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बंदिशों की मजबूत दीवारें

Thu, 05 Dec 2013 07:07 PM IST
दीपक के श्रीवास्तव
दीपक के श्रीवास्तव Updated Thu, 05 Dec 2013 07:07 PM IST
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Strong wall of sanctions

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सच कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में जहां भी अच्छी नौकरियां हैं, चाहे वह कोलकाता हो या क्लेवलैंड, वहां प्रतिभाओं की कद्र की जानी चाहिए। पर हकीकत बिल्कुल अलग है। अमेरिका में अभी अप्रवास संबंधी सुधार होने बाकी हैं। वहां के नीति निर्माताओं को चाहिए कि वे दुनिया भर के प्रखर मेधा वाले लोगों को अपने यहां काम करने की अनुमति दें। अगर अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था में विकास चाहता है, तो उसे अप्रवास संबंधी प्रणाली को लचीला बनाना होगा। इससे लोगों को अच्छी नौकरियां मिलेंगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा। लोग आसानी से एक-दूसरे देशों में आवागमन कर सकेंगे और पसंद का काम चुन सकेंगे। इससे पूरी अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। 2002 के एक अध्ययन के मुताबिक, अगर विकसित देश अपने यहां की अप्रवास संबंधी बंदिशों को महज तीन फीसदी तक कम कर दें, तो उससे तकरीबन 150 अरब डॉलर का उत्पादन लाभ हो सकता है।  श्रम गतिशीलता के चलते होने वाले फायदों के बावजूद डब्ल्यूटीयू जैसे संगठन ने भी इसे व्यावहारिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत नहीं किया है। वैसे इस तरह के मामले हैं, जहां विकसित देशों में अप्रवासियों को संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के खतरे के रूप में देखा जाता है।

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फिलहाल श्रमिक गतिशीलता से जुड़े मुद्दे द जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड इन सर्विसेस (जीएटीएस) ढांचे के तहत आते हैं। जीएटीएस डब्ल्यूटीओ की एक संधि है, जो उरुग्वे दौर की वार्ता से जनवरी, 1995 में अस्तित्व में आई। जीएटीएस का उद्देश्य सेवा क्षेत्र के बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का विस्तार करना है। डब्ल्यूटीओ के सभी सदस्यों ने जीएटीएस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत वैश्विक बाजार में चार तरीके से सेवाओं की आपूर्ति होती है। पहला तरीका सीमा पार आपूर्ति है, जिसके तहत एक सदस्य देश, दूसरे सदस्य देश के राज्य क्षेत्र के भीतर सेवाओं की आपूर्ति कर सकता है, जैसे आंकड़ों का स्थानांतरण, इंटरनेट इत्यादि। दूसरा तरीका है, विदेश में उपभोग, जिसमें किसी सदस्य देश के राज्य क्षेत्र के बाहर, किसी सदस्य देश के राज्य क्षेत्र के अंदर से आपूर्ति की जाती है, जैसे पर्यटन। तीसरा तरीका है, वाणिज्यिक मौजूदगी, जिसमें किसी सदस्य देश के राज्य क्षेत्र के भीतर वाणिज्यिक मौजूदगी के जरिये सेवाओं की आपूर्ति की जाती है, जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश। और चौथा तरीका है, व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी। इसके तहत किसी सदस्य देश के राज्य क्षेत्र के भीतर सेवाओं की आपूर्ति होती है, जिसमें आपूर्तिकर्ता प्रत्यक्ष तौर पर एक व्यक्ति के रूप में मौजूद होता है।
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हैरानी की बात यह है कि पूंजी गतिशीलता से जुड़े मुद्दों को तो वाणिज्यिक मौजूदगी के तहत रखा जाता है, जबकि श्रम गतिशीलता संबंधी मुद्दों को व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी के तहत रखा जाता है। भारत जैसे विकासशील देशों को चौथे तरीके यानी व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी को लेकर नाराजगी है। तीसरा तरीका विदेशी कंपनियों और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के तहत विकसित देश एफडीआई के जरिये विकासशील देशों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। जबकि श्रम गतिशीलता के मामले में विकसित देशों का रुख अच्छा नहीं रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 21.5 करोड़ लोग अप्रवासी हैं और अपने जन्म वाले देश से बाहर रहते हैं। वे अपने देश में धन भेजते हैं। विश्व बैंक के अनुसार, अप्रवासियों की तरफ से प्राप्त होने वाली आय के मामले में 2012 में  भारत (69 अरब डॉलर) शीर्ष स्थान पर रहा। उसके बाद चीन (60 अरब डॉलर), फिलीपींस (24 अरब डॉलर) और मैक्सिको (23 अरब डॉलर) का स्थान रहा।


श्रम की गतिशीलता बढ़ने से न केवल लोगों की माली हालत में सुधार होता है, बल्कि इससे वे बेहतर नौकरियां पाने में सक्षम होते हैं, जिसका अर्थव्यवस्था की उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। श्रमिकों की गतिशीलता पर बंदिशों से वृद्धि दर में कमी आ सकती है, क्योंकि इससे कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए उत्पादक और सक्षम श्रमिकों के चयन में दिक्कत आती है। मौजूदा परिस्थितियों में विकास के लिए वैश्विक श्रम बाजार के लिहाज से नीतियां तय करना बहुत जरूरी है।

(लेखक टेक्नोलॉजी द मोंटेरी, मैक्सिको में प्राध्यापक हैं)

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