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डेढ़ महीने में ही सत्ता में वापसी की बात

Sat, 19 Jul 2014 09:38 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sat, 19 Jul 2014 09:38 PM IST
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Talk about returning in power within one and half month

नेहरू-गांधी परिवार अपने देश का शाही परिवार है। जब भी कांग्रेस की सरकार रही है, दिल्ली में राज किया है इस परिवार ने। इतने लंबे वर्षों तक कोई परिवार जब राज करने की आदत डाल लेता है, तब गद्दी से हटने के बाद उसके सदस्यों को समझ में नहीं आता कि क्या हुआ और कैसे हुआ। ऐसा ही कुछ हाल है सोनिया गांधी का इन दिनों। मोदी सरकार को आए डेढ़ महीने भी नहीं हुए कि वह सत्ता में लौटने की बातें कर रही हैं।

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ये बातें उन्होंने तब कहीं, जब आयकर विभाग से इनको पत्र मिला, जिसमें नेशनल हेराल्ड अखबार के संबंध में कुछ सवाल किए गए। क्यों न आए ऐसा नोटिस? जब आप कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते 90 करोड़ देती हैं नेशनल हेराल्ड अखबार को और वह पैसा यंग इंडिया नाम की एक ऐसी निजी कंपनी में पहुंच जाता है, जिसके कर्ताधर्ता होते हैं आप, आपके बेटे और आपके दोस्त। प्रश्न तो उठेंगे ही आयकर विभाग से, खासकर तब, जब दिल्ली की एक अदालत में आपको पेश होने का आदेश मिला है। सोनिया जी ने इस पूरे मुकदमे के पीछे राजनीतिक बैर ही देखा है। इसीलिए कह दिया कि ऐसी हरकतें अगर नई सरकार करती रही, तो जल्दी ही हम वापस आ जाएंगे।
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अरे भई कैसे? मुकदमा दायर किया सुब्रमण्यम स्वामी ने नरेंद्र मोदी के केंद्र की सत्ता में आने से बहुत पहले। फिर कैसे कहा जा सकता है कि मुकदमे के पीछे नई सरकार की राजनीतिक रंजिश है? रही बात आयकर विभाग की, तो सोनिया जी, जरा याद कीजिए, आपने कितनी बार इस विभाग का गलत इस्तेमाल किया है।
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हुआ ऐसा कि कुछ महीनों पहले मैंने ऐसा छापा पड़ते देखा, जो सोनिया जी के राज में उद्योगपतियों के घरों में हर दूसरे-तीसरे हफ्ते पड़ा करता था मुंबई शहर में। इत्तफाक से मैं एक उद्योगपति के घर में थी, जब छापा मारने आई आयकर विभाग की एक बड़ी टोली। जब हमने उनसे सवाल करने की कोशिश की, तो जवाब आया कि 'हम भारत सरकार का काम कर रहे हैं।' न फोन करने का अधिकार, न वकील, न दलील। घंटों तक कोई 20-30 आदमी तलाशी लेते रहे। आलमारियां खोली गईं, दराजों का सामान निकाला गया, चिट्ठियां पढ़ी गईं और नौकरों से अलग-अलग पूछताछ की गई। जो ढूंढ रहे थे ये लोग, उनको मिला नहीं। पर बाद में मुझे मालूम हुआ यह काम सोनिया जी के आदेश पर हुआ था, क्योंकि उन्हें उस उद्योगपति से निजी शिकायत थी। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने भी इसी किस्म के छापों के आदेश दिए थे अपने राजनीतिक दुश्मनों के घरों में। ग्वालियर और जयपुर के राज परिवारों के महलों में पहुंचाए थे आयकर विभाग के इंस्पेक्टर और दिल्ली में बीजू पटनायक के घर में भी पहुंचाए थे। सो, क्यों न सोनिया जी को ऐसा लगे अब कि उनके साथ भी वही हो रहा है।


मेरी राय में मोदी सरकार ऐसा नहीं करेगी सोनिया जी और उनके बेटे के साथ। पर अच्छा होगा कि सोनिया जी इल्जाम लगाने से पहले याद करें कि उनके दौर में क्या होता था। अच्छा यह भी होगा कि वह विपक्ष में रहने की आदत डाल लें। इस चुनाव ने दिखा दिया है कि वंशवाद के अच्छे दिन अब गए।

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