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आकलन: अंतरिक्ष में खनन की दौड़, खनिज, जल और ऊर्जा के अलावा नवाचार की भी संभावनाएं

Tue, 14 Nov 2023 07:02 AM IST
Vir Singh वीर सिंह
Updated Tue, 14 Nov 2023 07:02 AM IST
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सार
अंतरिक्ष खनन हमारे लिए अनगिनत अवसर और संभावनाएं प्रदान करता है। खनिज, जल और ऊर्जा के अलावा नवाचार की भी संभावनाएं इससे जुड़ी हैं।
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Space mining has potential opportunities with minerals, water, energy and innovation
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : NASA

विस्तार

भारत की चंद्रयान-3 की सफलता और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत की उपस्थिति की अपूर्व यशगाथा ने जैसे अंतरिक्ष अभियानों को नई ऊर्जा दे दी है! अब अंतरिक्ष अन्वेषणों के साथ उसके दोहन की भी तैयारियां हो रही हैं। विश्व के कई देशों की सरकारों और निजी कंपनियों ने न केवल अन्वेषणों के लिए, बल्कि संसाधनों के दोहन के लिए सितारों पर अपनी गिद्ध दृष्टि गड़ा दी है।



अंतरिक्ष में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को खोजने और उनका दोहन करने के लिए एक वैश्विक दौड़ शुरू हो गई है। अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचारों से सक्षम भारत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश निजी कंपनियों के सहयोग से अंतरिक्ष ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। अमेरिका और चीन भी आर्टिमिस समझौते और अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन के माध्यम से इन अंतरिक्ष संसाधनों तक पहुंचने की प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।


अंतरिक्ष खनन के लिए जो तकनीकें विकसित की जा रही हैं, उनमें प्रमुख हैं रोबोट्स उपग्रह, जिनका उपयोग वर्तमान में खगोलशात्रीय आकलन, खनिज संचयन, और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जा रहा है। तकनीकी प्रगति ने चंद्र मिशनों की लागत को काफी कम कर दिया है। इसका श्रेय पुनः प्रयोज्य रॉकेट प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्रांति द्वारा संचालित अंतरिक्ष यान डिजाइन को दिया जाता है।

दो अमेरिकी कंपनियां-स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन सुपर हैवी लिफ्ट लॉन्चर विकसित कर रहीं हैं, जो बड़े पेलोड को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जा सकते हैं। विश्व भर में कई अन्य पुनः प्रयोज्य वाहन विकसित किए जा रहे हैं। अंतरिक्ष संसाधनों में मुख्य रूप से जल-युक्त चंद्र वाष्पशील पदार्थ और रेजोलिथ सम्मिलित हैं। चंद्र जल एक मूल्यवान संसाधन है, क्योंकि चंद्र जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित कर रॉकेट ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

पृथ्वी की अपेक्षा चंद्रमा के निर्बल गुरुत्वाकर्षण के कारण चंद्रमा से पानी निकालना और उसे परिवहन के उपयोग में लाना आसान है, जिससे यह अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक संभावित गेम-चेंजर बन सकता है। इसके अलावा चंद्रमा का रेजोलिथ भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भोजन, जल, वायु, और निर्माण सामग्री सहित आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकता है। अंतरिक्ष संसाधन स्थलीय खनन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी सहायता कर सकते हैं, विशेष रूप से निकल, कोबाल्ट, और पृथ्वी की दुर्लभ धातुओं के लिए, जो पृथ्वी पर स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त ऊर्जा के लिए आवश्यक हैं।

अमेरिका में नासा के मोक्सी ने हाल के प्रयोगों से अन्य ग्रहों के संसाधनों जैसे कि मंगल के वायुमंडल से ऑक्सीजन का उत्पादन करने की उत्सुकता प्रकट की है। नासा की दृष्टि पृथ्वी के चंद्रमा से लेकर शुक्र, मंगल, शनि और शनि के चंद्रमाओं तक पर है, जहां पर वह दुर्लभतम धातुओं के खनन से लेकर ऊर्जा स्रोतों तक के दोहन की तैयारियां कर रही हैं। भारत भी पीछे नहीं है। मंगल मिशन, चंद्र मिशन और सूर्य मिशन के बाद शुक्र ग्रह हमारा अगला लक्ष्य हो सकता है।

अंतरिक्ष की अपनी पर्यावरणीय चुनौतियां हैं। रॉकेट लॉन्चिंग की घटनाओं की भरमार से वायुमंडल पर असर पड़े बिना नहीं रह सकता, और पृथ्वी पर सामग्री लौटने से जलवायु पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, अंतरिक्ष खनन नाजुक अंतरिक्ष पर्यावरण को बाधित कर सकता है तथा अंतरिक्ष यानों एवं अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अनेक जोखिम पैदा कर सकता है। अंतरिक्ष अनुसंधान और अंतरिक्ष संसाधनों के विवेकपूर्ण दोहन के क्षेत्र में इसरो भारत को अंतरिक्ष गुरु बना सकता है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी ब्रह्मांड के अनेक रहस्य छिपे हो सकते हैं। प्राचीन भारतीय ग्रंथों को पुनः खंगाल कर उनमें छिपे ज्ञान का 'खनन' भी आवश्यक है।

अंतरिक्ष खनन एक ऐसा क्षेत्र है, जो हमारे लिए अनगिनत अवसर और संभावनाएं प्रदान करता है। खनिज, जल और ऊर्जा के अतिरिक्त नवाचार की भी अनेक संभावनाएं इस क्षेत्र से जुड़ी हैं। इन खोजों से प्राप्त होने वाले खगोलीय डाटा से हमारे अंतरिक्ष ज्ञान को और विस्तार मिलेगा।
-लेखक जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्विद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस हैं।

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