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गुमनाम जादूगर: लंबे समय से सिर चढ़ गया था जादू का जनून, जानें कैसे विज्ञान छोड़ जादूगर बने रिचर्ड हैच

Sun, 20 Oct 2024 05:07 AM IST
शुभम कुमार डेविड सेगल, न्यूयॉर्क
डेविड सेगल, न्यूयॉर्क Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 20 Oct 2024 05:07 AM IST
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सार
गुमनाम जादूगर: रिचर्ड हैच एक भौतिक विज्ञानी थे, लेकिन उन्होंने वर्षों पहले विज्ञान की दुनिया छोड़कर जादू की दुनिया अपना ली। लाइब्रेरी में मिली एक पुस्तक ज्यूज इन मैजिक को देखकर उन्होंने उस यहूदी जादूगर का पता लगाने की ठानी।
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Story of Magician in oblivian Richard Hatch Physicist Jewish Holocaust know more
गुमनाम जादूगर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यहूदियों के नरसंहार से पहले सिर्फ 23 साल के यहूदी जादूगर गुएंथर डैमन ने अपनी किताब ज्यूज इन मैजिक  में प्रसिद्ध जादूगरों की जीवनियां शामिल कीं। यह किताब, जो एक अधूरे जीवन की अनोखी कृति थी, शायद जातीय गौरव को दर्शाने की एक कोशिश की थी।


रिचर्ड हैच जादू (मैजिक) पर दिलचस्प पुस्तकों की खोज में येल में स्टर्लिंग मेमोरियल लाइब्रेरी का कैटलॉग खंगाल रहे थे। यह 1979 की बात है, जब हैच भौतिकी में स्नातक के छात्र थे। लंबे समय से उन्हें जादू सीखने का जुनून था और उनका दिल क्वांटम यांत्रिकी की तुलना में हाथ की सफाई से संबंधित पुस्तकों में ज्यादा रमता था। उनकी तलाश तब खत्म हुई, जब उन्होंने डाई जुडेन इन डेर जुबरकुन्स्ट नामक किताब देखी। हैच ने अपनी जवानी के चार साल जर्मनी में बिताए थे, इसलिए उन्होंने तुरंत इसका अनुवाद शुरू किया-जादू में यहूदी (ज्यूज इन मैजिक)। यह किताब गुएंथर डैमन नामक किसी व्यक्ति ने लिखी थी और 1933 में बर्लिन में प्रकाशित हुई थी। वह यह जानकर हैरान रह गए कि यह पुस्तक उसी वर्ष छपी थी, जिस वर्ष नाजियों ने सत्ता संभाल ली थी और गैर-जर्मन पुस्तकों को जलाना शुरू कर दिया था। 


हैच ने भौतिकी में दो स्नातक उपाधियां अर्जित कीं, पर 1983 में उन्होंने यह क्षेत्र छोड़ दिया, जब उन्हें एहसास हुआ कि जादू के जुनून ने विज्ञान में उनकी रुचि को खत्म कर दिया है। फिर वह पूर्णकालिक ‘जादूगर’ बन गए। जब वह अपने इस हुनर को निखार रहे थे और काम की तलाश कर रहे थे, तब उन्होंने 1942 में प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई जादूगर जेएन हॉफजिनसर के बारे में लिखी एक जर्मन किताब का अनुवाद किया। फिर उन्हें एक दिलचस्प दुर्लभ किताब का अनुवाद करने का आग्रह मिला। किताब का नाम था : डाई जुडेन इन डेर जुबरकुन्स्ट। हैच ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘तभी मुझे एहसास हुआ कि यह यहूदियों द्वारा जादू के क्षेत्र में दिए गए महान योगदान के बारे में थी।’

किताब से पता चला कि एक 23 वर्षीय यहूदी डैमन शौकिया जादूगर था, जो एक अमीर बैंकर का बेटा था और बर्लिन में रहता था, जब उसने खुद अपनी किताब प्रकाशित की थी। सौ पेज की इस किताब के बारे में इतिहासकारों का कहना है कि यह जीवित और मृत, दोनों तरह के महान यहूदी जादूगरों की सूची बनाने का पहला प्रयास था। ज्यूज इन मैजिक के अधिकांश हिस्से में 50 से अधिक प्रसिद्ध जादूगरों की संक्षिप्त जीवनी है। एक अध्याय में फ्रांसीसी अलेक्जेंडर हरमन की कहानी बताई गई, जिन्होंने दशकों तक भ्रमण करते हुए अब्राहम लिंकन, जार अलेक्जेंडर और सिंग सिंग के कैदियों को चकित कर दिया, जो उद्योग का मानक बन गया। 

एक अन्य अध्याय में हंगरी में जन्मे रब्बी के बेटे हैरी हुडिनी का परिचय दिया गया है, जो हथकड़ी, जेल और स्ट्रेटजैकेट से बच निकला और अपने युग के सबसे प्रसिद्ध शोमैन में से एक बन गया। यह किताब एक अजीब समय पर जातीय गौरव को दर्शाने की कोशिश थी और अनोखी कृति थी। 1942 में डैमन और लगभग 800 अन्य लोगों को रेलगाड़ियों में लातविया के रीगा ले जाया गया, जहां, नाजी रिकॉर्ड बताते हैं, उन्हें पहुंचने पर गोली मार दी गई थी। 

एक छोटे-से शहर में अर्ध-सेवानिवृत्त जीवन जी रहे हैच ने चार साल पहले ज्यूज इन मैजिक का अनुवाद पूरा किया और अब सोच रहे हैं कि इसे टिप्पणियों और तस्वीरों के साथ कैसे प्रकाशित किया जाए। हैच कहते हैं, ‘एक कहावत है कि हम सभी तीन बार मरते हैं। पहली मौत शारीरिक होती है, जब आपका दिल धड़कना बंद हो जाता है। दूसरी तब होती है, जब आपका शरीर आग या कब्र में समा जाता है। और तीसरी बार तब, जब कोई अंतिम बार आपका नाम लेता है। जीवन उसके साथ इतना क्रूर था कि मैंने सोचा, यह एक उचित कारण है कि मैं जब तक संभव हो, डैमन का नाम जीवित रखूं।’ 

हालांकि, डैमन ने अपनी पुस्तक में इस बारे में कुछ नहीं बताया है कि यहूदी लोग जादू में इतने प्रमुख क्यों रहे हैं? यही जानने के लिए मैं मैगीफेस्ट में गया, जो देश के जादूगरों के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक है, जो कोलंबस, ओहियो में हर साल होता है। मैं मैगीफेस्ट में डैमन के बारे में हैच का व्याख्यान सुनने के लिए गया था। वहां उपस्थित लोगों में से एक जोशुआ जे थे, जिन्होंने वैनिशिंग इंक की सह-स्थापना की थी, जो मैगीफेस्ट की मालिक कंपनी है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में जादू के क्षेत्र में यहूदियों की भागीदारी तब बढ़ गई, जब सदी के अंत में यहूदी अप्रवासियों के रूप में इस देश में आ रहे थे और यहूदियों के लिए ज्यादा नौकरियां नहीं थीं। जादूगर होना स्व-रोजगार था, इसलिए यह सुरक्षित था।’

अन्य लोगों का मानना है कि किताबें पढ़ने और सीखने पर जोर देने के कारण जादू यहूदियों के लिए एक स्वाभाविक आकर्षण है। रिचर्ड हैच ने अपनी किशोरावस्था का कुछ समय फ्रैंकफर्ट में बिताया, क्योंकि उनके पिता एक परमाणु भौतिक विज्ञानी थे। हैच की पत्नी रोजमेरी किमुरा हैच, जो एक पेशेवर संगीतकार हैं, कहती हैं, ‘मुझे लगा कि मैंने किसी भौतिक वैज्ञानिक से शादी की है। लेकिन एक दिन वह मेरे पास आए और कहा, ‘मैं वास्तव में जादू में कॅरिअर आजमाना चाहता हूं। मैंने कहा, ठीक है, अगर यह आपका जुनून है, तो यही कीजिए।

अगले साल से मैं कमाने लग गई।’ जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने यहूदी नरसंहार के एक पीड़ित का अध्ययन करने में इतना समय क्यों खपाया, तो उन्होंने सबसे पहले एक चुटकुला सुनाते हुए कहा, ‘मेरे परदादा की दो पत्नियां थीं, पहली यहूदी थी और उनकी दूसरी पत्नी मेरी परदादी थीं। इसलिए मैं यह कहना पसंद करता हूं कि मैं लगभग यहूदी हूं।’ फिर वह बताते हैं कि उन्हें डैमन के जीवन की कहानी एक अनूठा रहस्य लगी कि यह आदमी आखिर कौन था? और उसने इतिहास के सबसे काले क्षणों में यहूदियों और जादू के बारे में किताब क्यों लिखी?

उन्होंने बताया कि डैमन की जादू में रुचि तब शुरू हुई, जब वह 12 या 13 साल का था और अर्नेस्ट थॉर्न नामक एक सेवानिवृत्त जादूगर और पारिवारिक मित्र, जिनका ज्यूज इन मैजिक में जिक्र है, उनके गुरु बन गए। 21 साल की उम्र में डैमन जर्मनी के मैजिक सर्कल में शामिल हो गए, जो पेशेवर समाज और भाईचारे के संगठन का मिला-जुला रूप था, हालांकि इसमें महिला सदस्य भी थीं। डैमन ज्यूज इन मैजिक तैयार करने के खतरे को समझते थे। उन्होंने उस समय जीवित कुछ यहूदी जादूगरों से पुस्तक में शामिल करने की अनुमति भी मांगी, जिनमें से कुछ ने मना कर दिया। 

हैच का अनुमान है कि डैमन ने अपनी किताब की 500 प्रतियां छापीं और इसकी बिक्री बहुत कम हुई। 1933 में जर्मनी तानाशाही की ओर बढ़ रहा था। सितंबर तक यहूदियों को गैर-यहूदी दर्शकों के सामने मंच पर प्रस्तुति देने की अनुमति नहीं थी और जर्मन विश्वविद्यालयों में यहूदियों की संख्या में पहले ही भारी कटौती कर दी गई थी। 1937 तक डैमन के माता-पिता, दोनों की मृत्यु हो गई थी। ज्यूज इन मैजिक में शामिल कुछ कलाकारों की नाजियों ने हत्या कर दी। अन्य लोग यूरोप से भागकर अमेरिका चले गए और वहीं अपना कॅरिअर जारी रखा। आज हैच डैमन द्वारा याद किए गए लोगों की यादों को ऐतिहासिक शोध और व्याख्यानों से कहीं ज्यादा संजोकर रखते हैं।
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