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Tamilnadu Politics: द्रमुक को दो पूर्व आईपीएस की चुनौती, भाजपा का सियासी दांव

Sat, 07 Jan 2023 05:16 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Sat, 07 Jan 2023 05:16 AM IST
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सार
द्रविड़ विचारधारा से ग्रस्त तमिलनाडु की राजनीति अब सिमटती जा रही है। वहीं भाजपा जयललिता की जगह हथियाने की कोशिश कर रही है। पिछले 18 महीनों में तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रमुक केंद्र और नरेंद्र मोदी विरोधी बयानबाजी में लगी हुई थी।
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Tamilnadu Politics: two former IPS challenges to DMK
Tamil Nadu BJP chief K Annamalai - फोटो : ANI

विस्तार

दुर्भाग्य से एम जी रामचंद्रन और जयललिता द्वारा स्थापित अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) नहीं, बल्कि भारतीय पुलिस सेवा के दो पूर्व अधिकारी एम के स्टालिन के नेतृत्व वाले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के खिलाफ तमिलनाडु की राजनीति को संचालित कर रहे हैं। गुजरात में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद द्रमुक राजनीतिक दबाव में है। एक मजबूत केंद्र को क्षेत्रीय पार्टियां अपने लिए नकारात्मक रूप में देखती हैं। फिर वह स्टालिन की द्रमुक, जगनमोहन रेड्डी की वाईआरएस कांग्रेस, के चंद्रशेखर राव की टीआरएस हो या ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ही क्यों न हो। इधर तमिलनाडु की राजनीति में नाटकीय बदलाव आया है। इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ था, कि दो पूर्व पुलिस अधिकारी किसी राजनीतिक दल के कट्टर प्रतिद्वंद्वी बने हों। क्या द्रमुक को इन दो पूर्व आईपीएस अधिकारियों से डरना चाहिए? केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वर्ष 2021 में दोनों पूर्व आईपीएस को तमिलनाडु भेजे जाने से पहले समझा दिया कि वहां द्रमुक विरोधी और हिंदू राष्ट्रवाद के लिए एक आधार तैयार किया जाए। राज्य में अन्नाद्रमुक, एनटीके, पीएमके जैसे राजनीतिक दलों के नेता पीछे चले गए हैं, तमिलनाडु को सीरियल बम धमाकों तथा धर्मांतरण के लिए दोषी ठहराया जा रहा है और राज्य में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के छापे रोज पड़ रहे हैं। 



द्रविड़ विचारधारा से ग्रस्त तमिलनाडु की राजनीति अब सिमटती जा रही है। वहीं भाजपा जयललिता की जगह हथियाने की कोशिश कर रही है। पिछले 18 महीनों में तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रमुक केंद्र और नरेंद्र मोदी विरोधी बयानबाजी में लगी हुई थी। राज्य की वित्तीय स्थिति दयनीय है। राज्य में कोई बड़ा विदेशी निवेश नहीं आ रहा है। जीएसटी करों के लिए बार-बार केंद्र से टकराव होता है। हाल ही में टाटा के चेयरमैन चंद्रशेखरन नटराजन ने मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के साथ बैठक की थी। दिलचस्प बात है कि कुछ द्रमुक नेता इस बात पर बिफरते हैं कि स्टालिन ने इस बैठक में अपने पुत्र को क्यों शामिल किया। विपक्षी दलों ने द्रमुक पार्टी और सरकार पर वंशवादी नियंत्रण को लेकर सवाल उठाया। 


द्रमुक ने कांग्रेस और दो कम्युनिस्ट दलों-वीसीके एवं एमडीएमके के साथ प्रगतिशील गठबंधन बनाया है। हाल ही में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा तमिलनाडु से होकर गुजरी, पर उसका कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं पड़ा। हां, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में कमल हासन के शामिल होने से राज्य में विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि कमल हासन द्रमुक के बगैर गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक जाति आधारित झगड़े के कारण चार समूहों में विभाजित है। राज्य की राजनीति में दखल देने वाले दो पूर्व आईपीएस अधिकारियों में से एक रवींद्र नारायण रवि तमिलनाडु के राज्यपाल हैं और पहले नई दिल्ली में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख रह चुके हैं। वह तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित 25 विधेयकों पर कुंडली मारकर बैठे हैं। वह आगामी नौ जनवरी को तमिलनाडु विधानसभा के सत्र को संबोधित करने वाले हैं। रवि उस धरती पर सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं, जो द्रविड़ संस्कृति का केंद्र है।

दूसरे पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई हैं, जो तमिलनाडु में भाजपा के अध्यक्ष हैं। छत्तीस वर्षीय के अन्नामलाई ने वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था। अन्नामलाई फिलहाल द्रमुक विरोधी प्रचार का नेतृत्व कर रहे हैं। वह राज्य में भाजपा को मजबूत करने के लिए सभी विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में पदयात्रा करने वाले हैं। लेकिन अन्नामलाई इन दिनों अपनी कलाई घड़ी को लेकर विवाद में फंस गए हैं, जो राफेल कंपनी द्वारा निर्मित है और जिसकी अनुमानित कीमत लाखों में है। उन्होंने इस आरोप का सामना करते हुए कहा कि वह अपनी वेबसाइट पर  रसीद अपलोड करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस घड़ी की सार्वजनिक नीलामी की जाएगी और उससे प्राप्त धन को मुख्यमंत्री  प्राकृतिक आपदा कोष में दान किया जाएगा। साथ ही अन्नामलाई ने एक शर्त लगा दी कि क्या मुख्यमंत्री स्टालिन के पुत्र उदयनिधि अपनी घड़ी की नीलामी के लिए तैयार हो सकते हैं, जो उनकी घड़ी की तुलना में बहुत ज्यादा महंगी है। 

द्रमुक ने अपने चुनावी घोषणापत्र में बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन उन्हें पूरा नहीं कर पाई। न तो डीजल की कीमत में कमी हुई, न नीट परीक्षा खत्म हुई, और न ही महिला मतदाताओं को 1,000 रुपये नकद मिले। द्रमुक अपने आश्वासनों को पूरा करने के लिए जूझ रही है। मतदाता मायूस हैं। पार्टी में आंतरिक कलह से प्रशासन चरमरा रहा है। उदयनिधि को मंत्री बनाए जाने से परिवार में अलग कलह है। अपराध चरम पर है। यहां तक कि द्रमुक के सांसद भी कोर्ट के आदेश पर जेल में हैं। पिछले हफ्ते द्रमुक के एक वरिष्ठ नेता की हत्या कर दी गई। भाजपा का  आरोप है कि इसके मूल में भ्रष्टाचार है। राज्य का राजनीतिक परिदृश्य नाजुक है। तमिलनाडु के छह से आठ जिलों में वन्नियारों पर प्रभावी पट्टाली मक्कल काची अब अन्नाद्रमुक गठबंधन छोड़ने और द्रमुक गठबंधन में जाने की योजना बना रही है। अगर ऐसा होता है, तो द्रमुक बेशक गले लगाएगी, लेकिन विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के संभावित निकास से द्रमुक दलित वोट खो देगी। जाहिर है, वीसीके को अन्नाद्रमुक से हाथ मिलाना होगा, लेकिन वह किस गुट के साथ हाथ मिलाएंगे?

द्रमुक भी केंद्र के प्रति नरमी बरत रही है। नवंबर, 2022 में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया जा रहा है। स्टालिन ने भी खुले तौर पर  स्वीकार किया है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और अपनी पार्टी के नेताओं के बयानों से उन्हें ठीक से नींद नहीं आ रही है। ऐसे बयान से द्रमुक कार्यकर्ताओं को लगता है कि उदयनिधि द्रमुक का नियंत्रण करने के लिए तैयार हैं और धीरे-धीरे उदयनिधि को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। चाहे कोई कुछ भी तर्क दे, स्टालिन ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपने बेटे उदयनिधि को पार्टी के केंद्र में रखा है। 

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