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टाइम मशीन: टैक्स की तलवार... ब्रिटेन और उत्तराधिकार
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लेबर सरकार ने विदेशी संपत्ति पर भी 40 प्रतिशत इनहेरिटेंस टैक्स लगा दिया है।
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
नवंबर, 2025 के आखिरी सप्ताह में एक खबर दुनिया भर में फैल गई। भारतीय मूल के ब्रितानी अरबपति आर्सेलर मित्तल के मालिक, 15 अरब पाउंड की संपत्ति वाले लक्ष्मी नारायण मित्तल ब्रिटेन से जा रहे हैं। तीस साल तक वह ब्रिटेन में रहे। केंसिंग्टन पैलेस गार्डन की वह सड़क (जिसे ‘बिलियनेयर्स रो’ कहते हैं) पर एक महल खाली हो जाएगा, जिसका नाम था ताज मित्तल। मित्तल ब्रिटेन छोड़ रहे हैं, क्योंकि लेबर सरकार अमीरों पर नए टैक्स लगाने जा रही है, खासतौर पर उत्तराधिकार पर। अगर आपको लक्ष्मी मित्तल की रवानगी पर हैरत हो रही है, तो आइए टाइम मशीन में विराजिए, झट से 500 साल का सफर करके आते हैं।टाइम मशीन की पहली मंजिल है 1515 यानी ट्यूडर्स युग। लाल दाढ़ी वाला वह राजा, हेनरी अष्टम, जो बाद में छह बीवियां बदलेगा, अभी युवा है। उसके सलाहकार ट्यूडर सब्सिडीज का आदेश सुना रहे हैं। यह ब्रिटेन का पहला पर्सनल वेल्थ टैक्स है। अधिकारी गांव-गांव जा रहे हैं। लोगों से पूछा जा रहा है कि उनके पास कितनी भेड़ें, कितनी जमीन है? अमीर चतुर हैं, वह क्यों बताने लगे! कोई अपनी जायदाद को ‘टेम्पररी पॉवर्टी’ बताता है, तो कोई उसे रिश्तेदारों के नाम ट्रांसफर कर देता है। हर कोई खुद को सबसे गरीब बता रहा है। सौ साल बाद एलिजाबेथ प्रथम के जमाने तक यह टैक्स बहुत मामूली राजस्व ला सका, जबकि ब्रिटेन में अमीरों का सिक्का चल रहा था। भविष्य की कर व्यवस्था के लिए हेनरी का सबक था-जितना ज्यादा टैक्स लगेगा, लोग कमाई को उतना ज्यादा छिपाएंगे।
टाइम मशीन अब दौड़ पड़ी है सत्रहवीं सदी की ओर। यह ब्रिटेन का स्टुअर्ट युग है। 1630 का दशक। किंग चार्ल्स प्रथम के खजाने में चूहे दौड़ रहे हैं। संसद तैयार है कि किंग के खर्च पर पाबंदी लगाई जाए। चार्ल्स ने समुद्री टैक्स यानी ‘शिप मनी’ थोप दी है। संसद से इजाजत भी नहीं ली। यह टैक्स शिप मनी है, मगर समुद्र से दूर वाले इलाकों को भी देना पड़ता है। अब इंग्लैंड का माहौल बिगड़ रहा है। जॉन हैंपडन नाम के एक जमींदार ने कोर्ट में केस लड़ा। हालांकि, वह हार गया, पर हीरो बन गया है। यही शिप मनी संसद और किंग के बीच खुले युद्ध, यानी सिविल वार की वजह बन गई।
यह 30 जनवरी, 1649 है। नाराज जनता के सामने इंग्लैंड के सम्राट की गर्दन काट दी गई है। किंग की ताकत कम हुई और ऑलिवल क्रामवेल ने कॉमनवेल्थ बना दी है। मगर किंग कहां मानने वाले हैं! टाइम मशीन अब 1662 में उड़ रही है। चार्ल्स द्वितीय ने सिंहासन की ताकत वापस हासिल कर ली है। उन्होंने संपत्ति पर टैक्स का एलान कर दिया है। यह हर्थ टैक्स है, यानी हर चूल्हे पर सालाना कर। जितने चूल्हे, उतना अमीरी का सबूत। टैक्स लेने वाले घर के अंदर घुसकर चूल्हों की गिनती कर रहे हैं। अमीरों ने चूल्हे ईंटों से बंद करवा दिए। लोग भड़क रहे हैं और हम टाइम मशीन लेकर 1696 की तरफ बढ़ रहे हैं। विलियम थर्ड सिंहासन पर हैं। उन्होंने हर्थ, यानी चूल्हा टैक्स हटाकर खिड़की, यानी विंडो टैक्स लगा दिया है। अब जितनी खिड़कियां, उतना कर। अमीरों ने राजमिस्त्री बुलाए और खिड़कियां ईंटों से बंद करवा दीं। अब घरों में दिन में भी अंधेरा रहने लगा। इंग्लैंड के पुराने घरों में वे बंद खिड़कियां 330 साल बाद, यानी 21वीं सदी में पर्यटकों को दिखाई जाएंगी।
टाइम मशीन अब पहुंच रही है उस दौर में, जब पहली बार इनकम टैक्स अस्तित्व में आया। 1799 में नेपोलियन से जंग। विलियम पिट द यंगर ने पहला इनकम टैक्स लगा दिया है। 60 पाउंड से ऊपर की कमाई पर दो पैसे प्रति पाउंड, 200 पाउंड से ऊपर पर 10 फीसदी। 1802 में खत्म किया, 1803 में फिर शुरू। वाटरलू की लड़ाई के बाद 1816 में इनकम टैक्स खत्म कर दिया गया। अब इनकम टैक्स रिकॉर्ड लंदन में सार्वजनिक रूप से जलाए जा रहे हैं, ताकि लोग भरोसा करें कि सरकार उनकी जेब में हमेशा झांकती नहीं रहेगी। पिट द यंगर के प्रयोग से सरकारों को इनकम टैक्स की सूझ मिल गई है। यह 1842 का साल है। रॉबर्ट पील ने फिर इनकम टैक्स शुरू किया-सिर्फ सात पैसे प्रति पाउंड। इसके बाद इनकम टैक्स स्थायी हो जाएगा।
अब जरा 19वीं सदी की एस्टेट ड्यूटी से भी मिल ही लीजिए, जिसे (1894) में वित्त मंत्री सर विलियम हरकोर्ट ने शुरू किया है। यह मरने के बाद संपत्ति पर टैक्स है। सरकार ने देखा कि विशाल जमींदारियां और फैक्टरियां बिना टैक्स के बाप से बेटे को चली जाती थीं। मजदूरों की तनख्वाह पर टैक्स था, पर अमीरों की विरासत पर नहीं। हरकोर्ट ने इसे बदल दिया। यह 2025 के इनहेरिटेंस टैक्स का दादा है। वही टैक्स, जिसकी वजह से मित्तल ब्रिटेन छोड़ रहे हैं।
टाइम मशीन 1909 में है। डेविड लॉयड जॉर्ज ने ‘पीपुल्स बजट’ पेश किया है कि गरीबों की पेंशन के लिए ऊंची कमाई पर सुपरटैक्स, मरने के बाद और भी डेथ ड्यूटी, जमीन पर नया टैक्स घोषित किया गया है। हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सैकड़ों ड्यूक और अर्ल बैठे हैं, जिनकी जेब पर सीधी चोट पड़ रही है। उन्होंने बजट रोक दिया। देश में हंगामा मचा और दो चुनाव हुए हैं।
अब 1911 आ गया है। आखिर में बजट पास हुआ और पार्लियामेंट एक्ट से लॉर्ड्स की वीटो पावर हमेशा के लिए कमजोर कर दी गई। टाइम मशीन 1915 में है। पहली बड़ी जंग शुरू हो गई है। ब्रिटेन में भारी टैक्स आ गए हैं। वित्त मंत्री लॉयड जॉर्ज ने ब्रिटेन के सबसे बड़े मीट व्यापारी विलियम वेस्टे की कर रियायत की अर्जी ठुकरा दी है। वेस्टे पूरा व्यापार, हजारों नौकरियां, सारे जहाज लेकर अर्जेंटीना चले गए हैं। यह 1909 का साल है। ब्रिटेन का टैक्स सिस्टम हमेशा के लिए बदलने वाला है। कोर्ट ने फैसला किया है कि कंपनी ब्रिटेन में हो सकती है, टैक्स कहीं और का दे सकती है। यही फॉर्मूला बरमूडा, केमैन और स्विट्जरलैंड तक फैल जाएगा।
यह 1970 का दशक है। ब्रिटेन की बीमार अर्थव्यवस्था में निवेश लाने के लिए 1799 की पुरानी नॉन-डॉम स्कीम को चमकाया गया है। विदेश में जन्मे हो, ब्रिटेन में रहो, पर ‘परमानेंट होम’ कहीं और दिखाओ। ब्रिटेन की कमाई पर कर दो, बाकी दुनिया की कमाई पर कुछ नहीं। सालाना 30-60 हजार पाउंड फीस देकर अरबों बचाओ। लक्ष्मी मित्तल भी तीस साल इसी वजह से ब्रिटेन में जमे रहे।
टाइम मशीन अब लंदन में उतरने की तैयारी में है। आपको पता चलेगा कि 2024 में लेबर पार्टी सत्ता में आई, तो वित्त मंत्री रेचल रीव्स ने नॉन-डॉम स्कीम खत्म कर दी। नए लोगों को सिर्फ चार साल की छूट, उसके बाद पूरी दुनिया की कमाई पर टैक्स लगेगा। अगर कोई दस साल से ज्यादा रह रहा है, तो विदेशी संपत्ति पर भी 40 प्रतिशत इनहेरिटेंस टैक्स। सरकार का हिसाब है कि हर साल 32 अरब पाउंड आएंगे। इसके बाद अप्रैल, 2025 में एक महीने में 691 अमीर ब्रिटेन छोड़कर चले गए। लक्ष्मी मित्तल की संपत्ति 15 अरब पाउंड। अगर ब्रिटेन में रहेंगे, तो बच्चों को करीब छह अरब पाउंड इनहेरिटेंस टैक्स देना पड़ेगा।
लक्ष्मी मित्तल की टैक्स रेसिडेंसी अब स्विट्जरलैंड होगी। वह अब रहेंगे दुबई के नाइआ आइलैंड पर, जहां अब पूरी दुनिया के अरबपति बस रहे हैं। टाइम मशीन फिलहाल लंदन में रुकेगी। फिर मिलते हैं अगले सफर पर...