तमिलनाडु की सियासत: रजनी ने किनारा कर लिया राजनीति से
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तकरीबन पच्चीस साल से एक सवाल जो तमिलनाडु की फिजा में तैर रहा था, उसका पटाक्षेप इसी महीने तब हो गया, जब रजनीकांत ने राजनीति में प्रवेश से इन्कार करने के साथ ही स्पष्ट कर दिया कि वह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बना रहे हैं। सुपर स्टार रजनीकांत ने पहले रजनी मक्कल मंद्रम (रजनी पीपुल्स फोरम) के सदस्यों के साथ बैठक की और फिर अपने प्रशंसकों के नाम पत्र जारी कर यह एलान किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने रजनी मक्कल मंद्रम को भी भंग कर दिया। हालांकि रजनी फैन्स क्लब बना रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आधिकारिक रूप से राजनीति में न आने की उनकी घोषणा के बाद तमिलनाडु की राजनीति में उनका प्रभाव नाटकीय ढंग से कम हो जाएगा। वरना कुछ समय पहले तक उन्हें गेम चेंजर के तौर पर देखा जाता था। अब उन्हें उनके प्रशंसक सिर्फ अभिनेता की तरह देखेंगे।
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तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले एक पर्यवेक्षक उमेश कहते हैं, हर चुनाव से पहले रजनी के प्रशंसक उत्सुकता से इंतजार करते थे कि थलाइवर (नेता) का उनके लिए क्या संदेश है। मगर अब ऐसा नहीं होगा। रजनी के प्रशंसक एक अभिनेता के रूप में उनका समर्थन करते रहेंगे, लेकिन यह भी हो सकता है कि रजनी मक्कल मंद्रम से जुड़े उनके अनेक प्रशंसक दूसरे राजनीतिक दलों से जुड़ जाएं। दूसरी ओर मैंने उनके जिन समर्थकों से बात की, उनमें से अधिकांश महसूस करते हैं कि सुपरस्टार अब खुद के स्वास्थ्य और अपनी फिल्मों के लिए अधिक वक्त निकाल पाएंगे। वैसे भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो यह मानते हैं कि रजनीकांत अपने राजनीतिक अवतार में भी सफल होते। उनके प्रशंसकों को उनका हर फैसला मंजूर है और वे मानते हैं कि उनका यह कदम उनकी उम्र और सेहत को देखते हुए सही है।
स बीच, यह भी कहा जा रहा है कि रजनीकांत ने अपने प्रशंसकों के साथ हुई बैठक में बताया था कि वह अपने आर्थिक रूप से कमजोर प्रशंसकों के बच्चों के लिए शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी मदद करने के लिए ट्रस्ट बनाना चाहते हैं। इस ट्रस्ट की घोषणा जल्द होने की संभावना है। रजनीकांत के राजनीति से जुड़ने की सबसे पहली बार चर्चा 1996 के विधानसभा चुनाव के समय हुई थी, जब उन्होंने कांग्रेस को समर्थन देने की इच्छा जताई थी। हालांकि उनकी यह योजना धरी रह गई जब तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने जयललिता की अगुआई वाले अन्नाद्रमुक का समर्थन कर दिया था।
अन्नाद्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन के बाद सुपरस्टार ने कहा था, 'यदि जयललिता सत्ता में दोबारा आती हैं, तब तो भगवान भी तमिलनाडु को नहीं बचा सकते।' और तब अन्नाद्रमुक गठबंधन चुनाव हार गया था और द्रमुक और तमिल मनिला कांग्रेस का गठबंधन जीत गया था, जिसे रजनीकांत का पूरा समर्थन हासिल था। वर्ष 2004 में अभिनेता ने एनडीए की अगुआई वाले मोर्चे का इस आश्वासन के आधार पर समर्थन किया था, कि चुनाव जीतने पर वह देश में पानी की समस्या को खत्म करने के लिए नदी जोड़ो परियोजना पर अमल करेगा। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय रजनीकांत के राजनीति में आने की अटकलें उस वक्त तेज हो गई थीं, जब उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
31 दिसंबर, 2017 को रजनीकांत ने एलान किया था कि वह 2021 में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे। स्वाभाविक रूप से उनकी इस घोषणा ने प्रदेश के साथ ही देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी थी। लेकिन उसके बाद ऐसा कुछ नहीं हुआ। दिसंबर, 2020 में उन्होंने संकेत दे दिए थे कि वह अपने स्वास्थ्य की वजह से राजनीतिक पार्टी का गठन करने में सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद उनके प्रशंसकों को भरोसा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन इसी 12 जुलाई को उन्होंने करीब 25 साल से चल रही अटकलों को विराम दे दिया। वैसे इस समय वह अपनी फिल्म अन्नात्थे की शूटिंग में व्यस्त हैं, जो कि दिवाली तक स्क्रीन पर आ सकती है।