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एक हरफनमौला साहित्यकार

Fri, 15 Mar 2013 10:02 PM IST
हेमेन्द्र मिश्र
हेमेन्द्र मिश्र Updated Fri, 15 Mar 2013 10:02 PM IST
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tan twan eng wins man asian literary prize

आज से करीब दशक भर पहले तान त्वान एंग ने वकालत छोड़ जब पूर्णकालिक लेखन का फैसला लिया था, तब उनकी खूब फजीहत हुई। दरअसल वकालत में उन्हें वे सारी सुविधाएं मिली हुई थीं, जो खुशहाल जीवन के लिए चाहिए। लेकिन त्वान उन यादों के साथ जीना नहीं चाहते थे, जिसमें सिर्फ खुशी हो, क्योंकि इससे जीवन ‘नीरस’ हो जाता है!

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इसलिए स्वतंत्र लेखन का रास्ता चुनकर उन्होंने अपने लिए मुश्किलें पैदा कीं। आज उसी 'पथरीली' राह पर चलने का नतीजा है कि उन्हें 2012 का मान एशियन लिटररी अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह एशिया के सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक पुरस्कारों में है और यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पहले मलयेशियाई लेखक हैं।
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उन्हें यह सम्मान उनके दूसरे उपन्यास द गार्डन ऑफ इवनिंग मिस्ट्स के लिए दिया जा रहा है, जिसे मान बुकर के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। हालांकि उनका पहला उपन्यास द गिफ्ट ऑफ रेन भी मान बुकर की लांगलिस्ट में शामिल था।
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साहित्य से त्वान का नाता बचपन से ही रहा है। स्कूली कक्षा में मेज के नीचे छिपकर कहानी की किताबें पढ़ने के कारण मिली फटकारों को वह नहीं भूल पाए हैं। कानून की पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने देशी-विदेशी साहित्य का खूब अध्ययन किया।

वकालत की भागमभाग में एक दिन एक नीरस उपन्यास पर नजर क्या पड़ी, वह लेखन-कार्य में उतर पड़े। वैसे साहित्य से लगाव की वजह उनके बैंकर पिता की नौकरी भी रही है, जिसमें स्थानांतरण के कारण पूरा परिवार मलयेशिया घूमता रहा। तब त्वान के पास कोई ऐसा दोस्त नहीं था, जिससे वह अपनी भावना बांट सके। ऐसे में वह साहित्य के करीब आ गए। ऐकीडो (एक तरह की मार्शल आर्ट) से पागलपन की हद तक मोहब्बत भी उसी तन्हाई की देन है।
 
त्वान का लेखन भौगोलिक रूप से भले सिमटा हो, पर उसमें दुनिया के कई भागों का संगम दिखता है। ऐसा इसलिए क्योंकि, वह मलय, अंग्रेजी, मंदारिन जैसी भाषाओं के ज्ञाता हैं। लेखन के दौरान किया जाने वाला शोध भी उन्हें विशिष्ट बनाता है।


गार्डन ऑफ इवनिंग मिस्ट्स लिखने के लिए ही शहरी त्वान न सिर्फ धूल-मिट्टी से जुड़े, बल्कि जापान की बागवानी का अध्ययन भी किया। ऐसे में यह उम्मीद बेमानी नहीं कि त्वान की अगली रचना भी 'सूक्ष्म ऊर्जा और लावण्यमयी मनोहरता' को समेटे होगी, जिसके लिए उन्हें इस बार का मान एशियाई सम्मान दिया गया है।

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