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सियाचिन से सैनिक हटाना ही है समाधान

Thu, 18 Feb 2016 06:54 PM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Thu, 18 Feb 2016 06:54 PM IST
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The only solution is to remove troops from Siachen

सियाचिन में पिछले दिनों हिमस्खलन से बर्फ के नीचे दब जाने से नौ सैनिकों और हनुमंथप्पा की अस्पताल में मृत्यु दिल दहलाने वाली घटना थी। वहां पाक सैनिकों के साथ भी ऐसे हादसे होते हैं। 2012 में हिमस्खलन से वहां 119 पाक सैनिक तथा 11 नागरिक मारे गए थे। इस बर्फीले भू-भाग में तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। 1984 से अब तक बिना किसी लड़ाई के इस बर्फीले क्षेत्र में 879 भारतीय जवान अपनी जान गंवा चुके हैं। सर्दी के मौसम में वहां हिमस्खलन और भूस्खलन आम है। ऑक्सीजन कम होने से वहां सांस लेने में तकलीफ होती है और हृदय संबंधी दिक्कत भी होती है।

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सियाचिन का पूरा इलाका यों तो भारत और पाक, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, पर भारत के लिए इसका महत्व अधिक है। भारतीय सेना का इसके महत्वपूर्ण पश्चिमी किनारे पर कब्जा है, जिसे सालटीरिज कहा जाता है। दुनिया के इस सबसे ऊंचे क्षेत्र से गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन पर नजर रखी जा सकती है तथा कराकोरम दर्रे तक पहुंचा जा सकता है। पाक की स्थिति इतनी अच्छी नहीं है, इसलिए उसने कई बार सालटीरिज पर कब्जा कर अपनी स्थिति में सुधार के प्रयास किए हैं। पर हर बार भारतीय सैनिकों ने उसके प्रयास विफल कर दिए हैं।
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काबिल-ए-गौर है कि पाकिस्तान ने पहले विदेशी सैलानियों को इस क्षेत्र में आने की इजाजत दी थी। अमेरिका ने भी अपने नक्शे में इस क्षेत्र को पाक का हिस्सा दिखाना शुरू कर दिया था। इस पर भारत ने 1984 में ऑपरेशन मेघदूत के जरिये इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। 1984 से पहले सियाचिन में सैनिक उपस्थिति नहीं थी। भारत ने यहां 10,000 से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं। सरकार को हर दिन सात करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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दोनों देशों के बीच यों तो युद्ध विराम है, पर दोनों देशों की सेना को वहां लगातार प्रकृति से युद्ध लड़ना पड़ रहा है। इससे बचने का एकमात्र तरीका यह है कि दोनों सियाचिन से सेना हटा लें। इस संदर्भ में कई बार बातचीत भी हो चुकी है, पर नतीजा नहीं निकला। इसके लिए पाकिस्तान ज्यादा जिम्मेदार है, जिसने भारत के सार्थक प्रस्तावों को स्वीकार करने के बावजूद साहसी कदम नहीं उठाया। वर्ष 2005 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हिमनद क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव दिया था, पर वह आया-गया हो गया। वर्ष 2011 में शांति वार्ता के बाद तत्कालीन पाक सेनाध्यक्ष जनरल कियानी ने दोनों देशों को आपसी बातचीत के जरिये सियाचिन मुद्दे का हल निकालने को कहा था। पर बाद में इस्लामाबाद ने अपना रुख पलट दिया। मुंबई हमले पर भारतीय अदालत में डेविड कोलमैन हेडली के खुलासे से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है।


हालांकि दस भारतीय सैनिकों की मौत के बाद पाकिस्तान ने कहा है कि सियाचिन का मसला बातचीत के जरिये हल हो सकता है। पर आपसी सहमति बनाने के लिए माहौल को खुशगवार करना जरूरी है। भारत-पाकिस्तान के बीच शांति वार्ताओं का दौर शुरू होने पर सियाचिन से फौज हटाने के मुद्दे पर किसी पहल की उम्मीद की जा सकती है। यह जरूरी है, क्योंकि सियाचिन में जितनी राशि एक दिन में खर्च होती है, उतने में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल जैसे कई क्षेत्रों में गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जब तक ऐसा न हो, तब तक वहां सैनिकों को साज-ओ-सामान से लैस किया जाना चाहिए।

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