{"_id":"5dc171688ebc3e5b6d04f004","slug":"terrorists-plan-to-be-defeated","type":"story","status":"publish","title_hn":"पस्त होते आतंकी मंसूबे और सुधरते हालात","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
पस्त होते आतंकी मंसूबे और सुधरते हालात
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : ANI
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के कठरासू गांव में 29 अक्टूबर को आतंकवादी मजदूरों के डेरे में गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल निवासी छह मजदूरों को एक लाइन में खड़ा किया और गोलियां बरसा दी। जम्मू-कश्मीर में 14 अक्टूबर से अब तक चार ट्रक ड्राइवरों, एक सेब कारोबारी और सात मजदूर की हत्या की जा चुकी है। ये सभी लोग कश्मीर से बाहर के थे। उसी समय यूरोपीय संघ के सांसदों का दल जम्मू-कश्मीर के दौरे पर था। जाहिर है, आतंकवादियों ने उन्हें संदेश देने की कोशिश की कि भारत के दावों के विपरीत जम्मू कश्मीर में अशांति और हिंसा जारी है। यह अलग बात है कि इन सांसदों ने हिंसा की न केवल आलोचना की, बल्कि यह कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम भारत के साथ हैं।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
अतीत में देखें, तो करीब 13 साल बाद आतंकवादियों ने एक साथ बड़ी संख्या में गैर-कश्मीरी लोगों की हत्या की है। अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के पूर्व और बाद की सुनियोजित सुरक्षा सख्ती के कारण आतंकवादी तमाम कोशिशों के बावजूद बड़ी वारदात करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में उनकी रणनीति में बदलाव आया है। 29 अक्टूबर को खुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी कि पाकिस्तान के आतंकवादी समूह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। पिछले कई महीनों से सुरक्षा बल जिस तरह से आतंकवाद के खात्मे की मुहिम चला रहे हैं, उससे आतंकवादियों का काम तमाम होना ही है। लेकिन इन घटनाओं से कश्मीर के बाहर से आनेवाले कामगारों और पर्यटकों के अंदर भय पैदा हो सकता है।
पांच अगस्त के बाद से आतंकवादियों को मायूसी के समानांतर सुरक्षा बलों को उनके खिलाफ ठोस सफलताएं मिल रहीं हैं। ऑपरेशन ऑलआउट के तहत सेना की रणनीति है कि आतंकवादी कमांडरों को चुने जाने या चर्चा में आते ही खत्म किया जाए। इससे आतंकवादी संगठनों के हौसले पस्त हुए हैं। तीन सितंबर को गुलमर्ग सब सेक्टर में सीमा पार से आए लश्कर के दो आतंकवादियों को पकड़ने पर पता चला कि पाक सेना ने घुसपैठ के लिए छह-छह, सात-सात आतंकवादियों के अलग-अलग गुट बनाए हैं। उन्होंने बताया कि वादी में इंटरनेट सेवाओं पर रोक के कारण आतंकवादी संगठनों का कश्मीर में सक्रिय अपने कैडर और ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसलिए आईएसआई घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को अत्याधुनिक जीपीएस देने के अलावा जिस इलाके में उनको रहना है, उसका पूरा ब्योरा और उस इलाके में सक्रिय अपने कैडर और ओजीडब्ल्यू की तस्वीरें भी दे रही हैं।
पाकिस्तान ने सर्दियां शुरू होने से पहले अधिक से अधिक संख्या में आतंकवादियों को घुसपैठ कराने के लिए गोलीबारी तेज की है। वे कुछ आतंकवादियों को घुसाने में कामयाब भी रहे हैं। किंतु भारत ने 19 अक्टूबर को नियंत्रण रेखा से बड़ी कार्रवाई की जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। हमारी सेना उन क्षेत्रों में भी सक्रिय है जहां से कई सालों में घुसपैठ नहीं हुई। हमें हताश होने की आवश्यकता नहीं। सुरक्षा बल द्वारा की जा रही कार्रवाईयों से आतंकियों को पराजित होना ही है। हां गैर-कश्मीरियों में भय पैदा न हो इसके इंतजाम जरूरी हैं।