम करता है, बिना किसी लालच के दान देने को तत्पर रहता है, उसके लिए ईश्वर स्वयं अपने राज्य का दरवाजा खोलते हैं।
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अहिंसा को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा, किसी की भी हत्या करना अधर्म है। जो कोई हत्या करेगा, उसे दैवीय न्याय का कोपभाजन होना पड़ेगा। मैं तो यह कहता हूं कि जो कोई अपने भाई या पड़ोसी पर क्रोध करेगा, उसे भी दैवीय प्रकोप सहना पड़ेगा।

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