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चप्पा-चप्पा चरखा चले!

Thu, 18 Feb 2016 07:01 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 18 Feb 2016 07:01 PM IST
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 Spinning wheel

पापा, यह चप्पा-चप्पा क्या होता है? लगभग वयस्क हो रहे बेटे ने लगभग बुढ़ा रहे पिता यानी मुझसे पूछा।

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तुम्हें गुलजार के चक्कर में अभी से नहीं पड़ना चाहिए...! अभी कोर्स की कहानी-कविताएं पढ़ लो। गुलजार को बाद में समझते रहना। पिता होने की जिम्मेदारी निभाई मैंने।

मैं तो सिर्फ चप्पा-चप्पा क्या है, यह पूछ रहा हूं! उसने तैश में जवाब दिया।

हां, वही बता रहा हूं। गुलजार ने फिल्म माचिस में यह गीत लिखा था-चप्पा-चप्पा चरखा चले...तुम उसी की बात कर रहे हो न! मैंने बताना चाहा कि फिल्मों पर अपनी भी जोरदार पकड़ है।
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कौन गुलजार? मैंने तो कभी नहीं सुना। उसने पहले झटके में ही मुझे और गुलजार को झटक दिया।

तुम्हें शर्म आनी चाहिए...जिसने पहली बार 'चप्पा-चप्पा' का फिल्म में उपयोग किया, तुम उसे ही नहीं जानते...।

अच्छा 'तलवार' वाली मेघना गुलजार के पिता की बात कर रहे हैं आप...! उनका कोई गीत मैंने नहीं सुना।

इसीलिए तो तुम्हें नहीं मालूम। गुलजार के गीत सुनकर बता नहीं सकते कि इनकी भाषा क्या है...।

तो आप ही बता दीजिए कि यह चप्पा-चप्पा या चप्पे-चप्पे का मतलब क्या है?

असल बात तो यह है कि मैं यही समझता रहा कि चप्पा-चप्पा चरखा चलाया है गुलजार ने, तो यह शब्द पंजाबी का होगा...। चप्पा-चप्पा या चप्पे-चप्पे का मतलब हर जगह... जैसे निदा फाजली ने लिखा है न, हर जगह... हर तरफ बेशुमार आदमी... अगर गुलजार लिखते तो चप्पे-चप्पे पर बेशुमार आदमी ही लिखते! यह कवि-लेखक पर है कि क्या लिखता है...और क्यों लिखता है...! मैं बोले जा रहा था, पर बेटे ने चप्पल पहनी और बाहर निकल गया। तभी से परेशान हूं कि ये चप्पा-चप्पा आखिर बला क्या है? जानता हूं, गुलजार को छोड़कर किसी को इसका मतलब मालूम नहीं होगा, पर हैं कुछ शब्द, जो बगैर अर्थ के भी भरपूर बोले जाते हैं... चप्पे-चप्पे पर!
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