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चिंता : परमाणु कचरे का खतरनाक पहलू और कार्बन मुक्त ऊर्जा के सुरक्षित विकल्प की दरकार

Mon, 01 May 2023 06:56 AM IST
Madison Hilly मैडिसन हिली
Updated Mon, 01 May 2023 06:56 AM IST
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सार
इंजीनियरों, विकिरण विशेषज्ञों और अपशिष्ट प्रबंधकों से बात करने के बाद पता चलता है कि परमाणु कचरे को लेकर डर हमें एक शक्तिशाली, स्वच्छ ऊर्जा स्रोत को अपनाने से रोक रहा है, जिसकी हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यकता है। हमें इसे कार्बन मुक्त ऊर्जा का सुरक्षित बाई प्रोडक्ट समझना चाहिए।
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The hazardous aspect of nuclear waste and the need for a safe alternative to carbon free energy
परमाणु संयंत्र (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

विगत फरवरी में जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के अपने दौरे पर न्यूयॉर्क की प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कॉर्टेज ने कुछ नया अनुभव किया : उन्होंने बिना किसी डर के विकिरण के जोखिम और परमाणु कचरे पर चर्चा की। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने 86 लाख फॉलोअर्स को बताया कि उस यात्रा के दौरान उन पर जो विकिरण का प्रभाव पड़ा, वह सीखने लायक था। इसके बाद उन्होंने फ्रांस की प्रशंसा की, 'जो अपने कचरे को रीसाइकल करता है, अपने सिस्टम की दक्षता बढ़ाता है और इससे निपटने के लिए रेडियोधर्मी कचरे की कुल मात्रा को कम करता है।'



सिएरा क्लब और प्राकृतिक संसाधन रक्षा परिषद जैसे पर्यावरणीय समूहों के साथ प्रगतिशील सांसद ऐतिहासिक रूप से परमाणु ऊर्जा के खिलाफ रहे हैं, और अक्सर रेडियोधर्मी कचरे के खतरे, दीर्घजीविता और भंडारण जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

 
ऐसे में हैरानी नहीं कि कई अमेरिकी मानते हैं कि परमाणु कचरा बहुत बड़ा और भयानक खतरा है। लेकिन इंजीनियरों, विकिरण विशेषज्ञों और अपशिष्ट प्रबंधकों से बात करने के बाद मुझे पता चला है कि यह गलतफहमी हमें एक शक्तिशाली, स्वच्छ ऊर्जा स्रोत को अपनाने से रोक रही है, जिसकी हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यकता है। हमें परमाणु कचरे को एक खतरनाक समस्या के रूप में देखना बंद करना चाहिए और इसे कार्बन मुक्त ऊर्जा का सुरक्षित बाई प्रोडक्ट समझना चाहिए। कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए परमाणु ऊर्जा क्यों महत्वपूर्ण है? दरअसल जिन देशों ने अपने ऊर्जा उत्पादन को सबसे तेजी से स्वच्छ बनाया है, उन्होंने आम तौर पर पनबिजली, परमाणु, या दोनों के संयोजन के साथ ऐसा किया है।

परमाणु का विशिष्ट लाभ यह है कि इसके लिए बहुत कम भूमि की आवश्यकता होती है और यह मौसम (दिन के समय या मौसम) की परवाह किए बिना बहुत अधिक बिजली का उत्पादन कर सकता है। पवन और सौर ऊर्जा के विपरीत, यह बैकअप या भंडारण के बिना सीधे जीवाश्म ईंधन का विकल्प बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का मानना है कि यह इतना महत्वपूर्ण है कि कुल-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए वैश्विक परमाणु क्षमता को 2050 तक दोगुना करना होगा। यही वजह है कि कुछ अमेरिकी निवेशक, नीति निर्माता और यहां तक कि फिल्म निर्देशक ओलिवर स्टोन भी परमाणु क्षमताओं के व्यापक विस्तार का आह्वान कर रहे हैं। मुद्रास्फीति कटौती अधिनियम अब 54 मौजूदा संचालित संयंत्रों के लिए ऋण और नए संयंत्रों को प्रोत्साहित के लिए सैकड़ों खरब डॉलर खर्च कर रहा है। देश भर के प्रांत परमाणु निर्माण पर दशकों पुराने प्रतिबंध हटा रहे हैं और निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। व्योमिंग में एक खत्म हो चुके कोयला संयंत्र की जगह एक परमाणु रिएक्टर की परियोजना पर काम चल रहा है।

वास्तव में, परमाणु ईंधन चमकदार धातु ट्यूबों से बना होता है, जिसमें यूरेनियम ऑक्साइड की छोटी गोलियां होती हैं। इन ट्यूबों को बंडलों में इकट्ठा किया जाता है और रिएक्टर में लोड किया जाता है। ऊर्जा बनाने के पांच साल बाद बंडल बाहर निकलते हैं, जिसमें ऊर्जा बनाने वाली प्रतिक्रियाओं से बचे हुए रेडियोधर्मी कण होते हैं। इन बंडलों को अगले पांच से दस साल या उससे भी अधिक समय तक पानी में ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। उसके बाद उन्हे संयंत्र में भंडारण के लिए स्टील या कंकरीट के कंटेनरों (पीपों) में रखा जाता है। इन पीपों को 100 वर्षों तक चलने और लगभग किसी भी चीज यानी तूफान, गंभीर बाढ़, अत्यधिक तापमान, यहां तक कि मिसाइल हमले का भी सामना करने के लिए तैयार किया गया है।

आज तक कहीं भी पीपों से कोई मौत, चोट या परमाणु कचरे का गंभीर पर्यावरणीय रिसाव नहीं हुआ है। और कचरे को दूसरे पीपों में स्थानांतरित किया जा सकता है, भंडारण को एक बार में एक सदी तक बढ़ाया जा सकता है। ऐसे परमाणु कचरे के साथ रेडियो आइसोटोप ट्रिटियम युक्त पानी का जिक्र नहीं किया जा रहा है, जिसका परमाणु संयंत्र नियमित रूप से रिसाव करते हैं। परमाणु विरोधी कार्यकर्ता समूह लोगों को व्यर्थ ही डराते रहते हैं, जबकि फुकुशिमा से छोड़े जा रहे उपचारित पानी एक गैलन से अधिक पीने से विकिरण का खतरा एक केला खाने के विकिरण के जोखिम के बराबर है! जिस तरह से विकिरण काम करता है, सबसे अधिक रेडियोधर्मी परमाणु कचरे सबसे कम समय तक टिकते हैं, जबकि बेहद कम खतरनाक परमाणु कचरे लंबे समय तक चलते हैं। ईंधन के बेकार हो जाने के लगभग 40 साल बाद, गोलियों की गर्मी और रेडियोधर्मिता में 99 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आती है। लगभग 500 वर्षों के बाद, कचरे टूट जाएंगे और तभी ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे, जब उन्हें सांसों के जरिये या मुंह के जरिये अंदर निगला जाएगा। 

इसकी तुलना अन्य खतरनाक औद्योगिक सामग्रियों से करें, जिन्हें हम कम सुरक्षित तरीके से संग्रहित करते हैं और जो समय के साथ कम विषाक्त नहीं होती हैं। उदाहरण के लिए, अमोनिया को लेते हैं : यह अत्यधिक विषैली, संक्षारक, विस्फोटक और रिसने वाली होती है। 2010 के बाद से अमोनिया से संबंधित सैकड़ों दुर्घटनाओं और यहां तक कि कुछ मौतों की सूचना मिली है, और हम उर्वरक और अन्य उपयोगों के लिए सालाना लाखों टन अमोनिया का उत्पादन और पाइप लाइनों, जहाजों और ट्रेनों द्वारा परिवहन जारी रखते हैं। इसके बावजूद परमाणु कचरा अनेक लोगों की कल्पनाओं में एक बड़ा जोखिम है, उन लोगों के लिए तो और भी, जिन्होंने शीतयुद्ध का दौर देखा है। ऐसे में, इसके स्थायी समाधान की बातचीत होती है। जैसे नेवादा में प्रस्तावित युक्का माउंटेन परियोजना, जिसमें परमाणु कचरे को धरती के बहुत नीचे दफनाने का प्रावधान है।

ऐसी सुविधा का निर्माण करने में विफल रहने से कुछ लोगों को चिंता है कि हम अगली पीढ़ी पर कचरा प्रबंधन का बोझ लाद रहे हैं। पर मेरी जैसी कम उम्र स्त्री यह मानती है कि हम बेहद संतोषजनक तरीके से परमाणु कचरे का प्रबंधन कर रहे हैं। यह परमाणु कचरा ही दुनिया को परमाणु ऊर्जा की तरफ मोड़ने के लिए काफी होना चाहिए। पर्यावरण की चिंता करने वाले लोगों को तो और भी इसके साथ खड़ा होना चाहिए, क्योंकि इसका भंडारण आसानी से किया जा सकता है, समय के साथ यह सुरक्षित होता जाता है, और इसे रीसाइकल किया जा सकता है। परमाणु ईंधन का प्रत्येक पीपा सुरक्षित और बेहतर भविष्य की उम्मीद जगाता है।

-लेखिका ग्रीन न्यूक्लियर डील अभियान की संस्थापक हैं और न्यूयॉर्क टाइम्स से ताल्लुक रखती हैं।

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